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प्रचलित कॉरीडोर से आगे तक आ गए थे हाथी!

Tue, 18 Dec 2018 11:59 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 18 Dec 2018 11:59 PM IST
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प्रचलित कॉरीडोर से आगे तक आ गए थे हाथी!
प्रचलित रूट या जेनेटिक मेमोरी के सहारे यहां आ गए थे हाथी!
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लखीमपुर खीरी। जंगली हाथी अपने पूर्व प्रचलित रूट से आगे बढ़कर बंगलहा पहुंचे थे या अपनी जेनेटिक मेमोरी के सहारे यहां आए, वन विभाग के अधिकारी इसका अध्ययन कर रहे हैं। हाथियों के आवागमन के पुराने रूट मंझरा जंगल से बंगलहा की दूरी 25 किलोमीटर से अधिक है। यदि हाथियों ने यह नया रूट विकसित किया है तो इस क्षेत्र के लोगों के लिए आगे भी खतरा हो सकता है। फिलहाल तो यह हाथी अपने पुराने रूट पर मंझरा जंगल चला गया है लेकिन यह दुबारा वापस नहीं आएगा, इसको लेकर संशय बरकरार है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी हमेशा अपने निर्धारित रास्तों से ही आवागमन करते हैं। यदि इनके पुरखे किसी रास्ते से होकर गुजरते हैं तो इनकी जेनेटिक मिमोरी में वह मार्ग सेव हो जाता है। हाथी उस रास्ते को कभी न कभी इस्तेमाल जरूर करते हैं। जरूरत के अनुसार हाथी नए रास्ते भी विकसित करते हैं। नेपाल से कौड़ियाला घाट, मंझरा जंगल होते हुए कर्तनिया घाट हाथियों का प्रचलित रास्ता है। मंझरा से 25 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर यहां तक हाथियों के आने की यह दूसरी घटना है। इससे ठीक एक माह पहले भी हाथी ढखेरवा खालसा तक आकर लौट गए थे। दूसरी बार हाथियों के यहां तक आने से वन विभाग की चिंताएं बढ़ गईं हैं।
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वन विभाग इस तथ्य पर अध्ययन कर रहा है कि हाथियों ने यहां तक का नया रूट विकसित किया है या जेनेटिक मिमोरी के सहारे यहां तक पहुंचे हैं। इसके लिए वन विभाग हाथियों के रूट के पुराने रिकार्ड खंगाल रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि यदि हाथियों ने अपना नया रूट विकसित किया है तो इस इलाके के लिए आगे हाथियों से खतरा बढ़ सकता है।
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देश में हाथियों के हमले से मरते है 100 से 300 लोग
एक अध्ययन के दौरान यह बात सामने आई है कि देश में हर साल हाथियों के हमले में 100 से तीन सौ लोगों की मौत होती है। इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप 50 से 60 हाथियों की भी मौत होती है। प्रतिक्रिया स्वरूप होने वाली जंगली हाथियों की प्राय: करंट लगाने से जहर देने से मौत होती है। हालांकि जिला खीरी में हाथियों की हमले की घटनाएं बहुत कम हैं। तीन चार साल पहले दुधवा नेशनल पार्क के मसानखंभ में एक जंगली हाथी ने एक राहगीर को पैरों से कुचल कर मार डाला था। बंगलहा में हाथी के हमले में रामेश्वर की मौत का यह दूसरा मामला है।
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