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आंबेडकर पार्क की ढाई बीघा जमीन पर दबंगों का कब्जा
Updated Mon, 09 Apr 2018 12:00 AM IST
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बेलरायां।
ग्राम पंचायत भेड़ौरी के मजरा महाराजनगर स्थित अंबेडकर पार्क की ढाई बीघा जमीन पर कई साल से दबंग काबिज हैं और उस पर खेती कर रहे हैं। ग्रामीणों ने संपूर्ण समाधान और थानों पर होने वाले समाधान दिवस में इसकी कई बार शिकायत की, लेकिन राजस्व कर्मियों की संलिप्तता होने के कारण पार्क की जमीन कब्जा मुक्त नहीं हो पाई। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर पार्क की जमीन से कब्जा हटवाने की मांग की है।
अंबेडकर ग्राम महाराज नगर के लोगों ने बताया कि वर्ष 1995 में प्रदेश में बसपा की सरकार थी। इस दौरान थारू ग्राम महाराजनागर को अंबेडकर ग्राम का दर्जा मिला था। साथ ही आवास, शुद्ध पेयजल, बिजली आंगनबाड़ी केंद्र संचालित कर बुनियादी ढांचा बदलने का काम हुआ। सरकार ने बच्चों और युवाओं के लिए गांव के पड़ोस की करीब ढाई बीघा जमीन अंबेडकर पार्क के लिए आरक्षित कर अभिलेखों में भी दर्ज कर दी गई। आरोप है सरकार बदलने के साथ ही पंचायत के दबंगों ने पार्क की जमीन पर कब्जा कर लिया और खेती करने लगे। इससे पार्क की भूमि का नामोनिशान मिट गया है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। प्रधानपति ध्रुव वर्मा ने बताया कि पार्क की भूमि की जांच लेखपाल से कराई जाएगी। जांच के बाद ही भूमि कब्जे से मुक्त होगी।
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ग्राम पंचायत भेड़ौरी के मजरा महाराजनगर स्थित अंबेडकर पार्क की ढाई बीघा जमीन पर कई साल से दबंग काबिज हैं और उस पर खेती कर रहे हैं। ग्रामीणों ने संपूर्ण समाधान और थानों पर होने वाले समाधान दिवस में इसकी कई बार शिकायत की, लेकिन राजस्व कर्मियों की संलिप्तता होने के कारण पार्क की जमीन कब्जा मुक्त नहीं हो पाई। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर पार्क की जमीन से कब्जा हटवाने की मांग की है।
अंबेडकर ग्राम महाराज नगर के लोगों ने बताया कि वर्ष 1995 में प्रदेश में बसपा की सरकार थी। इस दौरान थारू ग्राम महाराजनागर को अंबेडकर ग्राम का दर्जा मिला था। साथ ही आवास, शुद्ध पेयजल, बिजली आंगनबाड़ी केंद्र संचालित कर बुनियादी ढांचा बदलने का काम हुआ। सरकार ने बच्चों और युवाओं के लिए गांव के पड़ोस की करीब ढाई बीघा जमीन अंबेडकर पार्क के लिए आरक्षित कर अभिलेखों में भी दर्ज कर दी गई। आरोप है सरकार बदलने के साथ ही पंचायत के दबंगों ने पार्क की जमीन पर कब्जा कर लिया और खेती करने लगे। इससे पार्क की भूमि का नामोनिशान मिट गया है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। प्रधानपति ध्रुव वर्मा ने बताया कि पार्क की भूमि की जांच लेखपाल से कराई जाएगी। जांच के बाद ही भूमि कब्जे से मुक्त होगी।
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