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चीनी मिल न चलने से पिछड़ रही गेहूं की बुआई
Updated Thu, 29 Nov 2018 12:43 AM IST
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खमरिया। गोविंद शुगर मिल और प्रशासनिक अधिकारियों के ढुलमुल रवैये के चलते गन्ना किसानों की दशा दिन पर दिन खराब होती जा रही है। मिल बंद होने के सात महीने बाद भी गन्ना किसानों का बकाया भुगतान नहीं मिल सका है। इसके अलावा करीब एक महीने से लगातार मिल चलाने की बढ़ रही तारीखों से गन्ना किसानों की गेहूं की बुआई का समय भी निकलता जा रहा है। मिल अधिकारी और जिम्मेदार विभाग भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
खीरी जिले की तहसील धौरहरा का क्षेत्र शारदा और घाघरा के बीच बसा है। यहां किसान मुख्य रूप से गन्ने का उत्पादन करते हैं। पूरे क्षेत्र का आर्थिक ढांचा गन्ने की फसल पर ही टिका है। 2017-18 का पेराई सत्र अप्रैल में बंद होने के करीब सात महीने बीत चुके हैं और 2018-19 का नवीन सत्र शुरू हो गया है। इसके बाद भी किसानों को अपना गन्ना बकाया भुगतान नहीं मिल सका है जिसके कारण किसानों की आर्थिक गणित गड़बड़ा गई है। अभी तक शुगर मिल शुरू भी नहीं हो सकी है। किसानों की गेहूं फसल बुवाई का समय निकला जा रहा है। इन परिस्थितियों में खेत खाली करने और तंगहाली से जूझ रहे गन्ना किसान अपना गन्ना कौड़ियों के भाव क्रेशर और कोल्हू पर बेचने को मजबूर हैं।
मिल अधिकारी पर्यावरण विभाग से एनओसी न मिलने का बहाना बता रहे हैं जबकि लोगों की मानें तो मिल अधिकारियों ने पहले किसानों को परेशान करने की नियत से पर्यावरण विभाग से एनओसी लेने में रुचि नहीं दिखाई। पर्यावरण और सेफ्टी मैनेजर को भी हटा दिया जिसके पीछे मिल अधिकारियों की गन्ना किसानों को परेशान करने की नियत साफ दिखाई दे रही है।
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खीरी जिले की तहसील धौरहरा का क्षेत्र शारदा और घाघरा के बीच बसा है। यहां किसान मुख्य रूप से गन्ने का उत्पादन करते हैं। पूरे क्षेत्र का आर्थिक ढांचा गन्ने की फसल पर ही टिका है। 2017-18 का पेराई सत्र अप्रैल में बंद होने के करीब सात महीने बीत चुके हैं और 2018-19 का नवीन सत्र शुरू हो गया है। इसके बाद भी किसानों को अपना गन्ना बकाया भुगतान नहीं मिल सका है जिसके कारण किसानों की आर्थिक गणित गड़बड़ा गई है। अभी तक शुगर मिल शुरू भी नहीं हो सकी है। किसानों की गेहूं फसल बुवाई का समय निकला जा रहा है। इन परिस्थितियों में खेत खाली करने और तंगहाली से जूझ रहे गन्ना किसान अपना गन्ना कौड़ियों के भाव क्रेशर और कोल्हू पर बेचने को मजबूर हैं।
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मिल अधिकारी पर्यावरण विभाग से एनओसी न मिलने का बहाना बता रहे हैं जबकि लोगों की मानें तो मिल अधिकारियों ने पहले किसानों को परेशान करने की नियत से पर्यावरण विभाग से एनओसी लेने में रुचि नहीं दिखाई। पर्यावरण और सेफ्टी मैनेजर को भी हटा दिया जिसके पीछे मिल अधिकारियों की गन्ना किसानों को परेशान करने की नियत साफ दिखाई दे रही है।
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