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गांव और घर बने टापू, फसलें पानी में डूबी
Updated Tue, 08 Aug 2017 04:48 PM IST
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लखीमपुर खीरी/महेवागंज। शारदा नदी के उफनाने से बाढ़ का पानी फूलबेहड़ के दर्जनों गावों तक पहुच गया है। आलम यह है जरूरतमंद जान जोखिम में डालकर बाहर आ-जा रहे हैं। गांव और घर टापू बन गए हैं। फसलें डूब गई हैं। रास्तों पर तीन फुट तक तेज धार से पानी बह रहा है। यहां तक कि मवेशियों के चारे तक की किल्लत हो रही है। गांव में एक आध नाव है वो भी ज्यादा वजन ढोने की हालत में नहीं है। प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों को अभी तक कोई मदद नही पहुंचाई गई है।
शारदा नदी के उफनाने से फूलबेहड़ में शारदा बंधे के अंदर बसे बड़ागांव, मेंहदी, बसहाभूड़, बहालीपुरवा, खगईपुरवा, रनडुवा, पांडेयपुरवा, कुचिल्हा, कांशीरामपुरवा, गोपालपुरवा, भुलभुलिया, बेड़हा सुतिया, पिपरा गूम और मंगलीपुरवा समेत दर्जनों गावों में बाढ़ का पानी घुस गया है। गांव के गांव टापू बन गए हैं। लोग ऊंचे स्थानों पर पलायन को मजबूर हैं। ग्रामीणों को राशन पानी तक की किल्लत उठानी पड़ रही है। नावों की समुचित व्यवस्था न होने से जरूरतमंद मजबूरन जान जोखिम में डाल बाढ़ का पानी पार कर रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगों को उठानी पड़ रही है। मवेशियों के चारे तक की किल्लत है। पीड़ितों को अभी तक प्रशासन ने कोई मदद नही पहुंचाई है। इससे ग्रामीणों में गुस्सा है।
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शारदा नदी के उफनाने से फूलबेहड़ में शारदा बंधे के अंदर बसे बड़ागांव, मेंहदी, बसहाभूड़, बहालीपुरवा, खगईपुरवा, रनडुवा, पांडेयपुरवा, कुचिल्हा, कांशीरामपुरवा, गोपालपुरवा, भुलभुलिया, बेड़हा सुतिया, पिपरा गूम और मंगलीपुरवा समेत दर्जनों गावों में बाढ़ का पानी घुस गया है। गांव के गांव टापू बन गए हैं। लोग ऊंचे स्थानों पर पलायन को मजबूर हैं। ग्रामीणों को राशन पानी तक की किल्लत उठानी पड़ रही है। नावों की समुचित व्यवस्था न होने से जरूरतमंद मजबूरन जान जोखिम में डाल बाढ़ का पानी पार कर रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगों को उठानी पड़ रही है। मवेशियों के चारे तक की किल्लत है। पीड़ितों को अभी तक प्रशासन ने कोई मदद नही पहुंचाई है। इससे ग्रामीणों में गुस्सा है।
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