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काशीपुर में घुस आया बाघ, ग्रामीणों में फैली दहशत
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ममरी। बुधवार रात वनरेंज मोहम्मदी-महेशपुर क्षेत्र के गांव काशीपुर की आबादी में घुसे बाघ ने पशुशाला में बंधे पशुओं पर हमला करने का प्रयास किया। आग जलाने, शोर मचाने पर बाघ घमहाघाट की ओर चला गया। इसकी पुष्टि वन कर्मियों ने की है।
घमहाघाट निवासी लालसिंह, मक्खन सिंह के झाले पर करीब 15 दिन पहले एक साथ दो बाघ शिकार करने के इरादे से घुस आए थे। उसके बाद बाघ की कोई सूचना नहीं मिली। बुधवार रात एक बाघ देवीपुर बीट के जंगल से निकलकर दो किलोमीटर दूर काशीपुर गांव में जा पहुंचा। गांव वालों के अनुसार बाघ ने टीकाराम, राजेंद्र प्रसाद की पशुशाला में बंधे पशुओं पर हमला करने का प्रयास किया। पशुओं के रंभाने, कुत्तों के भौंकने पर लोगों ने टार्च की रोशनी में बाघ खड़ा देखा, जिससे उनके होश उड़ गए। शोर मचाने, आग जाने पर बाघ वहां से दहाड़ता हुआ कठिना नदी की तरफ चला गया। डेढ़ महीने पूर्व बाघ गांव के करीब से निकल गया था लेकिन इस बार आबादी में घुस आया है।
सूचना पर पहुंचे फारेस्टर रामप्रसाद, वनरक्षक विनीत सिंह, बेचेलाल ने बाघ के गांव में घुसने, पगचिह्न मिलने की पुष्टि कर बताया कि 15 दिनों से बाघ, तेंदुओं की लोकेशन जंगल में मिल रही थी। शिकार की तलाश में बाघ गांव के भी जा पहुंचा होगा।
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रेंजर मोहममद आरिफ ने बताया कि बाघ नीलगाय का पीछा करते हुए वहां जा पहुंचा था। नीलगाय के गन्ने में छिपने से बाघ गांव की तरफ मुड़ गया, जिसकी निगरानी में वन कर्मियों की टीम लगा दी गई है। उन्होंने गांववालों को सतर्कता बनाए रखने की सलाह दी है।
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घमहाघाट निवासी लालसिंह, मक्खन सिंह के झाले पर करीब 15 दिन पहले एक साथ दो बाघ शिकार करने के इरादे से घुस आए थे। उसके बाद बाघ की कोई सूचना नहीं मिली। बुधवार रात एक बाघ देवीपुर बीट के जंगल से निकलकर दो किलोमीटर दूर काशीपुर गांव में जा पहुंचा। गांव वालों के अनुसार बाघ ने टीकाराम, राजेंद्र प्रसाद की पशुशाला में बंधे पशुओं पर हमला करने का प्रयास किया। पशुओं के रंभाने, कुत्तों के भौंकने पर लोगों ने टार्च की रोशनी में बाघ खड़ा देखा, जिससे उनके होश उड़ गए। शोर मचाने, आग जाने पर बाघ वहां से दहाड़ता हुआ कठिना नदी की तरफ चला गया। डेढ़ महीने पूर्व बाघ गांव के करीब से निकल गया था लेकिन इस बार आबादी में घुस आया है।
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सूचना पर पहुंचे फारेस्टर रामप्रसाद, वनरक्षक विनीत सिंह, बेचेलाल ने बाघ के गांव में घुसने, पगचिह्न मिलने की पुष्टि कर बताया कि 15 दिनों से बाघ, तेंदुओं की लोकेशन जंगल में मिल रही थी। शिकार की तलाश में बाघ गांव के भी जा पहुंचा होगा।
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रेंजर मोहममद आरिफ ने बताया कि बाघ नीलगाय का पीछा करते हुए वहां जा पहुंचा था। नीलगाय के गन्ने में छिपने से बाघ गांव की तरफ मुड़ गया, जिसकी निगरानी में वन कर्मियों की टीम लगा दी गई है। उन्होंने गांववालों को सतर्कता बनाए रखने की सलाह दी है।