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बंशीधर शुक्ल रमई काका को पढ़ेंगे बीए के विद्यार्थी
Updated Sat, 21 Jul 2018 12:02 AM IST
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बंशीधर शुक्ल रमई काका को पढ़ेंगे बीए के विद्यार्थी
गणेश शंकर विद्यार्थी, हरिवंशराय बच्चन कोर्स में शामिल
10 साल बाद हो रहा विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में बदलाव
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के हिंदी पाठ्यक्रम में दस साल बाद बड़ा बदलाव होने जा रहा है। हिंदी पाठ्यक्रम समिति ने स्नातक कक्षा के हिंदी साहित्य विषय में अवधी भाषा को भी शामिल करने का सुझाव दिया है। इसे सैद्धांतिक रूप से स्वीकार भी कर लिया गया है केवल विश्वविद्यालय के बोर्ड आफ स्टडीज की मुहर लगना बाकी है। यह बदलाव विश्वविद्यालय के अगले शैक्षिक सत्र से नजर आएंगे।
प्रदेश के लखीमपुर-खीरी, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली, हरदोई, बहराइच ही नहीं लखनऊ और इलाहाबाद समेत कई जिलों के डिग्री कॉलेज छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से संबद्ध हैं। विश्वविद्यालय ने इस बार विभिन्न विषयों के पाट्यक्रमों को समय के अनुसार आधुनिक रूप देने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रत्येक विषय के लिए पाठ्यक्रम समितियां गठित की गई हैं। हिंदी विषय की पाठ्यक्रम समिति लखीमपुर के भगवान दीन आर्यकन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निरुपमा अशोक के संयोजन में गठित की गई है। समिति में इसी कॉलेज की डॉ. वीना रानी गुप्ता भी शामिल हैं।
हिंदी पाठ्यक्रम समिति ने स्नातक हिंदी के तृतीय प्रश्नपत्र में बृज भाषा के साथ अवधी भाषा को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है। विश्वविद्यालय का अधिकांश क्षेत्र अवध का हिस्सा है। इसे देखते हुए अवधी को हिंदी के पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। अब बीए में हिंदी साहित्य के विद्यार्थी अवधी सम्राट पं. बंशीधर शुक्ल, चंद्र भूषण त्रिवेदी रमई काका, द्वारिका प्रसाद मिश्र, बलभ्रद्र प्रसाद दीक्षित पढ़ीस, डॉ. श्याम सुंदर मधुप आदि अवधी के जाने माने अवधी कवियों की रचनाओं को शामिल किया गया है। लखनऊ विश्व विद्यालय में तो पहले से ही अवधी स्थापित है लेकिन कानपुर विश्वविद्यालय में पहली बार अवधी को पूरी तरह स्वायत्त स्थान मिलने जा रहा है।
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यही नहीं जाने माने पत्रकार, साहित्यकार और स्वाधीनता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी, हरिवंश रॉय बच्चन, विश्वंभरनाथ शर्मा कौशिक, प्रताप नरायन श्रीवास्तव, सुदामा पांडेय धूमिल, केदारनाथ सिंह, मुंशीराम शर्मा, बालकृष्ण शर्मा नवीन विष्णुकांत शास्त्री, अयोध्यानाथ शर्मा आदि की रचनाओं को भी स्नातक हिंदी के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। सबसे उल्लेखनीय यह है कि मुसलमान कवियों की हिंदी साधना को बीए के पाठ्यक्रम में जोड़ते हुए हिंदी साहित्य के द्वितीय प्रश्नपत्र अब्दुलुरहमान की रचनाओं को लिया जा रहा है।
बीए द्वितीय वर्ष हिंदी में महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान, श्रीधर पाठक, माखनलाल चतुर्वेदी और अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की चयनित श्रेष्ठ रचनाओं को भी शामिल किया जा रहा है। हिंदी पाठ्यक्रम समिति की संयोजक और भगवानदीन आर्यकन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निरुपमा अशोक ने बताया कि हिंदी के पाठ्यक्रम को समयानुकूल आधुनिक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
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गणेश शंकर विद्यार्थी, हरिवंशराय बच्चन कोर्स में शामिल
10 साल बाद हो रहा विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में बदलाव
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के हिंदी पाठ्यक्रम में दस साल बाद बड़ा बदलाव होने जा रहा है। हिंदी पाठ्यक्रम समिति ने स्नातक कक्षा के हिंदी साहित्य विषय में अवधी भाषा को भी शामिल करने का सुझाव दिया है। इसे सैद्धांतिक रूप से स्वीकार भी कर लिया गया है केवल विश्वविद्यालय के बोर्ड आफ स्टडीज की मुहर लगना बाकी है। यह बदलाव विश्वविद्यालय के अगले शैक्षिक सत्र से नजर आएंगे।
प्रदेश के लखीमपुर-खीरी, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली, हरदोई, बहराइच ही नहीं लखनऊ और इलाहाबाद समेत कई जिलों के डिग्री कॉलेज छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से संबद्ध हैं। विश्वविद्यालय ने इस बार विभिन्न विषयों के पाट्यक्रमों को समय के अनुसार आधुनिक रूप देने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रत्येक विषय के लिए पाठ्यक्रम समितियां गठित की गई हैं। हिंदी विषय की पाठ्यक्रम समिति लखीमपुर के भगवान दीन आर्यकन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निरुपमा अशोक के संयोजन में गठित की गई है। समिति में इसी कॉलेज की डॉ. वीना रानी गुप्ता भी शामिल हैं।
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हिंदी पाठ्यक्रम समिति ने स्नातक हिंदी के तृतीय प्रश्नपत्र में बृज भाषा के साथ अवधी भाषा को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है। विश्वविद्यालय का अधिकांश क्षेत्र अवध का हिस्सा है। इसे देखते हुए अवधी को हिंदी के पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। अब बीए में हिंदी साहित्य के विद्यार्थी अवधी सम्राट पं. बंशीधर शुक्ल, चंद्र भूषण त्रिवेदी रमई काका, द्वारिका प्रसाद मिश्र, बलभ्रद्र प्रसाद दीक्षित पढ़ीस, डॉ. श्याम सुंदर मधुप आदि अवधी के जाने माने अवधी कवियों की रचनाओं को शामिल किया गया है। लखनऊ विश्व विद्यालय में तो पहले से ही अवधी स्थापित है लेकिन कानपुर विश्वविद्यालय में पहली बार अवधी को पूरी तरह स्वायत्त स्थान मिलने जा रहा है।
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यही नहीं जाने माने पत्रकार, साहित्यकार और स्वाधीनता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी, हरिवंश रॉय बच्चन, विश्वंभरनाथ शर्मा कौशिक, प्रताप नरायन श्रीवास्तव, सुदामा पांडेय धूमिल, केदारनाथ सिंह, मुंशीराम शर्मा, बालकृष्ण शर्मा नवीन विष्णुकांत शास्त्री, अयोध्यानाथ शर्मा आदि की रचनाओं को भी स्नातक हिंदी के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। सबसे उल्लेखनीय यह है कि मुसलमान कवियों की हिंदी साधना को बीए के पाठ्यक्रम में जोड़ते हुए हिंदी साहित्य के द्वितीय प्रश्नपत्र अब्दुलुरहमान की रचनाओं को लिया जा रहा है।
बीए द्वितीय वर्ष हिंदी में महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान, श्रीधर पाठक, माखनलाल चतुर्वेदी और अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की चयनित श्रेष्ठ रचनाओं को भी शामिल किया जा रहा है। हिंदी पाठ्यक्रम समिति की संयोजक और भगवानदीन आर्यकन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निरुपमा अशोक ने बताया कि हिंदी के पाठ्यक्रम को समयानुकूल आधुनिक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।