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वन विभाग को छका रहा चलतुआ का बाघ
Updated Fri, 02 Nov 2018 07:04 PM IST
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व किशनपुर सेंक्चुरी से सटे चलतुआ गांव में एक सप्ताह से सक्रिय बाघ की शुक्रवार को कहीं लोकेशन नहीं मिली है। हालांकि ड्रोन कैमरों और हाथियों के जरिए उसकी लोकेशन ट्रेस करने के प्रयास लगातार जारी हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक 16 अक्तूबर को जब यह यह बाघ चलतुआ गांव के निकट बाबा फार्म पर देखा गया उस समय यह बाघ लंगड़ा कर चल रहा था। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि या तो यह बाघ बूढ़ा है और उसके पैर में कोई तकलीफ है। जिससे वह भागकर शिकार करने में अक्षम है। आसान शिकार की तलाश में यह बाघ गांव के निकट आया है। इसके बाद दो-तीन दिन उसकी लोकेशन गन्ने के खेत में मिली, लेकिन उसके बाद यह बाघ गायब हो गया। पिछले शुक्रवार 26 अक्तूबर को यह बाघ फिर चलतुआ गांव की ओर लौटा। इस बार इसने आबादी के बिल्कुल पास से एक कुत्ते का शिकार किया, गांव वालों ने बाघ का पीछा किया। इसी दौरान चलतुआ गांव निवासी 22 वर्षीय राजमन बाघ के निकट पहुंच गया तो बाघ ने उसे हमला कर घायल कर दिया। अगले दिन मादा हाथी डायना और टेरेसा से कांबिग कराई गई। बाघ के गुर्राने पर टेरेसा ने उसे अपनी सूंड़ में लपेटकर जोरदार पटकनी भी दी। इससे गुस्साए बाघ ने टेरेसा पर हमला कर उसे घायल कर दिया। 31 अक्तूबर को पार्क प्रशासन ने दावा किया कि बाघ को खदेड़ कर जंगल के अंदर भेज दिया गया है। इसके बावजूद एक नवंबर की सुबह यह बाघ गांव से 500 मीटर दूरी पर उल्ल नदी के किनारे बैठा देखा गया।
दुधवा पार्क वन्यजीव प्रतिपालक एसके अमरेश के नेतृत्व में लगातार बाघ की निगरानी कराई जा रही है, लेकिन बृहस्पतिवार की शाम को चकमा देकर आंखों से ओझल हुआ बाघ अब तक नजर नहीं आया है। इससे पहले भी यह बाघ लगातार वन विभाग को चकमा देता रहा है। बाघ आबादी की ओर न बढ़ पाए इसके लिए वन विभाग ने पिंजरे और खाबड़ लगाए थे, लेकिन उधर फटका तक नहीं।
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शिकारियों की नजर से बचाना भी है बड़ी चुनौती
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि बाघ आमतौर से शर्मीला जानवर होता है। आबादी से दूर एकांत में रहना पसंद करता है। इस बाघ की असामान्य गतिविधियों को देखते हुए ऐसा लगता है कि यह बाघ बूढ़ा और अशक्त है या इसके पैर में कोई गंभीर चोट है। जिससे यह दौड़कर, छलांग लगाकर शिकार नहीं कर पा रहा है। आसान शिकार की तलाश में यह गांव के आसपास भटक रहा है। पिछले कई दिनों से इसके शिकार न किए जाने से यह भूखा भी हो सकता है। ऐसी दशा में यह इंसानों और और पालतू जानवरों के लिए खतरनाक साबित होगा। कहा कि यही नहीं यह बाघ खुद भी खतरे में है। ऐसे बाघों पर अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों की पैनी नजर रहती है। ऐसी प्रकृति वाले जानवरों का शिकारी घात लगाकर आसानी से शिकार कर लेते हैं। ऐसे में शिकारियों की नजर से बाघ को बचाना वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती है।
बृहस्पतिवार दोपहर के बाद से बाघ की लोकेशन नहीं मिली। वनकर्मियों की टीम लगातार बाघ की निगरानी में लगी हुई है। बाघ आबादी की ओर न आने पाए इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
- महावीर कौजलगि, उप-निदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक 16 अक्तूबर को जब यह यह बाघ चलतुआ गांव के निकट बाबा फार्म पर देखा गया उस समय यह बाघ लंगड़ा कर चल रहा था। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि या तो यह बाघ बूढ़ा है और उसके पैर में कोई तकलीफ है। जिससे वह भागकर शिकार करने में अक्षम है। आसान शिकार की तलाश में यह बाघ गांव के निकट आया है। इसके बाद दो-तीन दिन उसकी लोकेशन गन्ने के खेत में मिली, लेकिन उसके बाद यह बाघ गायब हो गया। पिछले शुक्रवार 26 अक्तूबर को यह बाघ फिर चलतुआ गांव की ओर लौटा। इस बार इसने आबादी के बिल्कुल पास से एक कुत्ते का शिकार किया, गांव वालों ने बाघ का पीछा किया। इसी दौरान चलतुआ गांव निवासी 22 वर्षीय राजमन बाघ के निकट पहुंच गया तो बाघ ने उसे हमला कर घायल कर दिया। अगले दिन मादा हाथी डायना और टेरेसा से कांबिग कराई गई। बाघ के गुर्राने पर टेरेसा ने उसे अपनी सूंड़ में लपेटकर जोरदार पटकनी भी दी। इससे गुस्साए बाघ ने टेरेसा पर हमला कर उसे घायल कर दिया। 31 अक्तूबर को पार्क प्रशासन ने दावा किया कि बाघ को खदेड़ कर जंगल के अंदर भेज दिया गया है। इसके बावजूद एक नवंबर की सुबह यह बाघ गांव से 500 मीटर दूरी पर उल्ल नदी के किनारे बैठा देखा गया।
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दुधवा पार्क वन्यजीव प्रतिपालक एसके अमरेश के नेतृत्व में लगातार बाघ की निगरानी कराई जा रही है, लेकिन बृहस्पतिवार की शाम को चकमा देकर आंखों से ओझल हुआ बाघ अब तक नजर नहीं आया है। इससे पहले भी यह बाघ लगातार वन विभाग को चकमा देता रहा है। बाघ आबादी की ओर न बढ़ पाए इसके लिए वन विभाग ने पिंजरे और खाबड़ लगाए थे, लेकिन उधर फटका तक नहीं।
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शिकारियों की नजर से बचाना भी है बड़ी चुनौती
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि बाघ आमतौर से शर्मीला जानवर होता है। आबादी से दूर एकांत में रहना पसंद करता है। इस बाघ की असामान्य गतिविधियों को देखते हुए ऐसा लगता है कि यह बाघ बूढ़ा और अशक्त है या इसके पैर में कोई गंभीर चोट है। जिससे यह दौड़कर, छलांग लगाकर शिकार नहीं कर पा रहा है। आसान शिकार की तलाश में यह गांव के आसपास भटक रहा है। पिछले कई दिनों से इसके शिकार न किए जाने से यह भूखा भी हो सकता है। ऐसी दशा में यह इंसानों और और पालतू जानवरों के लिए खतरनाक साबित होगा। कहा कि यही नहीं यह बाघ खुद भी खतरे में है। ऐसे बाघों पर अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों की पैनी नजर रहती है। ऐसी प्रकृति वाले जानवरों का शिकारी घात लगाकर आसानी से शिकार कर लेते हैं। ऐसे में शिकारियों की नजर से बाघ को बचाना वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती है।
बृहस्पतिवार दोपहर के बाद से बाघ की लोकेशन नहीं मिली। वनकर्मियों की टीम लगातार बाघ की निगरानी में लगी हुई है। बाघ आबादी की ओर न आने पाए इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
- महावीर कौजलगि, उप-निदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व