{"_id":"5af5f0334f1c1bce408b4957","slug":"51526067251-lakhimpur-kheri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौत का भी डर नहीं फर्राटा भर रहे नाबालिग छात्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौत का भी डर नहीं फर्राटा भर रहे नाबालिग छात्र
Updated Sat, 12 May 2018 01:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
11 एलकेएच 1, 2
यदि अभिभावक सजग हो जाएं तो बच जाए लाडलों की जान
स्कूली छात्र धड़ल्ले से बिना हेलमेट कर रहे ट्रिपल राइडिंग
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। तेज रफ्तार और ट्रिपल राइडिंग से पिछले दिनों हुई छात्र की मौत के बाद भी न तो छात्र सुधरने का नाम ले रहे हैं, न स्कूल प्रशासन। अभिभावक भी अपने बच्चों की जान को लेकर गंभीर नहीं हैं। नतीजतन नाबालिग छात्र स्कूटी और बाइकों पर तीन-चार साथियों को बैठाकर फर्राटा भर रहे हैं। यह प्रवृत्ति सबसे ज्यादा हाईस्कूल और इंटर के विद्यार्थियों में है। इनके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं होता।
विद्यार्थियों में दो पहिया वाहनों का जबरदस्त क्रेज है, लेकिन यातायात नियमों के पालन के प्रति वह जरा भी सजग नहीं हैं। शहर की हर सड़क और चौराहों पर दोपहिया वाहनों से फर्राटा भरते हुए विद्यार्थी देखे जा सकते हैं। इन नाबालिगों के पास हेलमेट भी नहीं होता। ये ट्रिपल राइडिंग से भी परहेज नहीं करते हैं। प्रशासन कई बार स्कूलों को आगाह कर चुका है कि वे नाबालिग छात्रों को वाहन चलाने पर प्रतिबंध लगाए, इसके बाद भी पुलिस, एआरटीओ को तो छोड़ दीजिए अभिभावक भी बच्चों को लेकर गंभीर नहीं हैं।
0000000000
अधिकांश हादसों में हेड इंजरी होती है मौत की वजह
लखीमपुर खीरी। सड़क हादसों में ज्यादातर लोगों की मौत हेडइंजरी यानी सिर पर चोट लगने से होती है। हाथ-पैरों में गंभीर चोट को डॉक्टर आसानी से उपचारित कर लेते हैं, लेकिन शरीर में सिर सबसे संवेदनशील है। बाइक सवार हादसे में सिर के बल गिरते हैं। हेलमेट न होने के कारण सिर का बचाव नहीं हो पाता है और चोट लगने से व्यक्ति की मौत हो जाती है। दो दिन पहले गोला रोड पर इंटर के छात्र सचिन वर्मा की सिर में गंभीर चोट से मौत हुई। यदि वह हेलमेट पहने होता तो उसकी जान बच सकती थी। ऐसी जाने कितनी दुर्घटनाएं हो रही हैं।
विज्ञापन
चर्चा तक सीमित रह जाती है अभिभावक मीटिंग
स्कूल और कॉलेज में होने वाली अभिभावकों की बैठक सिर्फ चर्चा तक सीमित रह जाती है। बैठक में कम उम्र के बच्चों के बाइक चलाने, हेलमेट न पहने और स्टंट आदि पर चर्चा तो होती है, लेकिन मीटिंग समाप्त होने के बाद अभिभावक उसे भूल जाते हैं। यही वजह है कि नाबालिगों के बाइक चलाने पर रोक नहीं लग पा रही है।
-----------
नाबालिग विद्यार्थियों के वाहन चलाने को लेकर कई बार स्कूलों में बैठकें की गईं। अभिभावकों से भी अनुरोध किया गया कि वह अपने बच्चों के हाथ में वाहन की चाबी न दें, लेकिन अभिभावक है जो मानने को तैयार ही नहीं है। शीघ्र ही अभियान चलाकर चेकिंग कराई जाएगी। स्कूलों को भी रोक लगाने के लिए नोटिस दी जाएगी।
- आरके वर्मा, सीओ सिटी
विज्ञापन
यदि अभिभावक सजग हो जाएं तो बच जाए लाडलों की जान
स्कूली छात्र धड़ल्ले से बिना हेलमेट कर रहे ट्रिपल राइडिंग
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। तेज रफ्तार और ट्रिपल राइडिंग से पिछले दिनों हुई छात्र की मौत के बाद भी न तो छात्र सुधरने का नाम ले रहे हैं, न स्कूल प्रशासन। अभिभावक भी अपने बच्चों की जान को लेकर गंभीर नहीं हैं। नतीजतन नाबालिग छात्र स्कूटी और बाइकों पर तीन-चार साथियों को बैठाकर फर्राटा भर रहे हैं। यह प्रवृत्ति सबसे ज्यादा हाईस्कूल और इंटर के विद्यार्थियों में है। इनके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं होता।
विद्यार्थियों में दो पहिया वाहनों का जबरदस्त क्रेज है, लेकिन यातायात नियमों के पालन के प्रति वह जरा भी सजग नहीं हैं। शहर की हर सड़क और चौराहों पर दोपहिया वाहनों से फर्राटा भरते हुए विद्यार्थी देखे जा सकते हैं। इन नाबालिगों के पास हेलमेट भी नहीं होता। ये ट्रिपल राइडिंग से भी परहेज नहीं करते हैं। प्रशासन कई बार स्कूलों को आगाह कर चुका है कि वे नाबालिग छात्रों को वाहन चलाने पर प्रतिबंध लगाए, इसके बाद भी पुलिस, एआरटीओ को तो छोड़ दीजिए अभिभावक भी बच्चों को लेकर गंभीर नहीं हैं।
विज्ञापन
0000000000
अधिकांश हादसों में हेड इंजरी होती है मौत की वजह
लखीमपुर खीरी। सड़क हादसों में ज्यादातर लोगों की मौत हेडइंजरी यानी सिर पर चोट लगने से होती है। हाथ-पैरों में गंभीर चोट को डॉक्टर आसानी से उपचारित कर लेते हैं, लेकिन शरीर में सिर सबसे संवेदनशील है। बाइक सवार हादसे में सिर के बल गिरते हैं। हेलमेट न होने के कारण सिर का बचाव नहीं हो पाता है और चोट लगने से व्यक्ति की मौत हो जाती है। दो दिन पहले गोला रोड पर इंटर के छात्र सचिन वर्मा की सिर में गंभीर चोट से मौत हुई। यदि वह हेलमेट पहने होता तो उसकी जान बच सकती थी। ऐसी जाने कितनी दुर्घटनाएं हो रही हैं।
विज्ञापन
चर्चा तक सीमित रह जाती है अभिभावक मीटिंग
स्कूल और कॉलेज में होने वाली अभिभावकों की बैठक सिर्फ चर्चा तक सीमित रह जाती है। बैठक में कम उम्र के बच्चों के बाइक चलाने, हेलमेट न पहने और स्टंट आदि पर चर्चा तो होती है, लेकिन मीटिंग समाप्त होने के बाद अभिभावक उसे भूल जाते हैं। यही वजह है कि नाबालिगों के बाइक चलाने पर रोक नहीं लग पा रही है।
-----------
नाबालिग विद्यार्थियों के वाहन चलाने को लेकर कई बार स्कूलों में बैठकें की गईं। अभिभावकों से भी अनुरोध किया गया कि वह अपने बच्चों के हाथ में वाहन की चाबी न दें, लेकिन अभिभावक है जो मानने को तैयार ही नहीं है। शीघ्र ही अभियान चलाकर चेकिंग कराई जाएगी। स्कूलों को भी रोक लगाने के लिए नोटिस दी जाएगी।
- आरके वर्मा, सीओ सिटी