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खून की कमी से पीड़ित नवजात, चिल्ड्रन वार्ड में हो रहे भर्ती
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लखीमपुर खीरी। गर्भावस्था में महिलाओं की ओर से खान पान को लेकर बरती गई लापरवाही प्रसव उपरांत नवजात को भारी पड़ रही है। ऐसी स्थिति में नवजात खून की कमी का शिकार हो जाते हैं और फिर उन्हें खून चढ़ाने तक की नौबत आ जाती है। जिला अस्पताल में पिछले 15 दिन में खून की कमी से पीड़ित 14 बच्चे भर्ती हुए, जिसमें से दो की मौत भी गई। गर्भावस्था के दौरान यदि महिलाएं खान पान पर ध्यान दें तो बच्चों को खून की कमी से बचाया जा सकता है।
जिला महिला अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी चौधरी का कहना है कि महिलाओं को चाहिए कि गर्भावस्था की जानकारी लगते ही अस्पताल में अपना पंजीकरण करा लेें, जिससे जरूरी टीके लगने के साथ आवश्यक जांच कराई जा सके। वहीं इन दिनों में खान पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, क्योंकि जब मां स्वस्थ होगी तभी गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ रहेगा। इसलिए खाने में मौसमी फल, हरी सब्जियां, दूध, जूस, मेवे आदि का सेवन करें। वहीं अस्पताल से मिलने वाली आयरन की सौ गोलियों का भी सेवन करें। डॉ. मीनाक्षी चौधरी का कहना है कि अक्सर महिलाएं गर्भावस्था के दौरान खान पान पर ध्यान नहीं देतीं, जिस कारण प्रसव कराने में भी खतरा रहता है और बच्चा भी कमजोर होता है। इससे बच्चे खून की कमी का शिकार हो जाते हैं और फिर उन्हें खून चढ़ाने की नौबत बन जाती है।
गर्भावस्था के समय खान पान का लेकर बरती गई उदासीनता बच्चे के लिए हानिकारक है। जन्म के बाद भी महिलाएं खान पान पर ध्यान नहीं देती। जिस कारण बच्चे एनीमिक होने के साथ अन्य बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक खाना और जन्म के बाद बच्चे को स्तनपान कराकर नवजात को एनीमिक होने के साथ अन्य बीमारियों से बचाया जा सकता है।
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- डॉ. आरपी वर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ
जिला अस्पताल
इतना होना चाहिए हीमोग्लोबिन
हीमोग्लोबिन की सामान्य मात्रा-11.5 से 15.5 ग्राम डेसीलीटर
एनीमिया पीड़ित 13 बच्चे हुए भर्ती, दो की मौत
सात माह की पलक, एक वर्षीय आदर्श, छह माह का शौर्य, एक माह का हुसैन, नौ माह का आदित्य, 12 माह का अंकित, दस माह की आशी, 12 माह के सूरज, चार वर्षीय कंचन, 12 माह की प्राची, चार वर्षीय दिव्या, 12 माह का गोल्डी, ढ़ाई साल की साक्षी। इसमें से सात माह की पलक और चार साल की दिव्या की मौत हो गई।
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जिला महिला अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी चौधरी का कहना है कि महिलाओं को चाहिए कि गर्भावस्था की जानकारी लगते ही अस्पताल में अपना पंजीकरण करा लेें, जिससे जरूरी टीके लगने के साथ आवश्यक जांच कराई जा सके। वहीं इन दिनों में खान पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, क्योंकि जब मां स्वस्थ होगी तभी गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ रहेगा। इसलिए खाने में मौसमी फल, हरी सब्जियां, दूध, जूस, मेवे आदि का सेवन करें। वहीं अस्पताल से मिलने वाली आयरन की सौ गोलियों का भी सेवन करें। डॉ. मीनाक्षी चौधरी का कहना है कि अक्सर महिलाएं गर्भावस्था के दौरान खान पान पर ध्यान नहीं देतीं, जिस कारण प्रसव कराने में भी खतरा रहता है और बच्चा भी कमजोर होता है। इससे बच्चे खून की कमी का शिकार हो जाते हैं और फिर उन्हें खून चढ़ाने की नौबत बन जाती है।
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गर्भावस्था के समय खान पान का लेकर बरती गई उदासीनता बच्चे के लिए हानिकारक है। जन्म के बाद भी महिलाएं खान पान पर ध्यान नहीं देती। जिस कारण बच्चे एनीमिक होने के साथ अन्य बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक खाना और जन्म के बाद बच्चे को स्तनपान कराकर नवजात को एनीमिक होने के साथ अन्य बीमारियों से बचाया जा सकता है।
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- डॉ. आरपी वर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ
जिला अस्पताल
इतना होना चाहिए हीमोग्लोबिन
हीमोग्लोबिन की सामान्य मात्रा-11.5 से 15.5 ग्राम डेसीलीटर
एनीमिया पीड़ित 13 बच्चे हुए भर्ती, दो की मौत
सात माह की पलक, एक वर्षीय आदर्श, छह माह का शौर्य, एक माह का हुसैन, नौ माह का आदित्य, 12 माह का अंकित, दस माह की आशी, 12 माह के सूरज, चार वर्षीय कंचन, 12 माह की प्राची, चार वर्षीय दिव्या, 12 माह का गोल्डी, ढ़ाई साल की साक्षी। इसमें से सात माह की पलक और चार साल की दिव्या की मौत हो गई।