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बाघ के डर से खेती-बाड़ी करना,मवेशी चराना हुआ मुश्किल
Updated Tue, 12 Jun 2018 07:32 PM IST
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फोटो- 12एलकेएच 503
बाघ के डर से खेतीबाड़ी करना, मवेशी चराना हुआ मुश्किल
गन्ने के खेत में बसेरा बनाए हैं बाघ, दहशत में ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज। सोमवार को बाघ हमले में 55 वर्षीय राम प्रसाद के घायल होने के बाद जंगल से सटे गांवों में एक बार फिर दहशत फैल गई है। बाघ के डर से लोगों का खेतों में जाना और मवेशी चराना भी मुश्किल हो रहा है। गन्ने की फसल बाघों के छिपने लायक हो गई है। इससे जंगल की गर्मी से बिलबिलाए वन्यजीवों ने गन्ने के खेतों में बसेरा बना लिया है। इसके चलते ग्रामीणों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
जंगल से सटे इलाकों में अधिकतर बाघ हमले की घटनाएं उस समय होती हैं, जब गन्ने की फसल तैयार होने लगती हैं और यह हमले तब तक जारी रहते हैं जब तक गन्ना पूरी तरह कट नहीं जाता। इन दिनों कड़ी धूप और भीषण गर्मी से जंगल की घास सूख चुकी है। जंगल के तालाब आदि भी सूखे पड़े हैं। ऐसे में वन्यजीव जंगल से बाहर निकलने पर मजबूर हैं। हिरन आदि शाकाहारी पशुओं को गन्ने की मुलायम कोपल के रूप में खेतों में अच्छा भोजन मिल रहा है। इसके चलते हिरन आदि खेतों में आ गए हैं। बाघों ने भी इन्हीं जानवरों के पीछे खेतों और जंगल के बाहरी इलाके में उगी झाड़ियों में अपना बसेरा बना लिया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के दक्षिण निघासन रेंज के सहतेपुरवा गांव में बाघिन ने 13 अप्रैल को कामता प्रसाद नामक ग्रामीण को अपना निवाला बनाया था। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने बाघिन को पीट-पीटकर मरणासन्न अवस्था में पहुंचा दिया था। हालांकि लखनऊ चिड़ियाघर में सघन इलाज के बाद यह बाघिन स्वस्थ हो गई है। इसके बाद भी निघासन इलाके में इन दिनों बाघ की दहशत बनी हुई है। मालूम हो कि निघासन क्षेत्र में बाघों का आतंक एक लंबे अरसे बाद शुरू हुआ है।
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बांकेगंज ब्लॉक क्षेत्र के 80 फीसदी गांव जंगल से सटकर बसे हैं। यहां के लोग हमेशा से ही बाघों की दहशत के साए में रहते आए हैं। पिछले दो साल के अंदर बाघ 12 लोगों को अपना निवाला बना चुके हैं। करीब 30 से अधिक लोगों पर हमला कर घायल कर चुके हैं। पिछले छह महीने के अंदर इस क्षेत्र में बाघ का यह तीसरा हमला है। इसमें बाघ एक रिटायर्ड रेल कर्मी को अपना निवाला भी बना चुका है।
इंसेट..
मैलानी रेंज में पिछले छह माह के अंदर बाघ हमले की हुईं घटनाएं
- 05 जनवरी 2018- मैलानी रेंज की खरेहटा बीट में उजागरपुर गांव निवासी 45 वर्षीय बनवारी लाल बाघ हमले में गंभीर घायल।
- 10 जनवरी 2018- इसी रेंज की उत्तर मैलानी बीट में 62 वर्षीय संतराम (रिटायर्ड रेलकर्मी) को बाघ ने मार डाला।
- 11 जून 2018- इसी रेंज की जटपुरा बीट में हरदुआ निवासी 55 वर्षीय राम प्रसाद पर बाघ ने हमला कर गंभीर घायल किया।
इंसेट..
डब्लूडब्लूएफ देगा 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद
सोमवार बाघ हमले में घायल हुए हरदुआ गांव निवासी राम प्रसाद को डब्लूडब्लूएफ तात्कालिक सहायता के रूप से 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद देगा। बफरजोन उप-निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि सहायता राशि उपलब्ध कराने के लिए डब्लूडब्लूएफ कोआर्डिनेटर दबीर हसन से कहा गया है।
वर्जन-
जिस इलाके में बाघ का हमला हुआ है, वह बाघ बाहुल्य क्षेत्र है। ग्रामीणों को जंगल या जंगल से सटे इलाके में मवेशी चराने के लिए नहीं ले जाना चाहिए। खेतों में जाते समय भी ग्रामीण पूरी सतर्कता बरतें। बाघ दिखाई पड़ते ही वन विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उप-निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन/प्रभारी डीडी दुधवा पार्क
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बाघ के डर से खेतीबाड़ी करना, मवेशी चराना हुआ मुश्किल
गन्ने के खेत में बसेरा बनाए हैं बाघ, दहशत में ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज। सोमवार को बाघ हमले में 55 वर्षीय राम प्रसाद के घायल होने के बाद जंगल से सटे गांवों में एक बार फिर दहशत फैल गई है। बाघ के डर से लोगों का खेतों में जाना और मवेशी चराना भी मुश्किल हो रहा है। गन्ने की फसल बाघों के छिपने लायक हो गई है। इससे जंगल की गर्मी से बिलबिलाए वन्यजीवों ने गन्ने के खेतों में बसेरा बना लिया है। इसके चलते ग्रामीणों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
जंगल से सटे इलाकों में अधिकतर बाघ हमले की घटनाएं उस समय होती हैं, जब गन्ने की फसल तैयार होने लगती हैं और यह हमले तब तक जारी रहते हैं जब तक गन्ना पूरी तरह कट नहीं जाता। इन दिनों कड़ी धूप और भीषण गर्मी से जंगल की घास सूख चुकी है। जंगल के तालाब आदि भी सूखे पड़े हैं। ऐसे में वन्यजीव जंगल से बाहर निकलने पर मजबूर हैं। हिरन आदि शाकाहारी पशुओं को गन्ने की मुलायम कोपल के रूप में खेतों में अच्छा भोजन मिल रहा है। इसके चलते हिरन आदि खेतों में आ गए हैं। बाघों ने भी इन्हीं जानवरों के पीछे खेतों और जंगल के बाहरी इलाके में उगी झाड़ियों में अपना बसेरा बना लिया है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के दक्षिण निघासन रेंज के सहतेपुरवा गांव में बाघिन ने 13 अप्रैल को कामता प्रसाद नामक ग्रामीण को अपना निवाला बनाया था। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने बाघिन को पीट-पीटकर मरणासन्न अवस्था में पहुंचा दिया था। हालांकि लखनऊ चिड़ियाघर में सघन इलाज के बाद यह बाघिन स्वस्थ हो गई है। इसके बाद भी निघासन इलाके में इन दिनों बाघ की दहशत बनी हुई है। मालूम हो कि निघासन क्षेत्र में बाघों का आतंक एक लंबे अरसे बाद शुरू हुआ है।
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मैलानी रेंज में पिछले छह माह के अंदर बाघ हमले की हुईं घटनाएं
- 05 जनवरी 2018- मैलानी रेंज की खरेहटा बीट में उजागरपुर गांव निवासी 45 वर्षीय बनवारी लाल बाघ हमले में गंभीर घायल।
- 10 जनवरी 2018- इसी रेंज की उत्तर मैलानी बीट में 62 वर्षीय संतराम (रिटायर्ड रेलकर्मी) को बाघ ने मार डाला।
- 11 जून 2018- इसी रेंज की जटपुरा बीट में हरदुआ निवासी 55 वर्षीय राम प्रसाद पर बाघ ने हमला कर गंभीर घायल किया।
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डब्लूडब्लूएफ देगा 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद
सोमवार बाघ हमले में घायल हुए हरदुआ गांव निवासी राम प्रसाद को डब्लूडब्लूएफ तात्कालिक सहायता के रूप से 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद देगा। बफरजोन उप-निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि सहायता राशि उपलब्ध कराने के लिए डब्लूडब्लूएफ कोआर्डिनेटर दबीर हसन से कहा गया है।
वर्जन-
जिस इलाके में बाघ का हमला हुआ है, वह बाघ बाहुल्य क्षेत्र है। ग्रामीणों को जंगल या जंगल से सटे इलाके में मवेशी चराने के लिए नहीं ले जाना चाहिए। खेतों में जाते समय भी ग्रामीण पूरी सतर्कता बरतें। बाघ दिखाई पड़ते ही वन विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उप-निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन/प्रभारी डीडी दुधवा पार्क