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बिजेंद्र सिंह के झाले पर चौथी बार पहुंचा बाघ
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ममरी। मंगलवार की रात मौठीखेड़ा निवासी सरदार विजेंद्र सिंह के झाले में चौथी बार घुस आए बाघ ने वहां बंधे पशुओं पर हमला करने का प्रयास किया, झाला वासियों के आग जलाने, शोर मचाने पर बाघ टहलते हुए जंगल की ओर चला गया। बाघ के चौथी बार झाले में घुसने से क्षेत्र वासियों में दहशत का माहौल है। बाघ के झाले में घुसने, पगचिह्न मिलने की पुष्टि वनकर्मियों ने भी की है।
सरदार विजेंद्र सिंह का झाला वन रेंज मोहम्मदी महेशपुर की देवीपुर बीट के जंगल से एक किमी दूरी पर है, जहां बाघ तीन बार झाले में घुस चुका है। गांव मौठीखेड़ा के ग्रामीणों और झाला वासियों के अनुसार मंगलवार की रात जंगल से निकला बाघ चौथी बार फिर झाले में घुस आया और बाउंड्री के भीतर बंधे पशुओं पर हमला करने का प्रयास करने लगा। कुत्ते के भौंकने, पशुओं के रहकने पर झालावासी जाग गए, जिनके गेट पर खड़े बाघ को देख होश उड़ गए। उन्होंने आननफानन में आग जलाकर शोर मचाया तो बाघ उल्टे पांव चलता हुआ जंगल की ओर चला गया। शोर सुनकर मौठीखेड़ा गांव के तमाम ग्रामीण भी वहां पहुंच गए। उनका कहना है कि घमहाघाट निवासी सरदार लालसिंह के झाले के आसपास गन्ना बाहुल्य एरिया है लेकिन उनके यहां गेहूं की लहलहाती फसल खड़ी है, फिर भी बाघ बार-बार झाले में घुस रहा है जिसकी रोकथाम कराई जानी चाहिए।
सूचना पर पहुंचे फॉरेस्टर रामप्रसाद, वनरक्षक विनीत सिंह, बेचेलाल ने बाघ के झाले में घुसने, गेट पर पगचिह्न मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि वह शिकार के चक्कर में वहां जा पहुंचा होगा जिसकी सूचना अधिकारियों को दे दी गई है। रेंजर मोहम्मद आरिफ का कहना है कि वन कर्मियों और डब्लूडब्लूएफ टीम बाघ की निगरानी में लगा दी गई है, साथ ही वहां कैमरे भी लगे हुए हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से सतर्कता बनाए रखने, पालतू पशु जंगल के पास न ले जाने को कहा है।
सरदार विजेंद्र सिंह का झाला वन रेंज मोहम्मदी महेशपुर की देवीपुर बीट के जंगल से एक किमी दूरी पर है, जहां बाघ तीन बार झाले में घुस चुका है। गांव मौठीखेड़ा के ग्रामीणों और झाला वासियों के अनुसार मंगलवार की रात जंगल से निकला बाघ चौथी बार फिर झाले में घुस आया और बाउंड्री के भीतर बंधे पशुओं पर हमला करने का प्रयास करने लगा। कुत्ते के भौंकने, पशुओं के रहकने पर झालावासी जाग गए, जिनके गेट पर खड़े बाघ को देख होश उड़ गए। उन्होंने आननफानन में आग जलाकर शोर मचाया तो बाघ उल्टे पांव चलता हुआ जंगल की ओर चला गया। शोर सुनकर मौठीखेड़ा गांव के तमाम ग्रामीण भी वहां पहुंच गए। उनका कहना है कि घमहाघाट निवासी सरदार लालसिंह के झाले के आसपास गन्ना बाहुल्य एरिया है लेकिन उनके यहां गेहूं की लहलहाती फसल खड़ी है, फिर भी बाघ बार-बार झाले में घुस रहा है जिसकी रोकथाम कराई जानी चाहिए।
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सूचना पर पहुंचे फॉरेस्टर रामप्रसाद, वनरक्षक विनीत सिंह, बेचेलाल ने बाघ के झाले में घुसने, गेट पर पगचिह्न मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि वह शिकार के चक्कर में वहां जा पहुंचा होगा जिसकी सूचना अधिकारियों को दे दी गई है। रेंजर मोहम्मद आरिफ का कहना है कि वन कर्मियों और डब्लूडब्लूएफ टीम बाघ की निगरानी में लगा दी गई है, साथ ही वहां कैमरे भी लगे हुए हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से सतर्कता बनाए रखने, पालतू पशु जंगल के पास न ले जाने को कहा है।
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