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एसटीएफ के हत्थे चढ़े दो अंतरराष्ट्रीय कछुआ तस्कर
Updated Thu, 06 Sep 2018 11:47 PM IST
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एसटीएफ के हत्थे चढ़े दो अंतरराष्ट्रीय कछुआ तस्कर
81 जीवित कछुआ किए बरामद, निघासन से पश्चिम बंगाल ले जा रहे थे
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। एसटीएफ की टीम ने वन विभाग के सहयोग से जिले के दो अंतरराष्ट्रीय कछुआ तस्करों को पकड़ा है। इनके पास से 81 कछुए बरामद हुए हैं। तस्कर इन कछुओं को पश्चिम बंगाल ले जाने की फिराक में थे। यह तस्कर निघासन थाना क्षेत्र के खैराहनी गांव के निवासी हैं। दोनों तस्करों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। तस्करों ने खुलासा किया कि वे यहां से कछुओं को पकड़ने के बाद पश्चिम बंगाल ले जाकर ऊंचे दामों पर बेचते हैं, जहां से यह दूसरे देशों को सप्लाई होते हैं।
लखीमपुर खीरी जिले के निघासन क्षेत्र से कछुए पकड़ कर बेचने के लिए बाहर ले जाने की सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर राजेश त्रिपाठी के नेतृत्व में एसटीएफ टीम ने वन विभाग की टीम के साथ सीतापुर जिले के हरगांव में इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप पर नाकेबंदी की। इसी दौरान मोटर सायकिल से दो बैग लेकर जा रहे दो लोगों को रोक कर उनकी तलाशी ली तो बैग से 81 कछुए बरामद हुए। टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से कछुओं के अलावा एक मोटर साइकिल, एक मोबाइल फोन और एक तस्कर का आधार कार्ड भी बरामद हुआ है।
पकड़े गए तस्करों में धर्मेंद्र कुमार पुत्र रंजीत कंजड़ और चौधरी पुत्र मैकू कंजड़ शामिल हैं। दोनों निघासन थाना क्षेत्र के खैराहनी गांव के निवासी हैं। पूछताछ में धर्मेंद्र कुमार और चौधरी ने बताया कि वे कछुओं को पश्चिम बंगाल ले जाकर ऊंचे दामों पर बेच देते हैं, जहां से बांग्लादेश और म्यांमार के रास्ते चीन, हांगकांग, मलेशिया आदि देशों में भेजा जाता है। इन तस्करों के खिलाफ सामाजिक वानिकी प्रभाग सीतापुर वन रेंज में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है।
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वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की पहल पर एसटीएफ लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह के निर्देश पर एसटीएफ मुख्यालय की एक टीम एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक सत्यसेन के नेतृत्व में वन्यजीव संरक्षण के लिए काम कर रही है। सूचना संकलन के दौरान पता चला कि लखीमपुर खीरी जिले से बड़े स्तर पर विभिन्न प्रजातियों के कछुओं की तस्करी हो रही है। यह भी पता चला कि कछुआ तस्कर माल बेचने के लिए पश्चिम बंगाल के व्यापारियों के संपर्क में रहते हैं।
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इसलिए होती है कछुओं की तस्करी
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि भारत में कछुओं की पाई जाने वाली 29 प्रजातियों में से 15 प्रजातियां उत्तर प्रदेश में पाई जाती हैं। इनमें से 11 प्रजातियों का अवैध व्यापार किया जाता है। यह अवैध व्यापार जीवित कछुए पालने, मांस खाने और कछुए की झिल्ली को सुखाकर शक्तिवर्धक दवा बनाने के लिए किया जाता है। कछुओं को मुलायम कवच और कठोर कवच के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। यमुना, चंबल, गंगा, गोमती, घाघरा, गंडक और उनकी सहायक नदियों तालाबों में दोनों प्रकार के कछुए बहुतायत से पाए जाते हैं। जहां से यह कछुए बांग्लादेश और म्यांमार के रास्ते चीन, हांगकांग, मलेशिया आदि देशों में भेजे जाते हैं। जहां इनकी काफी मांग है।
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81 जीवित कछुआ किए बरामद, निघासन से पश्चिम बंगाल ले जा रहे थे
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। एसटीएफ की टीम ने वन विभाग के सहयोग से जिले के दो अंतरराष्ट्रीय कछुआ तस्करों को पकड़ा है। इनके पास से 81 कछुए बरामद हुए हैं। तस्कर इन कछुओं को पश्चिम बंगाल ले जाने की फिराक में थे। यह तस्कर निघासन थाना क्षेत्र के खैराहनी गांव के निवासी हैं। दोनों तस्करों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। तस्करों ने खुलासा किया कि वे यहां से कछुओं को पकड़ने के बाद पश्चिम बंगाल ले जाकर ऊंचे दामों पर बेचते हैं, जहां से यह दूसरे देशों को सप्लाई होते हैं।
लखीमपुर खीरी जिले के निघासन क्षेत्र से कछुए पकड़ कर बेचने के लिए बाहर ले जाने की सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर राजेश त्रिपाठी के नेतृत्व में एसटीएफ टीम ने वन विभाग की टीम के साथ सीतापुर जिले के हरगांव में इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप पर नाकेबंदी की। इसी दौरान मोटर सायकिल से दो बैग लेकर जा रहे दो लोगों को रोक कर उनकी तलाशी ली तो बैग से 81 कछुए बरामद हुए। टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से कछुओं के अलावा एक मोटर साइकिल, एक मोबाइल फोन और एक तस्कर का आधार कार्ड भी बरामद हुआ है।
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पकड़े गए तस्करों में धर्मेंद्र कुमार पुत्र रंजीत कंजड़ और चौधरी पुत्र मैकू कंजड़ शामिल हैं। दोनों निघासन थाना क्षेत्र के खैराहनी गांव के निवासी हैं। पूछताछ में धर्मेंद्र कुमार और चौधरी ने बताया कि वे कछुओं को पश्चिम बंगाल ले जाकर ऊंचे दामों पर बेच देते हैं, जहां से बांग्लादेश और म्यांमार के रास्ते चीन, हांगकांग, मलेशिया आदि देशों में भेजा जाता है। इन तस्करों के खिलाफ सामाजिक वानिकी प्रभाग सीतापुर वन रेंज में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है।
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वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की पहल पर एसटीएफ लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह के निर्देश पर एसटीएफ मुख्यालय की एक टीम एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक सत्यसेन के नेतृत्व में वन्यजीव संरक्षण के लिए काम कर रही है। सूचना संकलन के दौरान पता चला कि लखीमपुर खीरी जिले से बड़े स्तर पर विभिन्न प्रजातियों के कछुओं की तस्करी हो रही है। यह भी पता चला कि कछुआ तस्कर माल बेचने के लिए पश्चिम बंगाल के व्यापारियों के संपर्क में रहते हैं।
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इसलिए होती है कछुओं की तस्करी
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि भारत में कछुओं की पाई जाने वाली 29 प्रजातियों में से 15 प्रजातियां उत्तर प्रदेश में पाई जाती हैं। इनमें से 11 प्रजातियों का अवैध व्यापार किया जाता है। यह अवैध व्यापार जीवित कछुए पालने, मांस खाने और कछुए की झिल्ली को सुखाकर शक्तिवर्धक दवा बनाने के लिए किया जाता है। कछुओं को मुलायम कवच और कठोर कवच के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। यमुना, चंबल, गंगा, गोमती, घाघरा, गंडक और उनकी सहायक नदियों तालाबों में दोनों प्रकार के कछुए बहुतायत से पाए जाते हैं। जहां से यह कछुए बांग्लादेश और म्यांमार के रास्ते चीन, हांगकांग, मलेशिया आदि देशों में भेजे जाते हैं। जहां इनकी काफी मांग है।