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जातिवाद से ऊबकर निर्दल राजनीति का लिया फैसला
Updated Tue, 07 Nov 2017 10:30 PM IST
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लखीमपुर खीरी/गोला गोकर्णनाथ।
निवर्तमान पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल ने कहा है कि वह जातिवाद से ऊबकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरीं और जनता ने उनका साथ दिया, जिसके बूते वह नगर का विकास करा सकीं। इसी दम पर वह पालिकाध्यक्ष के लिए पुन: नौ नवंबर को अपना जनसमूह के साथ नामांकन कराएंगी।
मीनाक्षी मंगलवार को अपने आवास पर पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं, जिसमें उनका सामना सपा की सत्ता में विधायक अरविंद गिरि से हुआ और उन्हें चुनाव में हरा दिया गया। फिर कांग्रेस से विधायकी लड़ी और अनुभव किया कि दलगत राजनीति में जातिवाद हावी है। साथ ही दलगत राजनीति को गंदा बताया। फिर 2012 में निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरीं, जिसमें भी सपा की सत्ता का सामना करना पड़ा। उन्होंने पांच साल बेमिसाल पुस्तक दिखाते हुए अपने द्वारा नगर में कराए विकास कार्यों का ब्योरा दिया। उन्होंने आहवान किया कि नौ नवंबर को सब काम छोड़कर उनके लिए लोग निकलें, वह पूरे पांच साल जनता की सेवा में लगी रहेंगी।
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निवर्तमान पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल ने कहा है कि वह जातिवाद से ऊबकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरीं और जनता ने उनका साथ दिया, जिसके बूते वह नगर का विकास करा सकीं। इसी दम पर वह पालिकाध्यक्ष के लिए पुन: नौ नवंबर को अपना जनसमूह के साथ नामांकन कराएंगी।
मीनाक्षी मंगलवार को अपने आवास पर पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं, जिसमें उनका सामना सपा की सत्ता में विधायक अरविंद गिरि से हुआ और उन्हें चुनाव में हरा दिया गया। फिर कांग्रेस से विधायकी लड़ी और अनुभव किया कि दलगत राजनीति में जातिवाद हावी है। साथ ही दलगत राजनीति को गंदा बताया। फिर 2012 में निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरीं, जिसमें भी सपा की सत्ता का सामना करना पड़ा। उन्होंने पांच साल बेमिसाल पुस्तक दिखाते हुए अपने द्वारा नगर में कराए विकास कार्यों का ब्योरा दिया। उन्होंने आहवान किया कि नौ नवंबर को सब काम छोड़कर उनके लिए लोग निकलें, वह पूरे पांच साल जनता की सेवा में लगी रहेंगी।
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