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जंगल में चर रही पालतू भैंस को बाघ ने बनाया निवाला
Updated Sat, 04 Aug 2018 12:15 AM IST
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जंगल में चर रही भैंस को बाघ ने बनाया निवाला
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन मैलानी रेंज में बाघ ने जंगल में चर रही पालतू भैंस को अपना निवाला बनाया है। इससे ग्रामीणों में दहशत है।
बफरजोन मैलानी रेंज से होकर निकली बड़ी नहर के पुल के किनारे बृहस्पतिवार को चरवाहे पशुओं को चराने गदनियां बीट के जंगल में गए थे। इस दौरान पशुओं के झुंड से निकली एक भैंस जंगल के तालाब में चली गई, जहां झाड़ियों में बैठे बाघ ने भैंस पर हमला कर उसे मार डाला। बाघ भैंस को घसीटता हुआ जंगल के अंदर ले गया और उसे निवाला बनाया। ग्रामीणों का कहना है कि मारी गई भैंस नारंग गांव निवासी पलटू की है। ट्रेनी आईएफएस और प्रभारी रेंजर मैलानी प्रखर मिश्र ने घटना की पुष्टि की और कहा कि जंगल के अंदर जिस जगह भैंस चर रही थी वह बाघ बाहुल्य क्षेत्र है। उन्होंने ग्रामीणों को हिदायत दी कि जंगल में पशुओं को चराने के लिए न ले जाएं।
गन्ने के खेतों में बाघ, दहशत में लोग
बाघों को जंगल नहीं ले जा पा रहे वनकर्मी
मॉनीटरिंग के नाम पर भी हो रही खाना पूरी
अमर उजाला ब्यूरो
ममरी। वनरेंज मोहम्मदी महेशपुर की देवीपुर बीट क्षेत्र के घमहाघाट और सुंदरपुर गांव से पास दो महीने में सात बार हमले कर चुका है। वह अब भी अपना ठिकाना गन्ने के खेतों में बनाए हुए है लेकिन वन अधिकारी और कर्मचारी कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। वन अधिकारियों की मानें तो देवीपुर बीट में तीन और महेशपुर बीट के जंगल में दो अर्थात कुल पांच बाघ मौजूद हैं, जो शिकार के चक्कर में जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में चले आते हैं।
घमहाघाट के सरदार सिंह, मान सिंह, बलिहार सिंह, शमशेर सिंह, सुंदरपुर के बीडीसी रामकुमार वर्मा बताते हैं कि पहली जून को बाघ ने दूलीपुर के गजराज को घायल कर दिया था। 17 जून को एक बछड़ा, 18 जून को सुंदरपुर के किसान बालकराम को मार गिराने के बाद छह जुलाई को एक बछड़ा, 12 जुलाई को एक सियार, 29 जुलाई को गाय और 31 जुलाई को पड्डे को अपना निवाला बनाने वाला बाघ अब भी गन्ने के खेतों में ही रह रहा है। इससे क्षेत्र में दहशत है। उधर इस बाबत रेंजर बनारसीदास मौर्य का कहना है कि सुंदरपुर और घमहाघाट, बिहारीपुर इलाके में गन्ने का एरिया इतना बड़ा है कि बाघ की लोकेशन पता करना टेढ़ी खीर है। रेंजर का कहना है कि मना करने के बाद भी चरवाहे पशु चराने जंगल से सटे खेतों में जाते हैं इसी कारण बाघ के हमले बढ़ रहे हैं।
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन मैलानी रेंज में बाघ ने जंगल में चर रही पालतू भैंस को अपना निवाला बनाया है। इससे ग्रामीणों में दहशत है।
बफरजोन मैलानी रेंज से होकर निकली बड़ी नहर के पुल के किनारे बृहस्पतिवार को चरवाहे पशुओं को चराने गदनियां बीट के जंगल में गए थे। इस दौरान पशुओं के झुंड से निकली एक भैंस जंगल के तालाब में चली गई, जहां झाड़ियों में बैठे बाघ ने भैंस पर हमला कर उसे मार डाला। बाघ भैंस को घसीटता हुआ जंगल के अंदर ले गया और उसे निवाला बनाया। ग्रामीणों का कहना है कि मारी गई भैंस नारंग गांव निवासी पलटू की है। ट्रेनी आईएफएस और प्रभारी रेंजर मैलानी प्रखर मिश्र ने घटना की पुष्टि की और कहा कि जंगल के अंदर जिस जगह भैंस चर रही थी वह बाघ बाहुल्य क्षेत्र है। उन्होंने ग्रामीणों को हिदायत दी कि जंगल में पशुओं को चराने के लिए न ले जाएं।
गन्ने के खेतों में बाघ, दहशत में लोग
बाघों को जंगल नहीं ले जा पा रहे वनकर्मी
मॉनीटरिंग के नाम पर भी हो रही खाना पूरी
अमर उजाला ब्यूरो
ममरी। वनरेंज मोहम्मदी महेशपुर की देवीपुर बीट क्षेत्र के घमहाघाट और सुंदरपुर गांव से पास दो महीने में सात बार हमले कर चुका है। वह अब भी अपना ठिकाना गन्ने के खेतों में बनाए हुए है लेकिन वन अधिकारी और कर्मचारी कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। वन अधिकारियों की मानें तो देवीपुर बीट में तीन और महेशपुर बीट के जंगल में दो अर्थात कुल पांच बाघ मौजूद हैं, जो शिकार के चक्कर में जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में चले आते हैं।
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घमहाघाट के सरदार सिंह, मान सिंह, बलिहार सिंह, शमशेर सिंह, सुंदरपुर के बीडीसी रामकुमार वर्मा बताते हैं कि पहली जून को बाघ ने दूलीपुर के गजराज को घायल कर दिया था। 17 जून को एक बछड़ा, 18 जून को सुंदरपुर के किसान बालकराम को मार गिराने के बाद छह जुलाई को एक बछड़ा, 12 जुलाई को एक सियार, 29 जुलाई को गाय और 31 जुलाई को पड्डे को अपना निवाला बनाने वाला बाघ अब भी गन्ने के खेतों में ही रह रहा है। इससे क्षेत्र में दहशत है। उधर इस बाबत रेंजर बनारसीदास मौर्य का कहना है कि सुंदरपुर और घमहाघाट, बिहारीपुर इलाके में गन्ने का एरिया इतना बड़ा है कि बाघ की लोकेशन पता करना टेढ़ी खीर है। रेंजर का कहना है कि मना करने के बाद भी चरवाहे पशु चराने जंगल से सटे खेतों में जाते हैं इसी कारण बाघ के हमले बढ़ रहे हैं।
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