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बाघ तो हटने से रहा, इंसान बचाने के तरीके तलाशें

Fri, 21 Dec 2018 11:59 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 21 Dec 2018 11:59 PM IST
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बाघ तो हटने से रहा, इंसान बचाने के तरीके तलाशें

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बाघ तो हटने से रहा, इंसान बचाने के तरीके तलाशें
लखीमपुर खीरी। तराई में बढ़ते मानव-बाघ संघर्ष की घटनाओं के दौरान यह बात सामने आई कि बाघ तो अपनी जगह छोड़ने से रहे। अब इंसान बचाने की तरीके तलाशने होंगे। इसका हल ग्रामीणों से तालमेल बनाकर ही निकालना होगा। ग्लोबल टाइगर फोरम की एक टीम दो दिवसीय दौरे पर जिले में पहुंची और बाघ प्रभावित इलाके का भ्रमण करने के बाद वनाधिकारियों को मानव बाघ संघर्ष की स्थिति से निबटने का प्रशिक्षण भी दिया। टीम ने अध्ययन के दौरान आज की स्थितियों के अनुसार नए ढंग से बेहतर वन प्रबंधन की जरूरत महसूस की।
ग्लोबल टाइगर फोरम के सदस्य सचिव डॉ. राजेश गोपाल के नेतृत्व में आई इस टीम में सीनियर प्रोग्राम मैनेजर मोनिश कपूर, राज्य प्राणि उद्यान प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. एसपी यादव, मुख्य वन संरक्षक के प्रवीण राव भी शामिल थे। टीम ने जिले में पहुंचने के बाद मोहम्मदी रेंज के बाघ प्रभावित इलाके का भ्रमण किया। बाघ मूवमेंट के रास्ते देखे। टीम ने महेशपुर सुंदरपुर, देवीपुर गांवों समेत जंगल के आसपास के झालों में जाकर लोगों से बातचीत की। ग्रामीणों की पीड़ा जानी और उन्हें बाघ से बचाव के उपाय भी बताए।
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ग्लोबल टाइगर फोरम ने महसूस किया कि यह पूरा इलाका बाघों का हैबिटेट है। यहां से बाघों को हटाना न तो संभव है और न ही बाघ-मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने का स्थाई हल। ऐसी स्थिति में इंसानों और बाघों को सुरक्षित करने के उपाय करने होंगे। इसके लिए मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार नए ढंग से वन प्रबंधन की रणनीति बनाने पर बल दिया गया। टीम ने प्रभावित क्षेत्र के फील्ड स्टाफ से भी बातचीत की और उनसे मानव-बाघ संघर्ष को कम करने के उपायों पर चर्चा की।
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टीम ने प्रभावित क्षेत्रों में कैमरे लगाने, बाघों की जीपीएस लोकेशन, और बाघों के मूवमेंट का सर्वे कर रूट चार्ट तैयार कराने को कहा ताकि उसके अनुसार बचाव की दीर्घकालिक योजना और वन प्रबंधन की रणनीति बनाई जा सके। टीम ने शुक्रवार सुबह बजाज हिंदुस्थान चीनी मिल के गेस्ट हाउस में वनाधिकारियों और फील्ड स्टाफ को विधिवत प्रशिक्षण भी दिया। उन्होंने बाघों की गतिविधियों का अनुश्रवण पारंपरिक तरीकों जैसे हाथी से गश्त, ई-सर्विलांस, कैमरा ट्रैप आदि से करने को कहा। कहा नियंत्रण के लिए रेस्क्यू टीम भी गठित की जाएगी।
डॉ. राजेश गोपाल ने आधुनिक ढंग से वन प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान डीएफओ समीर कुमार, एसडीओ रविकांत शुक्ल, राजीव कुमार, रेंजर गोला, मोहम्मदी बनारसी दास शाक्य और दक्षिण खीरी वन प्रभाग का फील्ड स्टाफ मौजूद रहा।
इंसेट.....
जंगल पर निर्भरता कम करने की होगी कोशिश
मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं कम से कम हों, इसके लिए जंगल के आसपास बसे लोगों की जंगल पर निर्भरता कम करने पर चर्चा हुई। ग्रामीणों के लिए रोजगार सृजन कर उन्हें वन विभाग का सहयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। वन विभाग के प्रयासों में स्थानीय लोगों को भागीदार बनाने पर भी चर्चा की गई।

इंसेट.....
वन विभाग ग्लोबल टाइगर फोरम मिल कर रहे काम
वन विभाग ग्लोबल टाइगर फोरम के साथ जुड़कर बाघ संरक्षण और मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए आधुनिक ढंग से वन प्रबंधन को बेहतर दिशा देने का काम कर रहा है। ग्लोबल टाइगर फोरम भारत, नेपाल, भूटान, बंगलादेश, कंबोडिया, चीन, रूस, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनिशिया, लाओस और म्यांमार आदि 13 देशों में काम कर रहा है।
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