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भारतीय संस्कृति में लिंग भेद का कोई स्थान नहीं
Updated Mon, 20 Nov 2017 08:02 PM IST
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लखीमपुर खीरी। नारी अस्मिता और स्वाभिमान को समर्पित नारी सशक्तिकरण पखवारे का शुभारंभ सोमवार को भगवानदीन आर्यकन्या इंटर कॉलेज में हुआ। राष्ट्र सेविका समिति की अगुवाई में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्रधानाचार्य अंजली श्रीवास्तव ने की और संचालन क्षमा टंडन ने किया।
शिक्षक क्षमा टंडन ने नारी जागृति और सशक्तिकरण की मुहिम को और तेज करने पर बल दिया। विषय प्रवर्तन करते हुए इतिहास संकलन समिति के विभाग प्रमुख राजेश दीक्षित ने कहा कि समाज में नारी की पहचान उसकी देह या ग्लैमर से नहीं बल्कि उसकी बौद्धिक प्रतिभा, वैचारिक चेतना और आध्यात्मिक तेजस्विता से होगी। सनातन भारतीय संस्कृति व कालजयी वैचारिक चेतना में लिंग भेद का कोई स्थान नहीं है। स्त्री या पुरुष का निर्धारण केवल शारीरिक स्तर पर ही होता है। शरीर के अतिरिक्त मानसिक, बौद्धिक, वैचारिक स्तर पर न कोई स्त्री है या पुरुष मानव केवल मानव ही है।
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उन्होंने कहा कि हमारा नारी सशक्तिकरण पश्चिम के नारी मुक्ति आंदोलन से भिन्न है। हम पश्चिम का अंधानुकरण किए बिना स्वयं को कैसे आधुनिक करें, क्योंकि आधुनिकता सोच व विचारों में ह,ोती है न कि कपड़ों में। गोष्ठी में प्रीति पांडेय, वंदना, मंजू त्रिवेदी, इंदु मिश्रा, निर्मला शुक्ला समेत छात्राएं और शिक्षक मौजूद रहीं।
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