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प्राकृतिक संपदा भरपूर, फिर भी प्रदूषण

Wed, 05 Jun 2019 06:14 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jun 2019 06:14 PM IST
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प्राकृतिक संपदा भरपूर, फिर भी प्रदूषण
लखीमपुर खीरी। जिले में हर तरफ हरियाली और नदियों की वजह से प्राकृतिक संपदा भरपूर है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यह नदियां दम तोड़ रही हैं। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ही गोमती नदी अतिक्रमण का शिकार है। इसमें कूड़ा तक डाला जा रहा है, जिससे यह नदी सूख रही है। यही हाल शहर से सटी उल्ल नदी का है। गोला में सरायना और कठिना नदी भी सूख रही है। खास बात यह है कि शासन जहां नमामि गंगे जैसी योजनाएं चलाकर नदियों को अविरल करने की बात कह रही है, वहीं जिले की किसी भी नदी के पुनर्जीवन के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई है।
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पर्यावरण के लिहाज से खीरी जिले के लोग अपने को खुशकिस्मत कह सकते हैं। 7680 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले खीरी जिले का 1735 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हरे भरे जंगलों से ढका है। वन्यजीव, विभिन्न प्रजातियों के रंग-विरंगे पक्षी और नदियों में मिलने वाले जलीय जीव जिले की जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं। वहीं जिले में अब आबादी के बढ़ते दबाव, वन संपदा के अंधाधुंध दोहन, असंतुलित विकास और इंसानी लापरवाही से जिले की फिजा में प्रदूषण का जहर घुल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो गनीमत है लेकिन शहरी क्षेत्र में हालत दिन पर दिन खराब होते जा रहे हैं। जनरेटरों और गाड़ियों के धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। नदियों के पेट में कूड़ा, गंदा पानी और औद्योगिक कचरा पड़ने से पानी विषैला हो रहा है। शहरों में गाड़ियों और जनरेटरों के शोर के अलावा प्रचार वाहनों के शोर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण से लोग बहरे हो रहे हैं।
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नदियों का पानी हो रहा जहरीला
जिले की नदियां उल्ल, सरायन, गोमती और कंडवा नदियों में औद्योगिक इकाइयों का कचरा आता है। इससे इन नदियों का पानी जहरीला हो गया है। पर्यावरण विज्ञानियों का कहना है कि उल्ल और कंडवा नदियों का पानी पीना तो दूर हाथ धोने लायक भी नहीं रह गया है।
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हरियाली का हो रहा सफाया, कैसे मिले आक्सीजन
जिले में कभी आम के बागों की बहुतायत थी। अब यहां गिनती भर को बाग रह गए हैं। एक अनुमान के मुताबिक हर साल 15 हजार से अधिक पेड़ काटे जा रहे हैं। इमारती लकड़ी वाले पेड़ों के अलावा सबसे ज्यादा आक्सीजन देने वाले पीपल, बरगद, पाकड़ और नीम के पेड़ों का सफाया होता जा रहा है। वायुमंडल को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पेड़ों की कमी पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। इससे जिले में निरंतर हरियाली कम होती जा रही है।

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पॉलीथिन से बंजर हो रही धरती
पॉलीथिन के इस्तेमाल से जिले की धरती बंजर हो रही है। कई शहरों में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लग गया, लेकिन जिले में अब तक इस पर रोक नहीं लग सकी है। पॉलीथिन भूमि के अंदर जाकर जमीन को बंजर बना रही है तो नालियों में जाकर पानी के निकास को रोक रही है।
सबसे ज्यादा प्रदूषण पॉलीथिन से ही हो रहा है।

वाहनों की बढ़ती संख्या एक नजर में
जिले में वाहनों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हर साल बढ़ रहे पंजीकरण से लगाया जा सकता है।
वर्ष 2015-16--------31310
वर्ष 2016-17--------36130
वर्ष 2017-18--------53746
वर्ष 2018-19--------64870
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