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शिव भक्तों की श्रद्घा का केंद्र है बूढ़े बाबा का मंदिर
Updated Thu, 02 Aug 2018 11:13 PM IST
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श्रद्धा का केंद्र है बूढ़े बाबा का मंदिर
औरंगजेब ने शिवलिंग को काटने का किया था प्रयास
गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी के प्राचीन गोकर्णनाथ शिवालय के समीप ही ऊंचे टीले पर शिव मंदिर है। जो बूढ़े बाबा के नाम से विख्यात है। मंदिर में स्थापित विशाल शिवलिंग को काटने का प्रयास औरंगजेब ने किया था। उसके निशान शिवलिंग पर अब भी मौजूद हैं। मान्यता है कि इस शिवालय में श्रद्धालुओं द्वारा की जाने वाली कामना जरूर पूरी होती है।
बूढ़े बाबा का शिवलिंग भी प्राचीन है। इस शिवलिंग का काफी महत्व है। जनश्रुति है कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने छोटी काशी को फतह करने की योजना बनाई और यहां आ धमका। उसने यहां की कई देव प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया। वह जब शिव मंदिर की ओर चला तो बूढ़े बाबा मंदिर में गया और फरसे से शिवलिंग को काटने का प्रयास किया। किंतु कुछ दूरी पर स्थित विशाल कैमी वृक्ष से काले भौरों की सेना औरंगजेब की सेना पर टूट पड़ी जिससे बदहवास होकर औरंगजेब और उसकी सेना को भागना पड़ा। फिर कभी औरंगजेब ने इस ओर कभी मुड़कर नहीं देखा। विशाल कैमी वृक्ष अब भी मौजूद है, जिसकी गोलाई लगभग 20 फुट है। मान्यता है कि इस वृक्ष की प्रत्येक डाल में काले भौरो के बिल बने हैं जिनमें भौंरे निवास करते हैं, इन भौंरों को लोग शिवजी के गण बताते हैं।
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श्रद्धा का केंद्र है बूढ़े बाबा का मंदिर
औरंगजेब ने शिवलिंग को काटने का किया था प्रयास
गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी के प्राचीन गोकर्णनाथ शिवालय के समीप ही ऊंचे टीले पर शिव मंदिर है। जो बूढ़े बाबा के नाम से विख्यात है। मंदिर में स्थापित विशाल शिवलिंग को काटने का प्रयास औरंगजेब ने किया था। उसके निशान शिवलिंग पर अब भी मौजूद हैं। मान्यता है कि इस शिवालय में श्रद्धालुओं द्वारा की जाने वाली कामना जरूर पूरी होती है।
बूढ़े बाबा का शिवलिंग भी प्राचीन है। इस शिवलिंग का काफी महत्व है। जनश्रुति है कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने छोटी काशी को फतह करने की योजना बनाई और यहां आ धमका। उसने यहां की कई देव प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया। वह जब शिव मंदिर की ओर चला तो बूढ़े बाबा मंदिर में गया और फरसे से शिवलिंग को काटने का प्रयास किया। किंतु कुछ दूरी पर स्थित विशाल कैमी वृक्ष से काले भौरों की सेना औरंगजेब की सेना पर टूट पड़ी जिससे बदहवास होकर औरंगजेब और उसकी सेना को भागना पड़ा। फिर कभी औरंगजेब ने इस ओर कभी मुड़कर नहीं देखा। विशाल कैमी वृक्ष अब भी मौजूद है, जिसकी गोलाई लगभग 20 फुट है। मान्यता है कि इस वृक्ष की प्रत्येक डाल में काले भौरो के बिल बने हैं जिनमें भौंरे निवास करते हैं, इन भौंरों को लोग शिवजी के गण बताते हैं।
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