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हाथियों की सेहत को लेकर फिक्रमंद हुए अफसर
Updated Thu, 21 Jun 2018 12:05 AM IST
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हाथियों की सेहत के लिए अफसर हुए फिक्रमंद
एफडी ने तैयार किया केप्टिव एलीफेंट मैनेजमेंट प्लान
अब दुधवा में शुरू होगी हाथियों के भोजन के लिए मेस
हर तीन माह बाद होगी हाथियों के मल, मूत्र, रक्त की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। दुधवा के युवा हाथी बटालिक की मौत के बाद अब पार्क प्रशासन हाथियों की सेहत को लेकर काफी संजीदा नजर आ रहा है। पार्क प्रशासन ने दुधवा नेशनल पार्क के पालतू हाथियों की सेहत की नियमित मॉनीटरिंग कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए पार्क प्रशासन ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को केप्टिव एलीफैंट मैनेजमेंट प्लान तैयार कर भेजा है जिसमें हाथियों के रखरखाव, भोजन, पानी के उचित प्रबंध के साथ ही सेहत की निगरानी के सुझाव शामिल हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि केप्टिव एलीफेंट प्लान में दुधवा के पालतू हाथियों की अलग-अलग फाइल और रजिस्टर बनाने का सुझाव दिया गया है। इसमें हाथियों की पूरी प्रोफाइल, लाइफ हिस्ट्री जैसे, आयु, वजन, लंबाई, उंचाई, स्वास्थ्य की स्थिति, हाथी कब-कब बीमार हुआ और उसे कौन सी दवा दी गई। उसके कार्य व्यवहार, भोजन और सेवा में रहने वाले महावत और अन्य कर्मचारियों का पूरा ब्योरा अंकित किया जाएगा। ताकि बीमार होने की स्थिति में उसकी हेल्थ
हिस्ट्री से इलाज में मदद मिल सके।यही नहीं हाथियों को जंजीर में बांधने में बजाय उन्हें बड़े से स्टील बाड़े में रखने का सुझाव दिया गया है। ताकि वे अपने को बंधन में न महसूस करें और बाड़े में रहने वाले अपने परिवार के साथ मिल जुल सकें। हाथियों के लिए लॉग बुक भी बनाने का सुझाव दिया गया है। इससे हाथी ने दिन में सैलानियों को कितनी बार भ्रमण कराया इसकी जानकारी हो सकेगी। भोजन के लिए एलीफें ट मेस भी शुरू करने का सुझाव दिया गया है। ताकि हाथियों को चारे के साथ पौष्टिक अनाज का भोजन भी उपलब्ध कराया जा सके।
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दुधवा में है मौजूदा समय में हैं 22 पालतू हाथी
दुधवा नेशनल पार्क में मौजूदा समय में दुधवा मूल के 12 और कर्नाटक से आए 10 हाथियों को मिलाकर कुल 22 हाथी हैं। दुधवा में हाथी दो स्थानों पर रखे जा रहे हैं। एक दुधवा और दूसरा सलूकापुर बेस कैंप। जबकि कर्नाटक से आए 10 हाथियों को अभी भीरा स्थित वन निगम के पूर्व डिपो में रखकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
हाथियों के रखरखाव और उनकी सेहत की नियमित निगरानी के लिए केप्टिव एलीफें ट मैनेजमेंट प्लान बनाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को भेजा गया है। इसकी मंजूरी मिलने के बाद हाथियों की और अच्छे ढंग से देखभाल हो सकेगी।
रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
एफडी ने तैयार किया केप्टिव एलीफेंट मैनेजमेंट प्लान
अब दुधवा में शुरू होगी हाथियों के भोजन के लिए मेस
हर तीन माह बाद होगी हाथियों के मल, मूत्र, रक्त की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। दुधवा के युवा हाथी बटालिक की मौत के बाद अब पार्क प्रशासन हाथियों की सेहत को लेकर काफी संजीदा नजर आ रहा है। पार्क प्रशासन ने दुधवा नेशनल पार्क के पालतू हाथियों की सेहत की नियमित मॉनीटरिंग कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए पार्क प्रशासन ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को केप्टिव एलीफैंट मैनेजमेंट प्लान तैयार कर भेजा है जिसमें हाथियों के रखरखाव, भोजन, पानी के उचित प्रबंध के साथ ही सेहत की निगरानी के सुझाव शामिल हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि केप्टिव एलीफेंट प्लान में दुधवा के पालतू हाथियों की अलग-अलग फाइल और रजिस्टर बनाने का सुझाव दिया गया है। इसमें हाथियों की पूरी प्रोफाइल, लाइफ हिस्ट्री जैसे, आयु, वजन, लंबाई, उंचाई, स्वास्थ्य की स्थिति, हाथी कब-कब बीमार हुआ और उसे कौन सी दवा दी गई। उसके कार्य व्यवहार, भोजन और सेवा में रहने वाले महावत और अन्य कर्मचारियों का पूरा ब्योरा अंकित किया जाएगा। ताकि बीमार होने की स्थिति में उसकी हेल्थ
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हिस्ट्री से इलाज में मदद मिल सके।यही नहीं हाथियों को जंजीर में बांधने में बजाय उन्हें बड़े से स्टील बाड़े में रखने का सुझाव दिया गया है। ताकि वे अपने को बंधन में न महसूस करें और बाड़े में रहने वाले अपने परिवार के साथ मिल जुल सकें। हाथियों के लिए लॉग बुक भी बनाने का सुझाव दिया गया है। इससे हाथी ने दिन में सैलानियों को कितनी बार भ्रमण कराया इसकी जानकारी हो सकेगी। भोजन के लिए एलीफें ट मेस भी शुरू करने का सुझाव दिया गया है। ताकि हाथियों को चारे के साथ पौष्टिक अनाज का भोजन भी उपलब्ध कराया जा सके।
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दुधवा में है मौजूदा समय में हैं 22 पालतू हाथी
दुधवा नेशनल पार्क में मौजूदा समय में दुधवा मूल के 12 और कर्नाटक से आए 10 हाथियों को मिलाकर कुल 22 हाथी हैं। दुधवा में हाथी दो स्थानों पर रखे जा रहे हैं। एक दुधवा और दूसरा सलूकापुर बेस कैंप। जबकि कर्नाटक से आए 10 हाथियों को अभी भीरा स्थित वन निगम के पूर्व डिपो में रखकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
हाथियों के रखरखाव और उनकी सेहत की नियमित निगरानी के लिए केप्टिव एलीफें ट मैनेजमेंट प्लान बनाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को भेजा गया है। इसकी मंजूरी मिलने के बाद हाथियों की और अच्छे ढंग से देखभाल हो सकेगी।
रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व