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बाघ बचाने की मुहिम से जुड़े पर्वतारोही
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लखीमपुर खीरी। बाघ संरक्षण की मुहिम में पैदल यात्रा करने में वर्ल्ड रिकार्ड बनाने वाले चार पर्वतारोही जुड़ गए हैं। उत्तराखंड के चार पर्वतारोही मझगईं रेंज अंतर्गत लोहरा ग्राम पंचायत के बेलापुरवा गांव पहुंचे और बाघों की सुरक्षा के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया।
माउंट एवरेस्ट, कैलाश मानसरोवर, की यात्रा पूरी करने वाले खतरनाक एडवेंचर और सर्वाधिक लंबी पैदल यात्रा में गिनीज बुक, लिम्का बुक और यूपी वल्ड रिकार्ड, इंडिया स्टार बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाने वाले उत्तराखंड के चार पर्वतारोही जिले में पहुंचे। इन पर्वतारोहियों में अवध विहारी लाल, जितेंद्र प्रताप, महेंद्र प्रताप और गोविंदानंद शामिल हैं। इन चारों लोगों ने गांव वालों को बताया कि बाघों को बचाना क्यों जरूरी है। बाघ पर्यावरण में कितना सहायक हैं। बाघों की सुरक्षा के साथ ही वन, जल और वायु समेत पूरे पर्यावरण की रक्षा होती है। कहा बाघ सृष्टि की अनमोल धरोहर हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि उत्तर प्रदेश में बड़े क्षेत्र में जंगल हैं और उनमें बाघ हैं। बाघों को बचाकर अपनी अनमोल विरासत को बचाएं। उन्होंने मानव-बाघ संघर्ष रोकने के तरीके भी बताए।
इस मौके पर एसडीएओ डीबी सिंह, रेंजर, वनकर्मी, कई गांवों के प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।
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माउंट एवरेस्ट, कैलाश मानसरोवर, की यात्रा पूरी करने वाले खतरनाक एडवेंचर और सर्वाधिक लंबी पैदल यात्रा में गिनीज बुक, लिम्का बुक और यूपी वल्ड रिकार्ड, इंडिया स्टार बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाने वाले उत्तराखंड के चार पर्वतारोही जिले में पहुंचे। इन पर्वतारोहियों में अवध विहारी लाल, जितेंद्र प्रताप, महेंद्र प्रताप और गोविंदानंद शामिल हैं। इन चारों लोगों ने गांव वालों को बताया कि बाघों को बचाना क्यों जरूरी है। बाघ पर्यावरण में कितना सहायक हैं। बाघों की सुरक्षा के साथ ही वन, जल और वायु समेत पूरे पर्यावरण की रक्षा होती है। कहा बाघ सृष्टि की अनमोल धरोहर हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि उत्तर प्रदेश में बड़े क्षेत्र में जंगल हैं और उनमें बाघ हैं। बाघों को बचाकर अपनी अनमोल विरासत को बचाएं। उन्होंने मानव-बाघ संघर्ष रोकने के तरीके भी बताए।
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इस मौके पर एसडीएओ डीबी सिंह, रेंजर, वनकर्मी, कई गांवों के प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।