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मौनी अमावस्या करीब पर आचमन लायक भी नहीं है आदिगंगा का जल
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लखीमपुर खीरी। मौनी अमावस्या को चार दिन शेष बचे हैं, लेकिन आदिगंगा मानी जाने वाली गोमती नदी का जल आचमन लायक भी नहीं है। जगह-जगह अतिक्रमण और गंदगी है। प्रदूषण से अटी गोमती को लेकर युवा वर्ग चिंतित है। विधायक लोकेन्द्र प्रताप सिंह ने चुनाव से पहले गोमती नदी को निर्मल करने का वादा किया था, लेकिन दो साल बाद भी गोमती की सफाई तक नहीं करा पाए हैं। गोमती सफाई अभियान नमामि गंगे के पदाधिकारी सहित क्षेत्र की जनता कह रही है कि विधायक जी, अपना वादा निभाइये, गोमती को तो निर्मल कराइये।
गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जिले के माधोटांडा स्थित फुलहर झील से हुआ है। इसे गोमत ताल भी कहते हैं। प्रारंभ में यह 12 मील तक एक खड्ढ के रूप में बहती है। यहां से यह शाहजहांपुर जिले में और फिर खीरी में प्रवेश करती है। कसबा मोहम्मदी के किनारे से होते हुए लखनऊ जाती है। इसी बीच बहुत सी सहायक नदियां और नाले इसमें मिलते हैं। यह नदी बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर जिलों में होकर बहती है। जौनपुर के आगे इस नदी में प्रसिद्ध सई नदी मिलती है, फिर यह वाराणसी से 20 मील उत्तर पटना गांव के पास गंगा नदी से मिल जाती है। इस नदी का बहाव उत्तर प्रदेश में नौ सौ किलोमीटर तक है। मान्यता है कि एकादशी को इस नदी में स्नान करने से संपूर्ण पाप धुल जाते हैं। वहीं माघ की अमावस्या को गोमती नदी के घाटों पर लोग इसके जल से स्नान करते हैं, लेकिन अपने जिले में नदी का आलम यह है कि इसमें नहाना तो दूर जल से आचमन करना भी मुश्किल है। वजह है कि इसका जल प्रदूषित हो चुका है। कई स्थानों पर तो यह नदी महज नाले की तरह तो कई जगह सूखी पड़ी है। इससे इस बार भी अमावस्या पर यहां गोमती नदी के पवित्र जल से नहाने की आस लेकर आने वाले श्रद्धालुओं को मायूसी ही हाथ लगेगी।
प्रशासन ने भी गोमती उद्धार के लिए भेजी है रिपोर्ट
तत्कालीन डीएम आकाशदीप के समय में ही जिला प्रशासन की ओर से गोमती नदी के उद्धार के लिए एसडीएम मोहम्मदी ने शासन को प्रस्ताव भेजा था, जिसके तहत गोमती नदी में सफाई अभियान, सौंदर्यीकरण आदि के प्रस्ताव थे, लेकिन इस पर कोई मंजूरी नहीं मिल सकी। इस बाबत डीएम शैलेन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि उनका प्रयास है कि पर्यावरण, पर्यटन के लिहाज से जिला समृद्ध हो। इस पर शासन भी गंभीर है। गोमती के उद्धार के प्रयास हो रहे हैं। उम्मीद है इसमें सुधार होगा।
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नदी की धार में हो रहा अतिक्रमण रोका जाए। धार को बंद करने में अतिक्रमण ही बाधक है, जो निजी स्वार्थवश नदी की बहती धारा को रोक रहे हैं। अभियान चलाकर गोमती नदी के जल को निर्मल कराया जाना चाहिए।
प्रशांत मिश्र, सदस्य, गोमती सफाई अभियान
आदिगंगा मानी जानी वाली गोमती को नाले के रूप में बहते देखकर और उस पर जमी काई, गंदगी देखकर बहुत दु:ख होता है। नदी किनारे कूड़ा कचरा भी जल को प्रदूषित करता है। गोमती नदी की सफाई होना जरूरी है।
दीपक भारती, सामाजिक कार्यकर्ता
मोहम्मदी से होकर निकली गोमती नदी की खुदाई और सफाई कराकर जलधारा को निर्मल किया जा सकता है। इसके विभिन्न घाटों को आकर्षक बनाकर पर्यटक स्थल बनाया जा सकता है। भाजपा सरकार सत्ता में आई तो एक पक्के घाट के निर्माण की आस जगी थी, लेकिन गोमती को संवारने की दिशा मे कोई काम नहीं हो पाया।
गोविंद गुप्ता, जिला संयोजक, नमामि गंगे
विधायक बोले, गोमती की सफाई पर सरकार का ध्यान
भाजपा जिलाध्यक्ष और मोहम्मदी से विधायक लोकेन्द्र प्रताप सिंह का कहना है कि गोमती की सफाई के लिए केन्द्र और प्रदेश की सरकार का ध्यान है। सरकार बनने के तत्काल बाद मैंने इसके सौंदर्यीकरण और सफाई अभियान चलाकर इसके जल को निर्मल करने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे संज्ञान में लिया गया है। गोमती नदी की जलधारा को निर्मल करने के लिए जल्द ही काम भी शुरू होने की उम्मीद है।
गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जिले के माधोटांडा स्थित फुलहर झील से हुआ है। इसे गोमत ताल भी कहते हैं। प्रारंभ में यह 12 मील तक एक खड्ढ के रूप में बहती है। यहां से यह शाहजहांपुर जिले में और फिर खीरी में प्रवेश करती है। कसबा मोहम्मदी के किनारे से होते हुए लखनऊ जाती है। इसी बीच बहुत सी सहायक नदियां और नाले इसमें मिलते हैं। यह नदी बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर जिलों में होकर बहती है। जौनपुर के आगे इस नदी में प्रसिद्ध सई नदी मिलती है, फिर यह वाराणसी से 20 मील उत्तर पटना गांव के पास गंगा नदी से मिल जाती है। इस नदी का बहाव उत्तर प्रदेश में नौ सौ किलोमीटर तक है। मान्यता है कि एकादशी को इस नदी में स्नान करने से संपूर्ण पाप धुल जाते हैं। वहीं माघ की अमावस्या को गोमती नदी के घाटों पर लोग इसके जल से स्नान करते हैं, लेकिन अपने जिले में नदी का आलम यह है कि इसमें नहाना तो दूर जल से आचमन करना भी मुश्किल है। वजह है कि इसका जल प्रदूषित हो चुका है। कई स्थानों पर तो यह नदी महज नाले की तरह तो कई जगह सूखी पड़ी है। इससे इस बार भी अमावस्या पर यहां गोमती नदी के पवित्र जल से नहाने की आस लेकर आने वाले श्रद्धालुओं को मायूसी ही हाथ लगेगी।
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प्रशासन ने भी गोमती उद्धार के लिए भेजी है रिपोर्ट
तत्कालीन डीएम आकाशदीप के समय में ही जिला प्रशासन की ओर से गोमती नदी के उद्धार के लिए एसडीएम मोहम्मदी ने शासन को प्रस्ताव भेजा था, जिसके तहत गोमती नदी में सफाई अभियान, सौंदर्यीकरण आदि के प्रस्ताव थे, लेकिन इस पर कोई मंजूरी नहीं मिल सकी। इस बाबत डीएम शैलेन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि उनका प्रयास है कि पर्यावरण, पर्यटन के लिहाज से जिला समृद्ध हो। इस पर शासन भी गंभीर है। गोमती के उद्धार के प्रयास हो रहे हैं। उम्मीद है इसमें सुधार होगा।
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नदी की धार में हो रहा अतिक्रमण रोका जाए। धार को बंद करने में अतिक्रमण ही बाधक है, जो निजी स्वार्थवश नदी की बहती धारा को रोक रहे हैं। अभियान चलाकर गोमती नदी के जल को निर्मल कराया जाना चाहिए।
प्रशांत मिश्र, सदस्य, गोमती सफाई अभियान
आदिगंगा मानी जानी वाली गोमती को नाले के रूप में बहते देखकर और उस पर जमी काई, गंदगी देखकर बहुत दु:ख होता है। नदी किनारे कूड़ा कचरा भी जल को प्रदूषित करता है। गोमती नदी की सफाई होना जरूरी है।
दीपक भारती, सामाजिक कार्यकर्ता
मोहम्मदी से होकर निकली गोमती नदी की खुदाई और सफाई कराकर जलधारा को निर्मल किया जा सकता है। इसके विभिन्न घाटों को आकर्षक बनाकर पर्यटक स्थल बनाया जा सकता है। भाजपा सरकार सत्ता में आई तो एक पक्के घाट के निर्माण की आस जगी थी, लेकिन गोमती को संवारने की दिशा मे कोई काम नहीं हो पाया।
गोविंद गुप्ता, जिला संयोजक, नमामि गंगे
विधायक बोले, गोमती की सफाई पर सरकार का ध्यान
भाजपा जिलाध्यक्ष और मोहम्मदी से विधायक लोकेन्द्र प्रताप सिंह का कहना है कि गोमती की सफाई के लिए केन्द्र और प्रदेश की सरकार का ध्यान है। सरकार बनने के तत्काल बाद मैंने इसके सौंदर्यीकरण और सफाई अभियान चलाकर इसके जल को निर्मल करने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे संज्ञान में लिया गया है। गोमती नदी की जलधारा को निर्मल करने के लिए जल्द ही काम भी शुरू होने की उम्मीद है।