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डोली भूमि गिरा दसकंधर, छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर
Updated Sat, 30 Sep 2017 11:45 PM IST
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डोली भूमि गिरा दसकंधर, छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर
- फोटो : लखीमपुर खीरी, अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी।
शहर की ऐतिहासिक रामलीला में अहंकार और बुराई का प्रतीक रावण मारा गया। असत्य पर सत्य की जीत हुई। अनाचार पर सदाचार की, बुराई पर अच्छाई की जीत हुई। रावण वध के पहले समुद्र पर पुल बांधने, विभीषण के शरण में आने की लीलाओं के साथ लक्ष्मण को शक्ति लगने, लक्ष्मण मेघनाद युद्ध, रावण कुंभकर्ण युद्ध, कुंभकर्ण और मेघनाद वध के बाद राम रावण युद्ध और अंत में रावण वध का मंचन किया गया।
कुंभकर्ण और मेघनाद वध के बाद रावण युद्ध के लिए आता है। राम और रावण के बीच घोर युद्ध होता है। राम के बाण से रावण के सिर और भुजाएं कट जाती हैं, लेकिन तुरंत ही दूसरे निकल आते हैं। तब विभीषण राम को रावण वध का उपाय बताते हैं। विभीषण बताते हैं कि रावण की नाभि में अमृत है।
विभीषण से यह रहस्य जानकर राम एक साथ 31 बाण चलाते हैं। ‘खैंचि सरासन श्रवण लगि छाड़े सर एकतीसा, रधुनायक सायक चले मानहुं काल फणीसा।’ ‘सायक एक नाभि सर सोषा, अपर लगे भुज सिर करि रोषा’ राम का एक बाण रावण की नाभि में लगता है, जिससे रावण की नाभि का अमृत सूख जाता है। शेष बाणों से रावण के दस शीश और बीस भुजाएं कट जाती हैं। रावण गर्जना करता हुआ भूमि पर गिर जाता है। ‘डोली भूमि गिरत दसकंधर छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर।’ रावण के मरते ही उसकी सेना छिन्न भिन्न हो जाती है।
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रामलीला में रावण वध के साथ भव्य आतिशबाजी होती है। दर्शक जय श्रीराम का जयघोष कर उठते हैं। रावण वध को देखने के लिए हजारों दर्शक मौजूद रहे। हर तरफ आनंद का वातावरण दिखाई दिया।
धौरहरा खीरी। कस्बे में चल रहे दशहरा मेला में शनिवार को कुंभकरण, मेघनाद वध लंका दहन के अलावा रावण वध लीला का मंचन हुआ। इस अवसर पर मेला कमेटी के अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ल, सुरेंद्र जायसवाल, सुदीप निगम, नंदकिशोर जायसवाल आदि मौजूद रहे। इसके अलावा रामनगर बगहा गांव में भी रावण वध की लीला का मंचन हुआ और रावण के पुतले का दहन किया गया।
‘बुराइयों पर अच्छाई की जीत है विजयदशमी ’
मोहम्मदी। आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने विजयदशमी का पर्व पीडी कॉलेज में हर्षोल्लास के साथ मनाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीतापुर विभाग के कार्यवाह विष्णुदत्त दीक्षित ने कहा कि विजयदशमी बुराईयों पर अच्छाई की जीत का पर्व है।
उन्होंने कहा कि आज के दिन हम शक्ति और शस्त्रों की पूजा करते हैं। शक्ति जब कुपात्र के पास पहुंचती है तो उसका दुरुपयोग और जब सुपात्र के पास पहुंचती है तब उसका सदुपयोग होता है। हमारे आराध्य भगवान राम और कृष्ण ने कभी भी शक्ति का दुरुपयोग नहीं किया। शक्ति के प्रयोग का उद्देश्य मानवता और भलाई के लिए होना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुंभी चीनी मिल के एचआरडी हेड एनके शुक्ला ने की। इस मौके पर जिला सह संघचालक अमित भसीन, नरेंद्र मेहरोत्रा, गोपाल मोहन रस्तोगी, अतुल रस्तोगी, सौरभ गुप्ता, रोहित मिश्रा आदि मौजूद रहे।
पाल में धूमधाम से मनाया गया दशहरा
धनगढ़ी-नेपाल।
नेपाल का सबसे बड़ा पर्व दशहरा बड़े ही धूमधाम व उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान पशुओं की बलि दी गई।
दशहरा पर शनिवार को घर-घर में सभी ने नए वस्त्र धारण कर नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के दिन मिट्टी में जमाए गए जौ की बालियों को परिवार के बड़े सदस्यों ने छोटे सदस्यों को टीका लगाने के बाद कान में आर्शीवाद स्वरूप लगाया। घरों में पकवान मिठाई के साथ -साथ अन्य प्रकार के भोजन बनाए गए। इस मौके पर दावतों का सिलसिला भी सारा दिन चलता रहा। टीका लगाने का कार्यक्रम अगले पांच दिनों तक चलेगा। इसके अलावा दशहरा पर अष्टमी के दिन से ही पशुओं की बलि दिए जाने का भी प्रचलन है। अष्टमी के दिन से शुरू हुआ यह सिलसिला आज दशहरा दिन तक चलता रहा।
बच्चों ने फूंका रावण का पुतला
गोला गोकर्णनाथ।
नगर के निकटवर्ती ग्राम पंचायत पुनर्भूग्रंट के मोहल्ला गुप्ता कॉलोनी में विपिन शर्मा, अंबेश गुप्ता, अभिषेक गुप्ता, दीपक गुप्ता, प्रभात पांडे आदि ने खाली प्लाट में रावण का पुतला बनाकर खड़ा किया, जिसे सूरज ढलने के बाद जय श्रीराम के नारों के साथ फूंक दिया। बच्चों का कहना है कि उन्हें श्रीराम काफी पसंद हैं। इसीलिए वह रोज मेला मैदान में अपने माता-पिता के साथ श्री रामलीला भी देखने जाते हैं।
खमरिया में नहीं हुआ रावण दहन
खमरिया।
कस्बे में चल रही श्रीरामलीला में इस बार रावण का पुतला नहीं बनाया गया। दस दिनों तक रामलीला में विभिन्न लीलाओं का मंचन हुआ। शनिवार को रावण वध का मंचन तो हुआ, लेकिन पुतला न बना होने के कारण रावण के पुतले का दहन नहीं हो सका।
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शहर की ऐतिहासिक रामलीला में अहंकार और बुराई का प्रतीक रावण मारा गया। असत्य पर सत्य की जीत हुई। अनाचार पर सदाचार की, बुराई पर अच्छाई की जीत हुई। रावण वध के पहले समुद्र पर पुल बांधने, विभीषण के शरण में आने की लीलाओं के साथ लक्ष्मण को शक्ति लगने, लक्ष्मण मेघनाद युद्ध, रावण कुंभकर्ण युद्ध, कुंभकर्ण और मेघनाद वध के बाद राम रावण युद्ध और अंत में रावण वध का मंचन किया गया।
कुंभकर्ण और मेघनाद वध के बाद रावण युद्ध के लिए आता है। राम और रावण के बीच घोर युद्ध होता है। राम के बाण से रावण के सिर और भुजाएं कट जाती हैं, लेकिन तुरंत ही दूसरे निकल आते हैं। तब विभीषण राम को रावण वध का उपाय बताते हैं। विभीषण बताते हैं कि रावण की नाभि में अमृत है।
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विभीषण से यह रहस्य जानकर राम एक साथ 31 बाण चलाते हैं। ‘खैंचि सरासन श्रवण लगि छाड़े सर एकतीसा, रधुनायक सायक चले मानहुं काल फणीसा।’ ‘सायक एक नाभि सर सोषा, अपर लगे भुज सिर करि रोषा’ राम का एक बाण रावण की नाभि में लगता है, जिससे रावण की नाभि का अमृत सूख जाता है। शेष बाणों से रावण के दस शीश और बीस भुजाएं कट जाती हैं। रावण गर्जना करता हुआ भूमि पर गिर जाता है। ‘डोली भूमि गिरत दसकंधर छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर।’ रावण के मरते ही उसकी सेना छिन्न भिन्न हो जाती है।
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रामलीला में रावण वध के साथ भव्य आतिशबाजी होती है। दर्शक जय श्रीराम का जयघोष कर उठते हैं। रावण वध को देखने के लिए हजारों दर्शक मौजूद रहे। हर तरफ आनंद का वातावरण दिखाई दिया।
धौरहरा खीरी। कस्बे में चल रहे दशहरा मेला में शनिवार को कुंभकरण, मेघनाद वध लंका दहन के अलावा रावण वध लीला का मंचन हुआ। इस अवसर पर मेला कमेटी के अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ल, सुरेंद्र जायसवाल, सुदीप निगम, नंदकिशोर जायसवाल आदि मौजूद रहे। इसके अलावा रामनगर बगहा गांव में भी रावण वध की लीला का मंचन हुआ और रावण के पुतले का दहन किया गया।
‘बुराइयों पर अच्छाई की जीत है विजयदशमी ’
मोहम्मदी। आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने विजयदशमी का पर्व पीडी कॉलेज में हर्षोल्लास के साथ मनाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीतापुर विभाग के कार्यवाह विष्णुदत्त दीक्षित ने कहा कि विजयदशमी बुराईयों पर अच्छाई की जीत का पर्व है।
उन्होंने कहा कि आज के दिन हम शक्ति और शस्त्रों की पूजा करते हैं। शक्ति जब कुपात्र के पास पहुंचती है तो उसका दुरुपयोग और जब सुपात्र के पास पहुंचती है तब उसका सदुपयोग होता है। हमारे आराध्य भगवान राम और कृष्ण ने कभी भी शक्ति का दुरुपयोग नहीं किया। शक्ति के प्रयोग का उद्देश्य मानवता और भलाई के लिए होना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुंभी चीनी मिल के एचआरडी हेड एनके शुक्ला ने की। इस मौके पर जिला सह संघचालक अमित भसीन, नरेंद्र मेहरोत्रा, गोपाल मोहन रस्तोगी, अतुल रस्तोगी, सौरभ गुप्ता, रोहित मिश्रा आदि मौजूद रहे।
पाल में धूमधाम से मनाया गया दशहरा
धनगढ़ी-नेपाल।
नेपाल का सबसे बड़ा पर्व दशहरा बड़े ही धूमधाम व उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान पशुओं की बलि दी गई।
दशहरा पर शनिवार को घर-घर में सभी ने नए वस्त्र धारण कर नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के दिन मिट्टी में जमाए गए जौ की बालियों को परिवार के बड़े सदस्यों ने छोटे सदस्यों को टीका लगाने के बाद कान में आर्शीवाद स्वरूप लगाया। घरों में पकवान मिठाई के साथ -साथ अन्य प्रकार के भोजन बनाए गए। इस मौके पर दावतों का सिलसिला भी सारा दिन चलता रहा। टीका लगाने का कार्यक्रम अगले पांच दिनों तक चलेगा। इसके अलावा दशहरा पर अष्टमी के दिन से ही पशुओं की बलि दिए जाने का भी प्रचलन है। अष्टमी के दिन से शुरू हुआ यह सिलसिला आज दशहरा दिन तक चलता रहा।
बच्चों ने फूंका रावण का पुतला
गोला गोकर्णनाथ।
नगर के निकटवर्ती ग्राम पंचायत पुनर्भूग्रंट के मोहल्ला गुप्ता कॉलोनी में विपिन शर्मा, अंबेश गुप्ता, अभिषेक गुप्ता, दीपक गुप्ता, प्रभात पांडे आदि ने खाली प्लाट में रावण का पुतला बनाकर खड़ा किया, जिसे सूरज ढलने के बाद जय श्रीराम के नारों के साथ फूंक दिया। बच्चों का कहना है कि उन्हें श्रीराम काफी पसंद हैं। इसीलिए वह रोज मेला मैदान में अपने माता-पिता के साथ श्री रामलीला भी देखने जाते हैं।
खमरिया में नहीं हुआ रावण दहन
खमरिया।
कस्बे में चल रही श्रीरामलीला में इस बार रावण का पुतला नहीं बनाया गया। दस दिनों तक रामलीला में विभिन्न लीलाओं का मंचन हुआ। शनिवार को रावण वध का मंचन तो हुआ, लेकिन पुतला न बना होने के कारण रावण के पुतले का दहन नहीं हो सका।