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किसानों के लिए मॉडल मंडी का सपना रहा अधूरा
Updated Fri, 29 Dec 2017 12:08 AM IST
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मंडी
- फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर खीरी।
जिला मुख्यालय स्थित मंडी समिति को मॉडल मंडी के तौर पर विकसित करने का सपना इस वर्ष भी अधूरा रहा है। अप्रैल 2016 में ई-नेम (किसानों के उपज की ऑनलाइन बिक्री) से जुड़ने के साथ ही सरकार ने इसे मॉडल मंडी घोषित किया था। इसके बाद धीरे-धीरे दो साल बीत गए, लेकिन अभी तक मॉडल के तौर पर इसे विकसित नहीं किया जा सका है। मंडी में टूटी सड़कें, क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनें, जर्जर गोदाम और बंद पड़ी कैंटीन लोगों को मुंह चिढ़ा रही है।
लखीमपुर की मंडी में उपज बेचने के लिए पड़ोसी जिले सीतापुर, बहराइच, पीलीभीत आदि से किसान आते हैं। इससे रबी और खरीफ सीजन में भी किसानों व मजदूरों के साथ ही व्यापारियों का मंडी में जमावड़ा रहता है। इसके बावजूद मंडी में पर्याप्त सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। अप्रैल 2016 में मॉडल मंडी की घोषणा होने के बाद हालात में तेजी से सुधार की उम्मीद थी, लेकिन 2017 में भी किसानों, मजदूरों और व्यापारियों को मायूसी मिली है। हालांकि नए वर्ष 2018 में मॉडल मंडी का सपना पूरा होने की उम्मीद है, क्योंकि कार्यदायी संस्था मंडी निर्माण परिषद ने 1.30 करोड़ के कार्यों का टेंडर कराया है। इस धनराशि से चहारदीवारी और अंतरिम नालियों का निर्माण कराया जाएगा। क्षतिग्रस्त सड़क, गोदाम और टिन शेड की मरम्मत कराई जाएगी। नीलामी चबूतरों को भी दुरुस्त किया जाएगा।
मंडी को आदर्श (मॉडल) बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। 1.30 करोड़ के कार्यों के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा टेंडर निकाले जा चुके हैं। 2018 में मंडी की तस्वीर बदल जाएगी।
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संतोष यादव, मंडी सचिव
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जिला मुख्यालय स्थित मंडी समिति को मॉडल मंडी के तौर पर विकसित करने का सपना इस वर्ष भी अधूरा रहा है। अप्रैल 2016 में ई-नेम (किसानों के उपज की ऑनलाइन बिक्री) से जुड़ने के साथ ही सरकार ने इसे मॉडल मंडी घोषित किया था। इसके बाद धीरे-धीरे दो साल बीत गए, लेकिन अभी तक मॉडल के तौर पर इसे विकसित नहीं किया जा सका है। मंडी में टूटी सड़कें, क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनें, जर्जर गोदाम और बंद पड़ी कैंटीन लोगों को मुंह चिढ़ा रही है।
लखीमपुर की मंडी में उपज बेचने के लिए पड़ोसी जिले सीतापुर, बहराइच, पीलीभीत आदि से किसान आते हैं। इससे रबी और खरीफ सीजन में भी किसानों व मजदूरों के साथ ही व्यापारियों का मंडी में जमावड़ा रहता है। इसके बावजूद मंडी में पर्याप्त सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। अप्रैल 2016 में मॉडल मंडी की घोषणा होने के बाद हालात में तेजी से सुधार की उम्मीद थी, लेकिन 2017 में भी किसानों, मजदूरों और व्यापारियों को मायूसी मिली है। हालांकि नए वर्ष 2018 में मॉडल मंडी का सपना पूरा होने की उम्मीद है, क्योंकि कार्यदायी संस्था मंडी निर्माण परिषद ने 1.30 करोड़ के कार्यों का टेंडर कराया है। इस धनराशि से चहारदीवारी और अंतरिम नालियों का निर्माण कराया जाएगा। क्षतिग्रस्त सड़क, गोदाम और टिन शेड की मरम्मत कराई जाएगी। नीलामी चबूतरों को भी दुरुस्त किया जाएगा।
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मंडी को आदर्श (मॉडल) बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। 1.30 करोड़ के कार्यों के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा टेंडर निकाले जा चुके हैं। 2018 में मंडी की तस्वीर बदल जाएगी।
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संतोष यादव, मंडी सचिव