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श्रीराम लीला मेले के सांस्कृतिक मंच पर माइक और लाइटें तोड़ी
Updated Thu, 12 Oct 2017 07:47 PM IST
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लखीमपुर खीरी/मोहम्मदी। कस्बे के ऐतिहासिक श्रीराम लीला मेले के सांस्कृतिक मंच पर बुधवार की रात भोजपुरी लोकगीत एवं लोकनृत्य के आयोजन में कस्बे के कुछ जिम्मेदार लोगों ने जमकर हंगामा काटा। मंच पर रखे माइक और लाइट तोड़ दीं। मेला आयोजक ईओ नपाप मोहम्मदी और उनके कर्मचारी असहाय स्थिति में दिखे। पुलिस का असहयोग और अधिकारियों की उदासीनता मेले में पहली बार दिखाई दी, जिससे मेला आयोजकों के हौसले पस्त हो गए, हारकर उन्होंने गुरुवार 12 अक्तूबर को होने वाला लॉफ्टर शो आर्केस्ट्रा एवं रंगारंग कार्यक्रम भी निरस्त कर दिए।
मालूम हो कि विगत 20 वर्षों से कोर्ट के आदेश पर नगरपालिका परिषद को मोहम्मदी की श्रीराम लीला कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। तत्कालीन निर्वाचित पालिका बोर्ड ने रामलीला मेले के लिए अच्छा खासा बजट भी पास किया था। इस बार पालिकाध्यक्ष का कार्यकाल 11 अगस्त को समाप्त हो गया, सो रामलीला का दारोमदार ईओ और उनके कर्मचारियों पर ही था। मेले में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का वांछित सहयोग न मिलने से मेले में अव्यवस्थाएं हावी रहीं।
आठ अक्तूबर का मुशायरा जैसे-तैसे हुआ, लेकिन 10 अक्तूबर को कवि सम्मेलन में खासी मारामारी रही जो 11 अक्तूबर को भोजपुरी लोकगीत के समय चरम पर पहुंच गई। बताया गया कि जैसे ही भोजपुरी लोक नृत्य के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति देनी चाही उसी समय कुछ पूर्व सभासद मंच पर चढ़ने लगे, लेकिन मंच के सुरक्षा गार्ड (बाउंसर) ने उन्हें रोक दिया। फिर क्या था उनका पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। पूर्व सभासद ने वहां रखीं लाइट और माइक तोड़ डाले और गाली गलौज शुरू हो गई।
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ईओ रविशंकर शुक्ल ने फोर्स मंगाई। जैसे-तैसे कार्यक्रम एक बार फिर शुरू हुआ, लेकिन उसे दो बजे रात बंद कर देना पड़ा। यह भी बताया गया कि कुछ अराजक तत्वों ने कलाकारों के वाहनों पर भी ईंट पत्थर चलाए और पुलिस मूक दर्शक बनी रही।
ईओ रविशंकर शुक्ला का कहना है कि उन्होंने पुलिस और पीएसी की मांग की थी, लेकिन सुरक्षा के प्रबंध न हो सकने के कारण गुरुवार को होने वाला लॉफ्टर शो और आर्केस्ट्रा का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। उनका यह भी कहना है कि जिम्मेदार लोगों की यही स्थिति रही तो ऐसे सभी कार्यक्रम स्थगित करने पड़ेंगे।
उधर, मेला स्थगित होने की सूचना पर कुछ दुकानदारों ने नगर पालिका परिषद कार्यालय जाकर विरोध जताते हुए ईओ के खिलाफ नारेबाजी की। दुकानदारों का यह कहना था कि आज मेले में हजारों की भीड़ मौजूद है, मेला स्थगित होने से उनकी बिक्री पर खासा प्रभाव पड़ा है।
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मालूम हो कि विगत 20 वर्षों से कोर्ट के आदेश पर नगरपालिका परिषद को मोहम्मदी की श्रीराम लीला कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। तत्कालीन निर्वाचित पालिका बोर्ड ने रामलीला मेले के लिए अच्छा खासा बजट भी पास किया था। इस बार पालिकाध्यक्ष का कार्यकाल 11 अगस्त को समाप्त हो गया, सो रामलीला का दारोमदार ईओ और उनके कर्मचारियों पर ही था। मेले में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का वांछित सहयोग न मिलने से मेले में अव्यवस्थाएं हावी रहीं।
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आठ अक्तूबर का मुशायरा जैसे-तैसे हुआ, लेकिन 10 अक्तूबर को कवि सम्मेलन में खासी मारामारी रही जो 11 अक्तूबर को भोजपुरी लोकगीत के समय चरम पर पहुंच गई। बताया गया कि जैसे ही भोजपुरी लोक नृत्य के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति देनी चाही उसी समय कुछ पूर्व सभासद मंच पर चढ़ने लगे, लेकिन मंच के सुरक्षा गार्ड (बाउंसर) ने उन्हें रोक दिया। फिर क्या था उनका पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। पूर्व सभासद ने वहां रखीं लाइट और माइक तोड़ डाले और गाली गलौज शुरू हो गई।
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ईओ रविशंकर शुक्ल ने फोर्स मंगाई। जैसे-तैसे कार्यक्रम एक बार फिर शुरू हुआ, लेकिन उसे दो बजे रात बंद कर देना पड़ा। यह भी बताया गया कि कुछ अराजक तत्वों ने कलाकारों के वाहनों पर भी ईंट पत्थर चलाए और पुलिस मूक दर्शक बनी रही।
ईओ रविशंकर शुक्ला का कहना है कि उन्होंने पुलिस और पीएसी की मांग की थी, लेकिन सुरक्षा के प्रबंध न हो सकने के कारण गुरुवार को होने वाला लॉफ्टर शो और आर्केस्ट्रा का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। उनका यह भी कहना है कि जिम्मेदार लोगों की यही स्थिति रही तो ऐसे सभी कार्यक्रम स्थगित करने पड़ेंगे।
उधर, मेला स्थगित होने की सूचना पर कुछ दुकानदारों ने नगर पालिका परिषद कार्यालय जाकर विरोध जताते हुए ईओ के खिलाफ नारेबाजी की। दुकानदारों का यह कहना था कि आज मेले में हजारों की भीड़ मौजूद है, मेला स्थगित होने से उनकी बिक्री पर खासा प्रभाव पड़ा है।