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शिव बारात को लेकर आमने सामने आए शिवभक्त
Updated Sun, 21 Jan 2018 11:56 PM IST
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दोनों पक्ष
- फोटो : अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी। महाशिवरात्रि के मौके पर 14 फरवरी को निकलने वाली शिव बारात को लेकर शिवभक्तों में दो गुट हो गए हैं। दोनों गुट शिव बारात अपने अनुसार निकालने की जिद पर अड़े हैं। हालांकि रविवार को दोनों गुटों में रजामंदी को लेकर एसडीएम कार्यालय में करीब दो घंटे तक वार्ता चली, लेकिन वह बेनतीजा रही।
रविवार को एसडीएम कार्यालय में एसडीएम नागेंद्र सिंह, सीओ आरके वर्मा की मौजूदगी में गत वर्षों में शिव बारात के अगुवाकार रहने वाले मोहन बाजपेई और अमितेश चौरसिया में दो घंटे तक बारात निकालने को लेकर वार्ता चली। दोनों पक्ष अपने अनुसार शिव बारात निकालने पर अड़े रहे। कई मुद्दों को लेकर हुई वार्ता अंतत: होर्डिंग्स हटाने के मामले में विफल हो गई। इस एसडीएम और सीओ सिटी भी दोनों पक्षों में समझौता कराने में नाकाम रहे। मालूम हो कि 2015 और 2016 में मोहन बाजपेई और अमितेश चौरसिया गुड्डू के नेतृत्व में ही शहर की सजावट कराकर शिव बारात निकाली जाती थी, लेकिन 2017 में अमितेश चौरसिया ने अलग होकर शिवभक्त सोसाइटी पंजीकृत करा ली और इस साल अपनी सोसाइटी के नेतृत्व में शिव बारात निकालने का दावा कर रहे हैं, जिसका मोहन बाजपेई गुट विरोध कर रहा है।
कुछ लोग शिव बारात का राजनीतिकरण करना चाहते है। पिछले तीन सालों से शिव बारात की होर्डिंग्स में किसी भी व्यक्ति का नाम और फोटो नहीं होता था। सिर्फ शिवभक्तगण लिखा जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं करने पर लोग अमादा है, जिसका मैं विरोध कर रहा हूं। ऐसा लगता है कि प्रशासन हमारी जायजा मांग से सहमत है, लेकिन वह असहाय नजर आ रहा है।
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- मोहन बाजपेई, बसपा नेता/आयोजक-शिव बारात
शिव बारात निकालने में अब किसी की मर्जी नहीं चलने दी जाएगी। उनकी मनमर्जी के कारण ही शिव भक्त मोहन बाजपेई से अलग हुए हैं। एसडीएम के समक्ष रविवार को वार्ता हुई, लेकिन बेनतीजा रही। हम लोग हर जायज निर्णय मानने को तैयार हैं।
- अमितेश चौरसिया, गुड्डू, शिवभक्त
दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई थी, लेकिन कुछ मुद्दों को लेकर विफल रही। महाशिवरात्रि को अभी काफी दिन है। दोनों की भावनाएं शिवबारात की सफलता को लेकर है, इसलिए प्रयास रहेगा कि अच्छे काम की सफलता के लिए दोनों में सहमति बन जाए।
नागेंद्र सिंह, एसडीएम सदर
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रविवार को एसडीएम कार्यालय में एसडीएम नागेंद्र सिंह, सीओ आरके वर्मा की मौजूदगी में गत वर्षों में शिव बारात के अगुवाकार रहने वाले मोहन बाजपेई और अमितेश चौरसिया में दो घंटे तक बारात निकालने को लेकर वार्ता चली। दोनों पक्ष अपने अनुसार शिव बारात निकालने पर अड़े रहे। कई मुद्दों को लेकर हुई वार्ता अंतत: होर्डिंग्स हटाने के मामले में विफल हो गई। इस एसडीएम और सीओ सिटी भी दोनों पक्षों में समझौता कराने में नाकाम रहे। मालूम हो कि 2015 और 2016 में मोहन बाजपेई और अमितेश चौरसिया गुड्डू के नेतृत्व में ही शहर की सजावट कराकर शिव बारात निकाली जाती थी, लेकिन 2017 में अमितेश चौरसिया ने अलग होकर शिवभक्त सोसाइटी पंजीकृत करा ली और इस साल अपनी सोसाइटी के नेतृत्व में शिव बारात निकालने का दावा कर रहे हैं, जिसका मोहन बाजपेई गुट विरोध कर रहा है।
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कुछ लोग शिव बारात का राजनीतिकरण करना चाहते है। पिछले तीन सालों से शिव बारात की होर्डिंग्स में किसी भी व्यक्ति का नाम और फोटो नहीं होता था। सिर्फ शिवभक्तगण लिखा जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं करने पर लोग अमादा है, जिसका मैं विरोध कर रहा हूं। ऐसा लगता है कि प्रशासन हमारी जायजा मांग से सहमत है, लेकिन वह असहाय नजर आ रहा है।
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- मोहन बाजपेई, बसपा नेता/आयोजक-शिव बारात
शिव बारात निकालने में अब किसी की मर्जी नहीं चलने दी जाएगी। उनकी मनमर्जी के कारण ही शिव भक्त मोहन बाजपेई से अलग हुए हैं। एसडीएम के समक्ष रविवार को वार्ता हुई, लेकिन बेनतीजा रही। हम लोग हर जायज निर्णय मानने को तैयार हैं।
- अमितेश चौरसिया, गुड्डू, शिवभक्त
दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई थी, लेकिन कुछ मुद्दों को लेकर विफल रही। महाशिवरात्रि को अभी काफी दिन है। दोनों की भावनाएं शिवबारात की सफलता को लेकर है, इसलिए प्रयास रहेगा कि अच्छे काम की सफलता के लिए दोनों में सहमति बन जाए।
नागेंद्र सिंह, एसडीएम सदर