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शिकारी पकड़े जाने के बाद डीटीआर में अलर्ट जारी
Updated Thu, 04 Oct 2018 06:04 PM IST
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शिकारी पकड़े जाने के बाद दुधवा में अलर्ट
शिकारियों से बरामद दांत फॉरेंसिक जांच के लिए वन्यजीव संस्थान देहरादून भेजे गए
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज। पीलीभीत जिले के पूरनपुर वन क्षेत्र और दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) बफरजोन मैलानी रेंज की गढ़ा बीट में शिकारियों के पकड़े जाने के बाद डीटीआर ने अलर्ट जारी कर दिया है। उधर शिकारियों से बरामद दांत एफडी रमेश कुमार पांडे ने फॉरेंसिक जांच के लिए भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून भेजा है, ताकि पता लगाया जा सके कि यह दांत बाघ के हैं या तेंदुआ के। इसके साथ ही वन विभाग पकड़े गए शिकारियों के संपर्क सूत्र खंगालने में जुटा है।
डीटीआर और पीटीआर की संयुक्त टीम ने पीलीभीत के पूरनपुर जंगल की महोफ बीट में पकड़े गए शिकारियों को लेकर बुधवार सुबह भीरा रेंज आई। भीरा रेंज की चक बीट समेत बड़े क्षेत्र में भ्रमण करने के बावजूद यह शिकारी यह बताने में असमर्थ रहे कि उन्होंने किस स्थान पर बाघ का शिकार कर दांत निकाले थे। वन कर्मियों को भी पूरे क्षेत्र में कहीं भी किसी मरे हुए जानवर के चिन्ह या अवशेष नहीं मिले हैं। इससे वन विभाग को विश्वास कि इन शिकारियों ने कहीं और से बाघ या तेंदुए का शिकार किया है और उसके विभिन्न अंग अलग-अलग बेचने का प्रयास कर रहे हैं।
पकड़े गए शिकारी भीरा क्षेत्र के महेशापुर गांव के निवासी हैं। इसमें एक शिकारी के पिता भी बाघ के शिकार के मामले में आरोपी रहा है। डीटीआर प्रशासन को आशंका है कि यह पेशेवर शिकारी मौजूदा समय में भी शिकार और अन्य वन अपराधों में सक्रिय हैं। डीटीआर के डीडी डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि इनके अलावा इसी इलाके के दो अन्य शिकारी भी इसी अपराध में शामिल हैं। जिनकी तलाश में वन विभाग ने मंगलवार कई ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन शिकारी हत्थे नहीं चढ़े।
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मालूम हो कि पीटीआर प्रशासन को करीब 15 दिन पहले बाघ के शिकार की सूचना मिली थी। वनाधिकारी और कर्मचारी इन शिकारियों की सुरागरसी कर ही रहे थे, कि मंगलवार को मुखबिर की सूचना पर इन शिकारियों को पकड़ने में सफलता हासिल की।
वन विभाग अभी तक इन अपराधियों से सच्चाई उगलवाने में नाकाम रहा है। इससे पहले भी शिकार की जो घटनाएं प्रकाश में आईं उनका भी खुलासा अभी तक नहीं हो सका है। अनुुमान लगाया जा रहा है कि शिकारियों के तार अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों से जुड़े हुए हैं। यह शातिर शिकारी वन विभाग को लगातार चकमा दे रहे हैं। जिससे वन विभाग अभी तक अंधेरे में हाथ पांव मार रहा है।
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अंधविश्वाश के चलते बाघ के दांतों की रहती है मांग...
राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य एवं जाने माने वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ वीपी सिंह का कहना है कि लोगों के अंधविश्वास है कि बच्चों के गले में बाघ के दांत की माला पहनाने से बच्चे बहादुर बनते हैं और उन्हें कोई भूत बाधा नहीं लगती है। इसके साथ ही बहुत से लोग शौकिया बाघ के दांतों को सोने या चांदी में मढ़वाकर गले में पहनते हैं। इसके चलते बाघ और तेंदुआ के दांतों की मांग रहती है। जो काफी ऊंची कीमत पर बिकते हैं। इसी के लिए बाघ और तेंदुए के दांतों की तस्करी होती है। इसका कोई औषधीय उपयोग नहीं है।
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पीलीभीत वन विभाग ने पकड़े गए आरोपियों का चालान भेज दिया है। उधर मैलानी रेंज की गढ़ा बीट में पकड़े गए शिकारी को जेल भेज दिया गया है और उसके फरार साथियों की तलाश की जा रही है। शिकारियों की बढ़ती गतिविधियों को देखकर डीटीआर में अलर्ट जारी किया गया है।
- रमेश कुमार पांडे,एफडी, दुधवा नेशनल पार्क।
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शिकारियों से बरामद दांत फॉरेंसिक जांच के लिए वन्यजीव संस्थान देहरादून भेजे गए
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज। पीलीभीत जिले के पूरनपुर वन क्षेत्र और दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) बफरजोन मैलानी रेंज की गढ़ा बीट में शिकारियों के पकड़े जाने के बाद डीटीआर ने अलर्ट जारी कर दिया है। उधर शिकारियों से बरामद दांत एफडी रमेश कुमार पांडे ने फॉरेंसिक जांच के लिए भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून भेजा है, ताकि पता लगाया जा सके कि यह दांत बाघ के हैं या तेंदुआ के। इसके साथ ही वन विभाग पकड़े गए शिकारियों के संपर्क सूत्र खंगालने में जुटा है।
डीटीआर और पीटीआर की संयुक्त टीम ने पीलीभीत के पूरनपुर जंगल की महोफ बीट में पकड़े गए शिकारियों को लेकर बुधवार सुबह भीरा रेंज आई। भीरा रेंज की चक बीट समेत बड़े क्षेत्र में भ्रमण करने के बावजूद यह शिकारी यह बताने में असमर्थ रहे कि उन्होंने किस स्थान पर बाघ का शिकार कर दांत निकाले थे। वन कर्मियों को भी पूरे क्षेत्र में कहीं भी किसी मरे हुए जानवर के चिन्ह या अवशेष नहीं मिले हैं। इससे वन विभाग को विश्वास कि इन शिकारियों ने कहीं और से बाघ या तेंदुए का शिकार किया है और उसके विभिन्न अंग अलग-अलग बेचने का प्रयास कर रहे हैं।
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पकड़े गए शिकारी भीरा क्षेत्र के महेशापुर गांव के निवासी हैं। इसमें एक शिकारी के पिता भी बाघ के शिकार के मामले में आरोपी रहा है। डीटीआर प्रशासन को आशंका है कि यह पेशेवर शिकारी मौजूदा समय में भी शिकार और अन्य वन अपराधों में सक्रिय हैं। डीटीआर के डीडी डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि इनके अलावा इसी इलाके के दो अन्य शिकारी भी इसी अपराध में शामिल हैं। जिनकी तलाश में वन विभाग ने मंगलवार कई ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन शिकारी हत्थे नहीं चढ़े।
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मालूम हो कि पीटीआर प्रशासन को करीब 15 दिन पहले बाघ के शिकार की सूचना मिली थी। वनाधिकारी और कर्मचारी इन शिकारियों की सुरागरसी कर ही रहे थे, कि मंगलवार को मुखबिर की सूचना पर इन शिकारियों को पकड़ने में सफलता हासिल की।
वन विभाग अभी तक इन अपराधियों से सच्चाई उगलवाने में नाकाम रहा है। इससे पहले भी शिकार की जो घटनाएं प्रकाश में आईं उनका भी खुलासा अभी तक नहीं हो सका है। अनुुमान लगाया जा रहा है कि शिकारियों के तार अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों से जुड़े हुए हैं। यह शातिर शिकारी वन विभाग को लगातार चकमा दे रहे हैं। जिससे वन विभाग अभी तक अंधेरे में हाथ पांव मार रहा है।
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अंधविश्वाश के चलते बाघ के दांतों की रहती है मांग...
राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य एवं जाने माने वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ वीपी सिंह का कहना है कि लोगों के अंधविश्वास है कि बच्चों के गले में बाघ के दांत की माला पहनाने से बच्चे बहादुर बनते हैं और उन्हें कोई भूत बाधा नहीं लगती है। इसके साथ ही बहुत से लोग शौकिया बाघ के दांतों को सोने या चांदी में मढ़वाकर गले में पहनते हैं। इसके चलते बाघ और तेंदुआ के दांतों की मांग रहती है। जो काफी ऊंची कीमत पर बिकते हैं। इसी के लिए बाघ और तेंदुए के दांतों की तस्करी होती है। इसका कोई औषधीय उपयोग नहीं है।
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पीलीभीत वन विभाग ने पकड़े गए आरोपियों का चालान भेज दिया है। उधर मैलानी रेंज की गढ़ा बीट में पकड़े गए शिकारी को जेल भेज दिया गया है और उसके फरार साथियों की तलाश की जा रही है। शिकारियों की बढ़ती गतिविधियों को देखकर डीटीआर में अलर्ट जारी किया गया है।
- रमेश कुमार पांडे,एफडी, दुधवा नेशनल पार्क।