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Lakhimpur Kheri News: चकबंदी की प्रक्रिया से 13 मजदूर बस्तियों पर उजड़ने का खतरा
Sun, 27 Sep 2026 11:31 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 27 Sep 2026 11:31 PM IST
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पलिया विधायक रोमी साहनी को ज्ञापन सौंपते लोग। संवाद
पलियाकलां। ग्राम पंचायत पटिहन में चकबंदी विभाग की कार्रवाई को लेकर विधायक रोमी साहनी ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि चकबंदी के दौरान वर्षों से आबाद मजदूर बस्तियों को गलत तरीके से चक में शामिल कर दिया गया। इससे कई परिवारों के सामने उजड़ने का संकट खड़ा हो गया है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि पटिहन में करीब 42 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। वर्ष 2023 में इसे धारा 52 के तहत तहसील को हस्तांतरित किया गया। ग्राम पंचायत बड़ी होने के कारण मुसाफिरनगर, इंदिरा आवास कॉलोनी, खुशीरपुर, अंबेडकरनगर, देवरी, नयागांव, राजाटापर और अतरनगर समेत करीब 13 मजदूर मजरे हैं। मुसाफिरनगर के कई गाटों पर वर्ष 1985 से लोग बसे हैं। अंबेडकरनगर में करीब 30 वर्षों से विद्यालय भी संचालित है। इंदिरा आवास कॉलोनी के कई गाटों पर भी लंबे समय से आबादी है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि अंतिम अभिलेख तैयार करते समय वर्ष 2021-22 में इन आबाद बस्तियों को चक में शामिल कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि नदी, नाला, बाग, सड़क और आबादी की भूमि को नियमानुसार अलग रखते हुए सीएच-18 में दर्ज किया जाना चाहिए था। कई गाटे आबादी भूमि में दर्ज होने के बावजूद उन पर भी चक बना दिए गए।
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ग्रामीणों ने विधायक रोमी साहनी से मुख्यमंत्री को मामले से अवगत कराने, विभागीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि पटिहन में करीब 42 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। वर्ष 2023 में इसे धारा 52 के तहत तहसील को हस्तांतरित किया गया। ग्राम पंचायत बड़ी होने के कारण मुसाफिरनगर, इंदिरा आवास कॉलोनी, खुशीरपुर, अंबेडकरनगर, देवरी, नयागांव, राजाटापर और अतरनगर समेत करीब 13 मजदूर मजरे हैं। मुसाफिरनगर के कई गाटों पर वर्ष 1985 से लोग बसे हैं। अंबेडकरनगर में करीब 30 वर्षों से विद्यालय भी संचालित है। इंदिरा आवास कॉलोनी के कई गाटों पर भी लंबे समय से आबादी है।
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ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि अंतिम अभिलेख तैयार करते समय वर्ष 2021-22 में इन आबाद बस्तियों को चक में शामिल कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि नदी, नाला, बाग, सड़क और आबादी की भूमि को नियमानुसार अलग रखते हुए सीएच-18 में दर्ज किया जाना चाहिए था। कई गाटे आबादी भूमि में दर्ज होने के बावजूद उन पर भी चक बना दिए गए।
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ग्रामीणों ने विधायक रोमी साहनी से मुख्यमंत्री को मामले से अवगत कराने, विभागीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।