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बाघ प्रभावित इलाकों में लगाए चेतावनी बोर्ड
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लखीमपुर खीरी। मानव बाघ संघर्ष रोकने के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन बाघ प्रभावित इलाकों में चेतावनी बोर्ड लगा रहा है। इनके जरिए लोगों को बताया जा रहा है कि बाघ प्रभावित क्षेत्रों में मवेशी चराने न जाएं। सुबह और शाम उस इलाके में अकेले भी न जाएं। डीटीआर प्रशासन ने तिकुनिया क्षेत्र में कौड़ियाला घाट और चौगुर्जी घाट पर भी इसी तरह का बोर्ड लगाया हैं।
बफर जोन के बेलरायां रेंज और कर्तनिया घाट वन्यजीव विहार के बीच कौड़ियाला नदी बहती है। बड़ी संख्या में लोग जंगल से घास फूस और जलौनी लकड़ी लेने के लिए नदी पार कर कर्तनिया घाट जंगल में घुस जाते हैं। दो सप्ताह पहले तिकुनिया कोतवाली क्षेत्र के बरसोला गांव निवासी मुंशीराम कौड़ियाला नदी पार कर कर्तनियाघाट जंगल में घास काटने गये थे। उसी समय वे बाघ का शिकार बन गए।
चौगुर्जी घाट के आसपास पिछले एक माह के अंदर बाघ कई मवेशियों को भी निवाला बना चुका है। कई मवेशी बाघ हमले में घायल भी हो चुके हैं। जागरूकता के कई प्रयासों के बावजूद लोग चौगुर्जी घाट होते हुए कौड़ियाला नदी पार कर जंगल में घुसते हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल पटेल का कहना है कि यह क्षेत्र बाघों का प्राकृतवास है। यहां मवेशी चराना, सुबह शाम आवाजाही करना खतरनाक हो सकता है।
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डॉ. पटेल ने बताया कि हाल ही में यहां ग्रामीणों के साथ बैठक कर उन्हें बाघ से बचाव के बारे में बताया गया। साथ ही वहां एक चेतावनी बोर्ड भी लगाया गया है। जिसमें लिखा गया है कि यह क्षेत्र वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र है। इस समय इस क्षेत्र में बाघ की निरंतर चहलकदमी है। इसलिए सुबह शाम के समय अकेले घाट के रास्ते पर कदापि न निकलें। यह खतरनाक हो सकता है।
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बफर जोन के बेलरायां रेंज और कर्तनिया घाट वन्यजीव विहार के बीच कौड़ियाला नदी बहती है। बड़ी संख्या में लोग जंगल से घास फूस और जलौनी लकड़ी लेने के लिए नदी पार कर कर्तनिया घाट जंगल में घुस जाते हैं। दो सप्ताह पहले तिकुनिया कोतवाली क्षेत्र के बरसोला गांव निवासी मुंशीराम कौड़ियाला नदी पार कर कर्तनियाघाट जंगल में घास काटने गये थे। उसी समय वे बाघ का शिकार बन गए।
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चौगुर्जी घाट के आसपास पिछले एक माह के अंदर बाघ कई मवेशियों को भी निवाला बना चुका है। कई मवेशी बाघ हमले में घायल भी हो चुके हैं। जागरूकता के कई प्रयासों के बावजूद लोग चौगुर्जी घाट होते हुए कौड़ियाला नदी पार कर जंगल में घुसते हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल पटेल का कहना है कि यह क्षेत्र बाघों का प्राकृतवास है। यहां मवेशी चराना, सुबह शाम आवाजाही करना खतरनाक हो सकता है।
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डॉ. पटेल ने बताया कि हाल ही में यहां ग्रामीणों के साथ बैठक कर उन्हें बाघ से बचाव के बारे में बताया गया। साथ ही वहां एक चेतावनी बोर्ड भी लगाया गया है। जिसमें लिखा गया है कि यह क्षेत्र वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र है। इस समय इस क्षेत्र में बाघ की निरंतर चहलकदमी है। इसलिए सुबह शाम के समय अकेले घाट के रास्ते पर कदापि न निकलें। यह खतरनाक हो सकता है।