{"_id":"65a996a67ba7c9ab90063279","slug":"565-crores-spent-still-handed-over-to-tehsil-irregularities-lakhimpur-news-c-120-1-sbly1018-13211-2024-01-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: 5.65 करोड़ खर्च... फिर भी तहसील अव्यवस्थाओं के हवाले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: 5.65 करोड़ खर्च... फिर भी तहसील अव्यवस्थाओं के हवाले
विज्ञापन
मितौली। सात साल बाद भी मितौली तहसील व्यवस्थित रूप से शुरू नहीं हो सकी। कहने को तो तहसील का नया भवन बना है, लेकिन निर्माण कार्य पूरा न होने के चलते आज तक हैंडओवर नहीं हो सका। बिना हैंडओवर हुए ही इस भवन में अव्यवस्थाओं के बीच कार्यालय संचालित किए जाने लगे, जबकि निर्माण में 5.65 करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि खर्च हो चुकी है। कार्यदायी संस्था की मनमानी का दंश लोगों को दिक्कतें झेलकर भुगतना पड़ रहा है।
मितौली तहसील के अनावासीय भवन का निर्माण एक दिसंबर 2016 को कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड सीतापुर ने शुरू किया था। निर्माण पर 5.65 करोड़ रुपये व्यय अनुमानित था। समय पर कार्य पूरा न होने पर लागत हर साल बढ़ती गई। निर्धारित एस्टीमेट में कार्य पूरा नहीं हो सका। बाद में शासन से अतिरिक्त बजट की मांग की गई। साल 2021 में अतिरिक्त बजट भी जारी किया गया था।
बताते हैं कि बजट रिवाइज होने के बाद भी फंड समय से नहीं मिला। समय पर कार्य पूरा न होने के कारण निर्माण की लागत में करीब 1.35 करोड़ बढ़ गई। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड सीतापुर की लापरवाही जारी रही। सितंबर 2023 को ब्लॉक व बीआरसी में संचालित तहसील को बिना हैंडओवर नई तहसील के भवन में शिफ्ट कर दिया गया।
विज्ञापन
ये कार्य हैं अधूरे
परिसर में इंटरलॉकिंग का काम नहीं हुआ है। इसके अलावा कैंपस का रास्ता अधूरा है। ओवरहेड टैंक क्रियाशील नहीं है। वाटर टैंक से पानी की सप्लाई नहीं है। एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार कोर्ट में रेलिंग व डैशबोर्ड नहीं है। एसडीएम कार्यालय में जाने के लिए दिव्यांगजनों के लिए रैंप नहीं है। जो काम पूरे हो चुके हैं, उनमें भी खामियां हैं। इससे अफसरों के साथ ही फरियादियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जुलाई 2022 से लगातार जिलाधिकारी के माध्यम से बोर्ड ऑफ रेवेन्यू व कार्यदायी संस्था को पत्र जारी कर अधूरे पड़े कार्यों के बारे में बताया ज चुका है।
-विनीत कुमार उपाध्याय, एसडीएम मितौली
विज्ञापन
मितौली तहसील के अनावासीय भवन का निर्माण एक दिसंबर 2016 को कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड सीतापुर ने शुरू किया था। निर्माण पर 5.65 करोड़ रुपये व्यय अनुमानित था। समय पर कार्य पूरा न होने पर लागत हर साल बढ़ती गई। निर्धारित एस्टीमेट में कार्य पूरा नहीं हो सका। बाद में शासन से अतिरिक्त बजट की मांग की गई। साल 2021 में अतिरिक्त बजट भी जारी किया गया था।
विज्ञापन
बताते हैं कि बजट रिवाइज होने के बाद भी फंड समय से नहीं मिला। समय पर कार्य पूरा न होने के कारण निर्माण की लागत में करीब 1.35 करोड़ बढ़ गई। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड सीतापुर की लापरवाही जारी रही। सितंबर 2023 को ब्लॉक व बीआरसी में संचालित तहसील को बिना हैंडओवर नई तहसील के भवन में शिफ्ट कर दिया गया।
विज्ञापन
ये कार्य हैं अधूरे
परिसर में इंटरलॉकिंग का काम नहीं हुआ है। इसके अलावा कैंपस का रास्ता अधूरा है। ओवरहेड टैंक क्रियाशील नहीं है। वाटर टैंक से पानी की सप्लाई नहीं है। एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार कोर्ट में रेलिंग व डैशबोर्ड नहीं है। एसडीएम कार्यालय में जाने के लिए दिव्यांगजनों के लिए रैंप नहीं है। जो काम पूरे हो चुके हैं, उनमें भी खामियां हैं। इससे अफसरों के साथ ही फरियादियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जुलाई 2022 से लगातार जिलाधिकारी के माध्यम से बोर्ड ऑफ रेवेन्यू व कार्यदायी संस्था को पत्र जारी कर अधूरे पड़े कार्यों के बारे में बताया ज चुका है।
-विनीत कुमार उपाध्याय, एसडीएम मितौली