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कई एजेंसियों ने किया चेक से भुगतान, कार्रवाई एक पर
Updated Sun, 15 Jul 2018 06:36 PM IST
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कई एजेंसियों ने किया चेक से भुगतान, कार्रवाई सिर्फ एक पर
पीसीएफ के तत्कालीन प्रबंधक समेत पांच पर एफआईआर का मामला
एनसीसीएफ और पीसीयू ने भी किया चेक से भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। सरकारी गेहूं खरीद में नियम विरुद्ध भुगतान करने वालों में पीसीएफ अकेली एजेंसी नहीं है, बल्कि अन्य एजेंसियां पीसीयू, एनसीसीएफ आदि शामिल हैं। इन एजेंसियों ने कई किसानों को आरटीजीएस के बजाय चेक से भुगतान किया है, जो शासनादेश का उल्लघंन है। साथ ही चेक से भुगतान में घोटाले की संभावना जताई गई है, जिसके चलते पीसीएफ के तत्कालीन जिला प्रबंधक प्रभंजन कुमार यादव समेत पांच लोगों के खिलाफ एक सप्ताह पहले 33 करोड़ के गबन के आरोप में सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है।
रबी क्रय वर्ष 2018-19 में आठ सरकारी एजेंसियों खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपी एग्रो, पीसीयू, एसएफसी, कर्मचारी कल्याण निगम, एनसीसीएफ और एफसीआई ने गेहूं खरीद की थी। इसके लिए सभी ने कुल 176 क्रय केन्द्र खोले। लक्ष्य दो लाख 700 मीट्रिक टन के सापेक्ष सभी एजेंसियों ने दो लाख दो हजार 72 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है। इस बार खुले बाजार और क्रय केन्द्रों के मूल्य में करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर रहा, जिससे बिचौलिए काफी सक्रिय रहे। केंद्र प्रभारी, हैंडलिंग ठेकेदार और बिचौलियों ने गठजोड़ करके बड़े पैमाने पर एक दिन में हजारों क्विंटल गेहूं की खरीद कर डाली थी। इसका नतीजा है कि पांच लाख से अधिक किसान होने के बावजूद 28241 किसान ही क्रय केन्द्रों पर गेहूं बेच सके। इस दौरान कुछ लोगों ने गड़बड़ी की आशंका जताते हुए शिकायतें भी की। इसे संज्ञान लेते हुए प्रत्येक केंद्र पर प्रतिदिन 300 क्विंटल गेहूं खरीदने की लिमिट तय की गई थी। सबसे ज्यादा खरीद करने वाले 20 क्रय केन्द्रों की जांच कराई गई। इसमें खुलासा हुआ था कि कई एजेंसियों ने किसानों को आरटीजीएस के बजाय चेक से भुगतान किया जो सवालों के घेरे में आ गया। इस मामले में अभी तक सिर्फ पीसीएफ के तत्कालीन जिला प्रबंधक और चार केंद्र प्रभारियों पर कार्रवाई हुई है, लेकिन अन्य एजेंसियों के खिलाफ अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
घोटालेबाजों पर नरमी बरत रहे अफसर
चेक से भुगतान के मामले में कार्रवाई को लेकर जिले के अफसर शुरुआत से ही संजीदा नहीं दिखे, जिससे गेहूं खरीद में गड़बड़ी होती रही। पीसीएफ के मामले में हुई कार्रवाई में जिले के अफसरों का कोई रोल नहीं रहा, बल्कि इसका श्रेय पीसीएफ के एमडी प्रदीप कुमार उपाध्याय को जाता है। उन्हीं के निर्देश पर यह कार्रवाई हुई। यही वजह है कि अन्य एजेंसियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई और न ही ऐसी कोई संभावना है।
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शासनादेश के बावजूद चेक से भुगतान पर फैला भ्रम
गेहूं खरीद नीति में स्पष्ट तौर पर निर्देश है कि किसानों को सिर्फ आरटीजीएस के माध्यम से ही भुगतान किया जाना है। इसके अलावा अन्य माध्यम से भुगतान नहीं किया जा सकता। फिर भी अधिकारियों ने चेक से भुगतान को लेकर अलग-अलग तरह का भ्रम फैला रखा है। खासकर जिला सहकारी बैंक में आरटीजीएस सुविधा न होने का तर्क देते हुए ऐसे किसानों को चेक से भुगतान को सही बताया जा रहा है।
वर्जन......
गेहूं खरीद में खाद्य विभाग को छोड़कर अन्य एजेंसियों ने चेक से भुगतान किया है। इसमें पीसीएफ के अलावा कई अन्य एजेंसियां शामिल हैं। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे दी गई थी। जिन किसानों के खाते जिला सहकारी बैंक में थे, उन्हें चेक से भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। ऐसी स्थिति में कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारी ही कोई निर्णय ले सकते हैं।
- लालमणि पांडेय, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
पीसीएफ के तत्कालीन प्रबंधक समेत पांच पर एफआईआर का मामला
एनसीसीएफ और पीसीयू ने भी किया चेक से भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। सरकारी गेहूं खरीद में नियम विरुद्ध भुगतान करने वालों में पीसीएफ अकेली एजेंसी नहीं है, बल्कि अन्य एजेंसियां पीसीयू, एनसीसीएफ आदि शामिल हैं। इन एजेंसियों ने कई किसानों को आरटीजीएस के बजाय चेक से भुगतान किया है, जो शासनादेश का उल्लघंन है। साथ ही चेक से भुगतान में घोटाले की संभावना जताई गई है, जिसके चलते पीसीएफ के तत्कालीन जिला प्रबंधक प्रभंजन कुमार यादव समेत पांच लोगों के खिलाफ एक सप्ताह पहले 33 करोड़ के गबन के आरोप में सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है।
रबी क्रय वर्ष 2018-19 में आठ सरकारी एजेंसियों खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपी एग्रो, पीसीयू, एसएफसी, कर्मचारी कल्याण निगम, एनसीसीएफ और एफसीआई ने गेहूं खरीद की थी। इसके लिए सभी ने कुल 176 क्रय केन्द्र खोले। लक्ष्य दो लाख 700 मीट्रिक टन के सापेक्ष सभी एजेंसियों ने दो लाख दो हजार 72 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है। इस बार खुले बाजार और क्रय केन्द्रों के मूल्य में करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर रहा, जिससे बिचौलिए काफी सक्रिय रहे। केंद्र प्रभारी, हैंडलिंग ठेकेदार और बिचौलियों ने गठजोड़ करके बड़े पैमाने पर एक दिन में हजारों क्विंटल गेहूं की खरीद कर डाली थी। इसका नतीजा है कि पांच लाख से अधिक किसान होने के बावजूद 28241 किसान ही क्रय केन्द्रों पर गेहूं बेच सके। इस दौरान कुछ लोगों ने गड़बड़ी की आशंका जताते हुए शिकायतें भी की। इसे संज्ञान लेते हुए प्रत्येक केंद्र पर प्रतिदिन 300 क्विंटल गेहूं खरीदने की लिमिट तय की गई थी। सबसे ज्यादा खरीद करने वाले 20 क्रय केन्द्रों की जांच कराई गई। इसमें खुलासा हुआ था कि कई एजेंसियों ने किसानों को आरटीजीएस के बजाय चेक से भुगतान किया जो सवालों के घेरे में आ गया। इस मामले में अभी तक सिर्फ पीसीएफ के तत्कालीन जिला प्रबंधक और चार केंद्र प्रभारियों पर कार्रवाई हुई है, लेकिन अन्य एजेंसियों के खिलाफ अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
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घोटालेबाजों पर नरमी बरत रहे अफसर
चेक से भुगतान के मामले में कार्रवाई को लेकर जिले के अफसर शुरुआत से ही संजीदा नहीं दिखे, जिससे गेहूं खरीद में गड़बड़ी होती रही। पीसीएफ के मामले में हुई कार्रवाई में जिले के अफसरों का कोई रोल नहीं रहा, बल्कि इसका श्रेय पीसीएफ के एमडी प्रदीप कुमार उपाध्याय को जाता है। उन्हीं के निर्देश पर यह कार्रवाई हुई। यही वजह है कि अन्य एजेंसियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई और न ही ऐसी कोई संभावना है।
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शासनादेश के बावजूद चेक से भुगतान पर फैला भ्रम
गेहूं खरीद नीति में स्पष्ट तौर पर निर्देश है कि किसानों को सिर्फ आरटीजीएस के माध्यम से ही भुगतान किया जाना है। इसके अलावा अन्य माध्यम से भुगतान नहीं किया जा सकता। फिर भी अधिकारियों ने चेक से भुगतान को लेकर अलग-अलग तरह का भ्रम फैला रखा है। खासकर जिला सहकारी बैंक में आरटीजीएस सुविधा न होने का तर्क देते हुए ऐसे किसानों को चेक से भुगतान को सही बताया जा रहा है।
वर्जन......
गेहूं खरीद में खाद्य विभाग को छोड़कर अन्य एजेंसियों ने चेक से भुगतान किया है। इसमें पीसीएफ के अलावा कई अन्य एजेंसियां शामिल हैं। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे दी गई थी। जिन किसानों के खाते जिला सहकारी बैंक में थे, उन्हें चेक से भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। ऐसी स्थिति में कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारी ही कोई निर्णय ले सकते हैं।
- लालमणि पांडेय, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी