{"_id":"5b5b6c164f1c1b47748b732e","slug":"201532718102-lakhimpur-kheri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सावन मेला कल से, छोटी काशी में उमड़ेगा आस्था का सैलाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सावन मेला कल से, छोटी काशी में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
Updated Sat, 28 Jul 2018 12:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
छोटी काशी में आज से लगेगा आस्था का मेला
प्रत्येक सावन के सोमवार को गोला में स्कूल-कॉलेजों में होगी छुट्टी
लखीमपुर खीरी। सावन मेला शनिवार से शुरू हो रहा है। जिले भर के शिव मंदिरों में श्रद्धालु पूजन करेंगे लेकिन छोटी काशी के नाम से विख्यात जिले के उपनगर गोला गोकर्णनाथ में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए खास तौर पर श्रद्धालु आएंगे। कांवड़ियों का रेला सुबह से ही शुरू हो जाएगा। प्रशासन, पुलिस और नगर पालिका परिषद गोला ने खास इंतजाम किए हैं। एसडीएम अखिलेश यादव ने बताया कि सावन के प्रत्येक सोमवार को पूजन का विशेष महत्व होने के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ अन्य दिनों की अपेक्षा काफी ज्यादा होती है। सुरक्षा के मद्देनजर पूर्व की भांति प्रत्येक सोमवार को स्थानीय कक्षा एक से 12 तक के स्कूल, कालेज बंद रहेंगे। सावन मेले की तैयारियों को लेकर प्रस्तुत है रिपोर्ट।
शिव मंदिर के समीप सजी फूल की दुकानें
फोटो-27एलकेएच202 और 203 फोटो-27एलकेएच205 फोटो-27एलकेएच 209
गोला गोकर्णनाथ। शिव मंदिर के समीप व्यापारियों ने दुकानें सजा ली हैं। यहां फूल, बेलपत्र, भांग, धतूरा बेचने वाले प्रमोद सैनी, सुभाष गिरि, सुनील, राजकुमार, आकाश सैनी, रमेश सैनी, सूरज, रामगोपाल, महेश, गुड्डू गिरि सहित करीब 22 लोगों की दुकानें हैं। बताया जा रहा है कि सभी फूल सेमरई ताल, बेलपत्र जंगल से और कुछ फूल लखनऊ से मंगाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में प्रसाद आदि की भी दुकानें लग गई हैं। यानी लाई, चूड़ा, गट्टा, मिश्री और चीनी के बने दाने की दुकानें भी लोगों को मिलेंगी। शिव मंदिर के मुख्य मार्ग में प्रसाद के दुकानदार रामऔतार शाह, सूरज शाह, राधे शाह, राजाराम, बांकेलाल आदि ने बताया कि इस समय लाई और चूड़ा 40 रुपया किग्रा, गट्टा, दाना, मिश्री, बतासा 60 रुपया किग्रा, रेवड़ी 80 रुपया प्रति किग्रा के भाव से बिक रही है। इसी तरहं मंदिर परिसर में पूजन सामग्री की कई दुकानें सजी हैं। दुकानदार संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि सावन में अन्य दिन की अपेक्षा पूजन सामग्री की मांग बढ़ जाती है, जिसमें धूप की लकड़ी 100 रुपये किलोग्राम, धूप खांदा 80 रुपये किग्रा, हवन सामग्री 80 रुपया किग्रा बिक रहा है।
सजने लगे झूले
फोटो-27एलकेएच204
सावन में झूला झूलने का प्रचलन काफी प्राचीन है, समय के साथ साथ झूलों का स्वरूप भी बदलता चला गया। इस वर्ष बाबा भूतनाथ मंदिर के पास ब्रेक डांस, बिजली झूला, ड्रैगेन ट्रेन, मिक्की माउस वाले झूले लगाए जा रहे हैं। जहां युवक, युवतियां, बच्चे पेड़ की डाल पर रस्सी की बजाए आधुनिक झूलों का आनंद लेंगे।
विज्ञापन
झोला पर भोला की छवि
फोटो-27एलकेएच206
छोटी काशी इस समय सावन माह में भोले के रंग में रंग जाती है। कांवड़िए भगवान भोलेनाथ की छाप वाली टीशर्ट और भगवा रंग की हाफ पैंट पहनकर निकलते हैं, वहीं इस समय नगर की तीर्थ बाजार में भोला की छाप वाले झोले भी आ गए हैं।
शंख, घंटा और माला की भी दुकानें सजीं
फोटो-27एलकेएच207
सावन में छोटी काशी आने वाले श्रद्धालु यहां से शंख, घंटा और माला ले जाना नहीं भूलते। तीर्थ परिसर में दुकानदार पिंकू गिरि और दिवाकर गिरि ने बताया कि देवी देवताओं की पीतल, तांबा धातु निर्मित मूर्तियां एक हजार रुपया किग्रा, उनके पास कई प्रकार के शंख हैं, जिनकी कीमत 200 से 1000 रुपये तक है। साथ ही वह स्थापना के लिए मूर्तियां भी रखते हैं, जिनकी कीमत दो हजार से 18 हजार रुपये तक है। सावन में मूर्तियों और पात्रों की मांग बढ़ जाती है
खड़ाऊ की भी बढ़ जाती है मांग
फोटो-27एलकेएच208
भोले के दर्शन के लिए आने वाले मेलार्थी यहां से लकड़ी के खड़ाऊं, धार्मिक पुस्तक पढ़ने के लिए लकड़ी का स्टैंड, बेलन, पाटा, चौकी ले जाना नहीं भूलते। तीर्थ के निकट दुकानों पर कई प्रकार के लकड़ी के खड़ाऊं सजाकर रखे गए हैं, जिनकी नक्खासी देखते ही बनती हैं जो लोगों को लुभा रही है। दुकानदार संदीप गुप्ता ने बताया कि साधू, महात्मा छोटी काशी से खड़ाऊं खरीदकर ले जाते हैं, जिनकी कीमत 80 रुपया से लेकर 250 रुपया प्रति जोड़ी है।
सिंदूर, मेंहदी, चूड़ियों की भी होती है खासी बिक्री
छोटी काशी के मेले में सुहागिन महिलाएं सिंदूर, मेंहदी और चूड़ियों की खूब खरीदारी करती हैं। मंदिर के पास श्रृंगार गली में सिंदूर, मेंहदी और चूड़ियों की काफी दुकानें लगी हुई हैं। दुकानदार बताते हैं कि चूड़ियां फिरोजाबाद से मंगाते हैं। जबकि लाल सिंदूर पहले तो गोला में ही बनता था और यहां से धार्मिक स्थलों को भेजा जाता है। जिससे छोटी काशी की दूर दूर तक ख्याति है। मेंहदी विक्रेता रामशंकर गुप्ता ने बताया कि उनका मेंहदी का कारोबार काफी पुराना है। वह राजस्थान से थोक में मेंहदी मंगाकर यहीं उसकी पैकिंग भी करते हैं। मेंहदी कारोबार के कारण उनका नाम रामशंकर मेंहदी वाले कहा जाने लगा।
मंदिर परिसर के पास बना मेला कार्यालय
फोटो-27एलकेएच210
नगर पालिका परिषद ने मेलार्थियों की सुविधा के लिए मंदिर के पास मेला का कैंप कार्यालय बनवाया है, जहां अधिकारी मौजूद रहकर मेला की व्यवस्था परखेंगे। वहीं अलीगंज रोड पर डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क के पास नि:शुल्क गंगाजल, जूता चप्पल घर, खोया पाया सहित कई काउंटर बनाए जा रहे हैं, जहां पालिकाकर्मी मुस्तैद रहेंगे।
दु:ख हरने के कारण अहमदनगर के शिव का नाम है क्लेशहरण
फोटो-27एलकेएच211
ममरी। मान्यता है कि अहमदनगर स्थित प्राचीन क्लेशहरण शिव के दर्शन पूजन करने से भक्तों के सारे क्लेश, दुखदर्द दूर होकर मनोकामना पूर्ण होती है। इस कारण सावन माह में सोमवार और शुक्रवार को यहां मेला लगता है, जहां मेलार्थियों की विशेष भीड़ रहती है।
नगर में प्रवेश नहीं करेंगे भारी वाहन
कोतवाल प्रमोद कुमार मिश्र ने बताया कि लखीमपुर रोड पर पशु बाजार, अलीगंज रोड पर मंडी समिति और मिल यार्ड में पार्किंग बनाई गई है। सावन मेले में भारी वाहन शहर के अंदर प्रवेश नहीं करेंगे, जिसके लिए बैरियर लगाकर रूट डायवर्ट की व्यवस्था की गई है। रोडवेज बसों का वनवे संचालन रहेगा। सोमवार को छोड़कर शेष दिनों में बसें बसअड्डे से मरघट रोड, विकास चौराहा होते हुए खुटार रोड होते हुए दतेली के पास से बाईपास मार्ग होते हुए जाएंगी। सोमवार को रोडवेज बसों को बस अड्डे जाने की बजाए विकास चौराहे पर रोकने की व्यवस्था की गई है, जिसके लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।
कांवड़ियों के वेश में तैनात रहेंगे पुलिसकर्मी
गोला गोकर्णनाथ। सीओ अभिषेक प्रताप ने बताया कि मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए पांच इंस्पेकटर, पांच दरोगा, पांच महिला दरोगा, 200 सिपाही, 50 महिला सिपाही, 100 होमगार्ड, एक प्लाटून पीएसी, एक फायर टेंडर, दो सशस्त्र पुलिस गारद, चार ट्रैफिक सिपाही तैनात किए गए हैं, इसके अतिरिक्त तीर्थ, मंदिर परिसर, सार्वजनिक स्थलों पर कांवड़ियों के वेश में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मंदिर के गर्भ गृह सहित मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर 12 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
प्रत्येक सावन के सोमवार को गोला में स्कूल-कॉलेजों में होगी छुट्टी
लखीमपुर खीरी। सावन मेला शनिवार से शुरू हो रहा है। जिले भर के शिव मंदिरों में श्रद्धालु पूजन करेंगे लेकिन छोटी काशी के नाम से विख्यात जिले के उपनगर गोला गोकर्णनाथ में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए खास तौर पर श्रद्धालु आएंगे। कांवड़ियों का रेला सुबह से ही शुरू हो जाएगा। प्रशासन, पुलिस और नगर पालिका परिषद गोला ने खास इंतजाम किए हैं। एसडीएम अखिलेश यादव ने बताया कि सावन के प्रत्येक सोमवार को पूजन का विशेष महत्व होने के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ अन्य दिनों की अपेक्षा काफी ज्यादा होती है। सुरक्षा के मद्देनजर पूर्व की भांति प्रत्येक सोमवार को स्थानीय कक्षा एक से 12 तक के स्कूल, कालेज बंद रहेंगे। सावन मेले की तैयारियों को लेकर प्रस्तुत है रिपोर्ट।
शिव मंदिर के समीप सजी फूल की दुकानें
फोटो-27एलकेएच202 और 203 फोटो-27एलकेएच205 फोटो-27एलकेएच 209
गोला गोकर्णनाथ। शिव मंदिर के समीप व्यापारियों ने दुकानें सजा ली हैं। यहां फूल, बेलपत्र, भांग, धतूरा बेचने वाले प्रमोद सैनी, सुभाष गिरि, सुनील, राजकुमार, आकाश सैनी, रमेश सैनी, सूरज, रामगोपाल, महेश, गुड्डू गिरि सहित करीब 22 लोगों की दुकानें हैं। बताया जा रहा है कि सभी फूल सेमरई ताल, बेलपत्र जंगल से और कुछ फूल लखनऊ से मंगाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में प्रसाद आदि की भी दुकानें लग गई हैं। यानी लाई, चूड़ा, गट्टा, मिश्री और चीनी के बने दाने की दुकानें भी लोगों को मिलेंगी। शिव मंदिर के मुख्य मार्ग में प्रसाद के दुकानदार रामऔतार शाह, सूरज शाह, राधे शाह, राजाराम, बांकेलाल आदि ने बताया कि इस समय लाई और चूड़ा 40 रुपया किग्रा, गट्टा, दाना, मिश्री, बतासा 60 रुपया किग्रा, रेवड़ी 80 रुपया प्रति किग्रा के भाव से बिक रही है। इसी तरहं मंदिर परिसर में पूजन सामग्री की कई दुकानें सजी हैं। दुकानदार संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि सावन में अन्य दिन की अपेक्षा पूजन सामग्री की मांग बढ़ जाती है, जिसमें धूप की लकड़ी 100 रुपये किलोग्राम, धूप खांदा 80 रुपये किग्रा, हवन सामग्री 80 रुपया किग्रा बिक रहा है।
विज्ञापन
सजने लगे झूले
फोटो-27एलकेएच204
सावन में झूला झूलने का प्रचलन काफी प्राचीन है, समय के साथ साथ झूलों का स्वरूप भी बदलता चला गया। इस वर्ष बाबा भूतनाथ मंदिर के पास ब्रेक डांस, बिजली झूला, ड्रैगेन ट्रेन, मिक्की माउस वाले झूले लगाए जा रहे हैं। जहां युवक, युवतियां, बच्चे पेड़ की डाल पर रस्सी की बजाए आधुनिक झूलों का आनंद लेंगे।
विज्ञापन
झोला पर भोला की छवि
फोटो-27एलकेएच206
छोटी काशी इस समय सावन माह में भोले के रंग में रंग जाती है। कांवड़िए भगवान भोलेनाथ की छाप वाली टीशर्ट और भगवा रंग की हाफ पैंट पहनकर निकलते हैं, वहीं इस समय नगर की तीर्थ बाजार में भोला की छाप वाले झोले भी आ गए हैं।
शंख, घंटा और माला की भी दुकानें सजीं
फोटो-27एलकेएच207
सावन में छोटी काशी आने वाले श्रद्धालु यहां से शंख, घंटा और माला ले जाना नहीं भूलते। तीर्थ परिसर में दुकानदार पिंकू गिरि और दिवाकर गिरि ने बताया कि देवी देवताओं की पीतल, तांबा धातु निर्मित मूर्तियां एक हजार रुपया किग्रा, उनके पास कई प्रकार के शंख हैं, जिनकी कीमत 200 से 1000 रुपये तक है। साथ ही वह स्थापना के लिए मूर्तियां भी रखते हैं, जिनकी कीमत दो हजार से 18 हजार रुपये तक है। सावन में मूर्तियों और पात्रों की मांग बढ़ जाती है
खड़ाऊ की भी बढ़ जाती है मांग
फोटो-27एलकेएच208
भोले के दर्शन के लिए आने वाले मेलार्थी यहां से लकड़ी के खड़ाऊं, धार्मिक पुस्तक पढ़ने के लिए लकड़ी का स्टैंड, बेलन, पाटा, चौकी ले जाना नहीं भूलते। तीर्थ के निकट दुकानों पर कई प्रकार के लकड़ी के खड़ाऊं सजाकर रखे गए हैं, जिनकी नक्खासी देखते ही बनती हैं जो लोगों को लुभा रही है। दुकानदार संदीप गुप्ता ने बताया कि साधू, महात्मा छोटी काशी से खड़ाऊं खरीदकर ले जाते हैं, जिनकी कीमत 80 रुपया से लेकर 250 रुपया प्रति जोड़ी है।
सिंदूर, मेंहदी, चूड़ियों की भी होती है खासी बिक्री
छोटी काशी के मेले में सुहागिन महिलाएं सिंदूर, मेंहदी और चूड़ियों की खूब खरीदारी करती हैं। मंदिर के पास श्रृंगार गली में सिंदूर, मेंहदी और चूड़ियों की काफी दुकानें लगी हुई हैं। दुकानदार बताते हैं कि चूड़ियां फिरोजाबाद से मंगाते हैं। जबकि लाल सिंदूर पहले तो गोला में ही बनता था और यहां से धार्मिक स्थलों को भेजा जाता है। जिससे छोटी काशी की दूर दूर तक ख्याति है। मेंहदी विक्रेता रामशंकर गुप्ता ने बताया कि उनका मेंहदी का कारोबार काफी पुराना है। वह राजस्थान से थोक में मेंहदी मंगाकर यहीं उसकी पैकिंग भी करते हैं। मेंहदी कारोबार के कारण उनका नाम रामशंकर मेंहदी वाले कहा जाने लगा।
मंदिर परिसर के पास बना मेला कार्यालय
फोटो-27एलकेएच210
नगर पालिका परिषद ने मेलार्थियों की सुविधा के लिए मंदिर के पास मेला का कैंप कार्यालय बनवाया है, जहां अधिकारी मौजूद रहकर मेला की व्यवस्था परखेंगे। वहीं अलीगंज रोड पर डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क के पास नि:शुल्क गंगाजल, जूता चप्पल घर, खोया पाया सहित कई काउंटर बनाए जा रहे हैं, जहां पालिकाकर्मी मुस्तैद रहेंगे।
दु:ख हरने के कारण अहमदनगर के शिव का नाम है क्लेशहरण
फोटो-27एलकेएच211
ममरी। मान्यता है कि अहमदनगर स्थित प्राचीन क्लेशहरण शिव के दर्शन पूजन करने से भक्तों के सारे क्लेश, दुखदर्द दूर होकर मनोकामना पूर्ण होती है। इस कारण सावन माह में सोमवार और शुक्रवार को यहां मेला लगता है, जहां मेलार्थियों की विशेष भीड़ रहती है।
नगर में प्रवेश नहीं करेंगे भारी वाहन
कोतवाल प्रमोद कुमार मिश्र ने बताया कि लखीमपुर रोड पर पशु बाजार, अलीगंज रोड पर मंडी समिति और मिल यार्ड में पार्किंग बनाई गई है। सावन मेले में भारी वाहन शहर के अंदर प्रवेश नहीं करेंगे, जिसके लिए बैरियर लगाकर रूट डायवर्ट की व्यवस्था की गई है। रोडवेज बसों का वनवे संचालन रहेगा। सोमवार को छोड़कर शेष दिनों में बसें बसअड्डे से मरघट रोड, विकास चौराहा होते हुए खुटार रोड होते हुए दतेली के पास से बाईपास मार्ग होते हुए जाएंगी। सोमवार को रोडवेज बसों को बस अड्डे जाने की बजाए विकास चौराहे पर रोकने की व्यवस्था की गई है, जिसके लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।
कांवड़ियों के वेश में तैनात रहेंगे पुलिसकर्मी
गोला गोकर्णनाथ। सीओ अभिषेक प्रताप ने बताया कि मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए पांच इंस्पेकटर, पांच दरोगा, पांच महिला दरोगा, 200 सिपाही, 50 महिला सिपाही, 100 होमगार्ड, एक प्लाटून पीएसी, एक फायर टेंडर, दो सशस्त्र पुलिस गारद, चार ट्रैफिक सिपाही तैनात किए गए हैं, इसके अतिरिक्त तीर्थ, मंदिर परिसर, सार्वजनिक स्थलों पर कांवड़ियों के वेश में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मंदिर के गर्भ गृह सहित मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर 12 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।