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चुनाव पूर्व वादों को याद दिलाने निकला है किसान चेतना रथ

Sun, 01 Oct 2017 11:04 PM IST
Updated Sun, 01 Oct 2017 11:04 PM IST
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चुनाव पूर्व वादों को याद दिलाने निकला है किसान चेतना रथ
चुनाव पूर्व वादों को याद दिलाने निकला है किसान चेतना रथ - फोटो : लखीमपुर खीरी, अमर उजाला
गोला गोकर्णनाथ।
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राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक व पूर्व विधायक वीएम सिंह ने कहा कि चुनाव से पूर्व भाजपा ने किसानों का कर्ज माफ कर लागत से डेढ़ गुना फसल का मूल्य देने का वादा किया था जो वह सत्ता में आकर भूल गई। उन्हें वादा याद दिलाने के लिए किसान चेतना रथ यात्रा निकाली जा रही है। शनिवार की शाम नगर आगमन पर अमर उजाला से उनकी बातचीत हुई, जिसमें उन्होंने सवालों के जवाब दिए।

किसान चेतना रथ यात्रा का मकसद क्या है?
- यह रथ यात्रा भाजपा को उनके चुनाव पूर्व किए वादे की याद दिलाने और किसानों में नई चेतना जाग्रत करने के लिए निकाली गई है, ताकि सरकार से किसान अपनी कर्जमाफी करवाकर फसल का लागत से डेढ़ गुना मूल्य ले सके।
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सरकार से आप और क्या चाहते हैं?
- किसान चेतना रथ किसी मांग को लेकर नहीं चलाया गया है। भाजपा ने किसानों को ब्याज मुक्त फसली ऋण देने, 120 दिन में गन्ने का बकाया भुगतान कराने और भविष्य में 14 दिन में गन्ना भुगतान दिलाने का वादा चुनाव घोषणा पत्र में किया था, जिससे अब सरकार पीछे हट रही है। इस कारण छह माह बीतने के बाद भी गन्ने का बकाया भुगतान नहीं हो सका है, जबकि चीनी की कीमतों में खासा इजाफा हुआ है। सरकार अब 14 दिन में गन्ने का भुगतान कराने के लिखित वादे से भी पीछे हट गई है। भविष्य में वह किसानों को ब्याज दिलाने की बात कह रही है, जबकि हाईकोर्ट इलाहाबाद के फैसले में अनुरूप सरकार गन्ना किसानों के बकाया पिछले ब्याज पर भी कोई निर्णय नहीं ले पाई है तो भविष्य में ब्याज दिलाने की बात कहना बेमानी हो सकता है।
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चीनी मिलों का नवीन पेराई सत्र शुरू होने वाला है इससे आप संतुष्ट हैं?
चीनी मिलें अब भी मनमानी कर रही हैं। अब अधिकांश किसान शीघ्र पकने वाले गन्ने की फसल बोते हैं तो मिलों का पेराई सत्र अक्तूबर में शुरू होना चाहिए, किंतु ऐसा नहीं हो रहा। यदि किसान के पेड़ी गन्ने के खेत जल्द खाली हों तो वह रबी की बुवाई कर सकता है। फिर हाल की वर्षा में किसान का गन्ना खेत में बिखरा पड़ा है, किंतु सरकार चुप है।


गन्ना मूल्य के बारे में क्या कहेंगे?
प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा से कहना है कि जब वह विपक्ष में थे तो 350 रुपया प्रति क्विंटल गन्ने मूल्य की मांग करते थे। अब वह खुद मंत्री हैं तो वे किसानों को इससे बढ़कर मूल्य दिलवाएं। किसान की धान की फसल तैयार है, लेकिन धान क्रय केंद्र नहीं खुल पाए हैं, मजबूरन किसान बिचौलियों की शरण में जा रहा है।
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