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डीटीआर बफरजोन में शामिल हो सकता है महेशपुर रेंज
Updated Thu, 30 Aug 2018 11:47 PM IST
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डीटीआर बफरजोन में शामिल हो सकता है महेशपुर रेंज
वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए होगा यह महत्वपूर्ण कदम
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर रेंज में बाघों की जंगल के बाहर सक्रियता को देखते हुए इसेे दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में शामिल किए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। महेशपुर और गोला रेंज में बाघों और अन्य वन्यजीवों की बहुलता को देखते हुए इस पर विचार हो सकता है। दक्षिण खीरी वन प्रभाग की दो रेंज मैलानी और भीरा भी बफर जोन में शामिल हो सकती हैं। इससे दुधवा टाइगर रिजर्व का दायरा बढ़ेगा। साथ ही वन और वन्यजीवों की सुरक्षा भी हो सकेगी।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर रेंज में बाघ हमले में चार लोग मारे जा चुके हैं। कई पालतू पशु भी बाघों का निवाला बन चुके हैं। बाघों की लोकेशन जानने के लिए जंगल में लगाए गए कैमरों से महेशपुर रेंज में पांच बाघ होने की पुष्टि हुई है। वन विभाग अभी तक यह पता नहीं लगा पाया है कि एक ही बाघ हमलावर हो रहा है या कई बाघ। फिलहाल बाघ और तेंदुए की सक्रियता से क्षेत्र के लोग दहशत में हैं।
मंगलवार की रात एक बाघ घमहाघाट स्थित किसान लाल सिंह के झाले तक आ पहुंचा और काफी देर तक वहीं जमा रहा। बाघ के झाले पर आने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी दो बार आ चुका है। आबादी के निकट बाघों की बढ़ती सक्रियता से माना जा रहा है कि महेशपुर रेंज में बाघों के हैबिटेट का प्रबंधन ठीक न होने से बाघों को बाहर निकलना पड़ रहा है। टाइगर रिजर्व के बफर जोन में शामिल होने के बाद प्रबंधन यहां निगरानी और अच्छे ढंग से कर सकेगा।
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राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह कहते हैं कि महेशपुर रेंज में बाघों और अन्य वन्यजीवों की संख्या बढ़ी है। बाघ तो यहां हमेशा से रहे हैं। ऐसे में इसे दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में शामिल किए जाने से वन प्रबंधन और बाघों के संरक्षण में मदद मिलेगी। गोला रेंज में भी वन्यजीवों की बहुलता के चलते उसे भी बफर जोन में शामिल करने की जरूरत है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के दबीर हसन का भी कहना है कि जहां बाघ हैं वह टाइगर रिजर्व एरिया मेें होना चाहिए।
पिछले साल बफर जोन में पूरे उत्तर खीरी वन प्रभाग का 49390.32 हेक्टेअर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग का 24779.50 हेक्टेअर एरिया के साथ शाहजहांपुर जिले के खुटार रेंज का 2622.20 हेक्टेअर क्षेत्र बफर जोन में शामिल किया गया था। इसमें यदि महेशपुर रेंज का 6801.60 हेक्टेअर और गोला रेंज का 7657.07 हेक्टेअर वन क्षेत्र बफर जोन में शामिल कर दिया जाए तो दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन का दायरा बढ़कर 125257.15 हेक्टेअर हो जाएगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय का कहना है कि फिलहाल दक्षिण खीरी वन प्रभाग की महेशपुर और गोला रेंज को बफर जोन में शामिल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है लेकिन महेशपुर और गोला रेंज में वन्यजीवों की बहुलता को देखते हुए भविष्य में इस पर विचार किया जा सकता है। यह प्रक्रिया शासन स्तर से होती है और इसकी लंबी प्रक्रिया है।
वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए होगा यह महत्वपूर्ण कदम
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर रेंज में बाघों की जंगल के बाहर सक्रियता को देखते हुए इसेे दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में शामिल किए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। महेशपुर और गोला रेंज में बाघों और अन्य वन्यजीवों की बहुलता को देखते हुए इस पर विचार हो सकता है। दक्षिण खीरी वन प्रभाग की दो रेंज मैलानी और भीरा भी बफर जोन में शामिल हो सकती हैं। इससे दुधवा टाइगर रिजर्व का दायरा बढ़ेगा। साथ ही वन और वन्यजीवों की सुरक्षा भी हो सकेगी।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर रेंज में बाघ हमले में चार लोग मारे जा चुके हैं। कई पालतू पशु भी बाघों का निवाला बन चुके हैं। बाघों की लोकेशन जानने के लिए जंगल में लगाए गए कैमरों से महेशपुर रेंज में पांच बाघ होने की पुष्टि हुई है। वन विभाग अभी तक यह पता नहीं लगा पाया है कि एक ही बाघ हमलावर हो रहा है या कई बाघ। फिलहाल बाघ और तेंदुए की सक्रियता से क्षेत्र के लोग दहशत में हैं।
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मंगलवार की रात एक बाघ घमहाघाट स्थित किसान लाल सिंह के झाले तक आ पहुंचा और काफी देर तक वहीं जमा रहा। बाघ के झाले पर आने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी दो बार आ चुका है। आबादी के निकट बाघों की बढ़ती सक्रियता से माना जा रहा है कि महेशपुर रेंज में बाघों के हैबिटेट का प्रबंधन ठीक न होने से बाघों को बाहर निकलना पड़ रहा है। टाइगर रिजर्व के बफर जोन में शामिल होने के बाद प्रबंधन यहां निगरानी और अच्छे ढंग से कर सकेगा।
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राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह कहते हैं कि महेशपुर रेंज में बाघों और अन्य वन्यजीवों की संख्या बढ़ी है। बाघ तो यहां हमेशा से रहे हैं। ऐसे में इसे दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में शामिल किए जाने से वन प्रबंधन और बाघों के संरक्षण में मदद मिलेगी। गोला रेंज में भी वन्यजीवों की बहुलता के चलते उसे भी बफर जोन में शामिल करने की जरूरत है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के दबीर हसन का भी कहना है कि जहां बाघ हैं वह टाइगर रिजर्व एरिया मेें होना चाहिए।
पिछले साल बफर जोन में पूरे उत्तर खीरी वन प्रभाग का 49390.32 हेक्टेअर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग का 24779.50 हेक्टेअर एरिया के साथ शाहजहांपुर जिले के खुटार रेंज का 2622.20 हेक्टेअर क्षेत्र बफर जोन में शामिल किया गया था। इसमें यदि महेशपुर रेंज का 6801.60 हेक्टेअर और गोला रेंज का 7657.07 हेक्टेअर वन क्षेत्र बफर जोन में शामिल कर दिया जाए तो दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन का दायरा बढ़कर 125257.15 हेक्टेअर हो जाएगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय का कहना है कि फिलहाल दक्षिण खीरी वन प्रभाग की महेशपुर और गोला रेंज को बफर जोन में शामिल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है लेकिन महेशपुर और गोला रेंज में वन्यजीवों की बहुलता को देखते हुए भविष्य में इस पर विचार किया जा सकता है। यह प्रक्रिया शासन स्तर से होती है और इसकी लंबी प्रक्रिया है।