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Lakhimpur Kheri News: 14.37 लाख गैस कनेक्शन, ई-केवाईसी न कराने पर त्योहारों से पहले 99,591 निष्क्रिय
Sat, 10 Oct 2026 11:13 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 10 Oct 2026 11:13 PM IST
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लखीमपुर खीरी। त्योहारों से पहले गैस सिलिंडर की आपूर्ति को लेकर जिले के 99,591 उपभोक्ताओं की मुश्किल बढ़ गई है। ई-केवाईसी पूरी न कराने पर उनके कनेक्शन निष्क्रिय कर दिए गए हैं। अब सिलिंडर की आपूर्ति बहाल कराने के लिए उन्हें गैस एजेंसी पर सत्यापन कराना होगा। जिले में 14.37 लाख गैस कनेक्शन हैं और डुप्लीकेट कनेक्शनों की रिफिलिंग पर भी रोक लगाने की तैयारी चल रही है।
जिले में भारत, इंडेन और एचपी की 88 गैस एजेंसियां संचालित हैं। इनमें कुल 14,37,997 गैस कनेक्शन हैं। इनमें 1,012 व्यावसायिक, 9,05,379 घरेलू और 5,31,606 उज्ज्वला योजना के कनेक्शन शामिल हैं।
ई-केवाईसी के दौरान एक ही नाम और आधार पर एक से अधिक गैस कनेक्शन रखने वालों को डुप्लीकेट श्रेणी में रखा गया है। ऐसे कनेक्शनों की रिफिलिंग पर रोक लगाने की तैयारी चल रही है। यदि किसी उपभोक्ता की रिफिलिंग रुकती है तो वह संबंधित गैस एजेंसी पर संपर्क कर जरूरी सुधार करा सकता है।
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ई-केवाईसी कराना अनिवार्य है। कंपनियों के सेल्स मैनेजरों से रोजाना गैस की आपूर्ति, स्टॉक, रिफिलिंग और डिलीवरी की स्थिति की जानकारी ली जा रही है। उपभोक्ता गैस एजेंसी जाकर ई-केवाईसी करा लें, ताकि सिलिंडर मिलने में समस्या न हो।
-सीमा त्रिपाठी, जिला पूर्ति अधिकारी
-- -- -- -- -- -- -- -- -- हर दिन 158 से 160 मीट्रिक टन गैस की खपत
जिले में प्रतिदिन अनुमानित 158 से 160 मीट्रिक टन गैस की खपत होती है। महीने में यह खपत 4,740 से 4,800 मीट्रिक टन तक पहुंच जाती है। त्योहारी सीजन में खपत 10 से 15 प्रतिशत या इससे अधिक बढ़ जाती है। खबर के अनुसार, जिले में गैस की किल्लत नहीं रहती और उपभोक्ताओं को नियमानुसार गैस मिलती है।
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नए कनेक्शन के लिए अभी करिए इंतजार
अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान मार्च-अप्रैल में गैस संकट के चलते नए कनेक्शन जारी करने पर रोक लगा दी गई थी, ताकि मौजूदा उपभोक्ताओं को आपूर्ति मिलती रहे। जानकारी के अनुसार, नए कनेक्शन जारी करने पर अब तक रोक है। इससे नए उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। प्रत्येक गैस एजेंसी पर रोजाना नए कनेक्शन के लिए तीन से चार आवेदन आते हैं।
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ऐसे कराएं ई-केवाईसी
निष्क्रिय कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी के लिए संबंधित गैस एजेंसी जाना होगा। उन्हें आधार कार्ड, गैस कनेक्शन नंबर, उपभोक्ता पुस्तिका और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर साथ ले जाना होगा। एजेंसी संचालक सत्यापन के बाद ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करेंगे। कनेक्शन निष्क्रिय होने के बाद कई उपभोक्ता ई-केवाईसी कराने के लिए एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं।
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जिले में भारत, इंडेन और एचपी की 88 गैस एजेंसियां संचालित हैं। इनमें कुल 14,37,997 गैस कनेक्शन हैं। इनमें 1,012 व्यावसायिक, 9,05,379 घरेलू और 5,31,606 उज्ज्वला योजना के कनेक्शन शामिल हैं।
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ई-केवाईसी के दौरान एक ही नाम और आधार पर एक से अधिक गैस कनेक्शन रखने वालों को डुप्लीकेट श्रेणी में रखा गया है। ऐसे कनेक्शनों की रिफिलिंग पर रोक लगाने की तैयारी चल रही है। यदि किसी उपभोक्ता की रिफिलिंग रुकती है तो वह संबंधित गैस एजेंसी पर संपर्क कर जरूरी सुधार करा सकता है।
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ई-केवाईसी कराना अनिवार्य है। कंपनियों के सेल्स मैनेजरों से रोजाना गैस की आपूर्ति, स्टॉक, रिफिलिंग और डिलीवरी की स्थिति की जानकारी ली जा रही है। उपभोक्ता गैस एजेंसी जाकर ई-केवाईसी करा लें, ताकि सिलिंडर मिलने में समस्या न हो।
-सीमा त्रिपाठी, जिला पूर्ति अधिकारी
जिले में प्रतिदिन अनुमानित 158 से 160 मीट्रिक टन गैस की खपत होती है। महीने में यह खपत 4,740 से 4,800 मीट्रिक टन तक पहुंच जाती है। त्योहारी सीजन में खपत 10 से 15 प्रतिशत या इससे अधिक बढ़ जाती है। खबर के अनुसार, जिले में गैस की किल्लत नहीं रहती और उपभोक्ताओं को नियमानुसार गैस मिलती है।
नए कनेक्शन के लिए अभी करिए इंतजार
अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान मार्च-अप्रैल में गैस संकट के चलते नए कनेक्शन जारी करने पर रोक लगा दी गई थी, ताकि मौजूदा उपभोक्ताओं को आपूर्ति मिलती रहे। जानकारी के अनुसार, नए कनेक्शन जारी करने पर अब तक रोक है। इससे नए उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। प्रत्येक गैस एजेंसी पर रोजाना नए कनेक्शन के लिए तीन से चार आवेदन आते हैं।
ऐसे कराएं ई-केवाईसी
निष्क्रिय कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी के लिए संबंधित गैस एजेंसी जाना होगा। उन्हें आधार कार्ड, गैस कनेक्शन नंबर, उपभोक्ता पुस्तिका और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर साथ ले जाना होगा। एजेंसी संचालक सत्यापन के बाद ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करेंगे। कनेक्शन निष्क्रिय होने के बाद कई उपभोक्ता ई-केवाईसी कराने के लिए एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं।