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गांव की बिटिया ने कानपुर में बढ़ाया जिले का मान
Updated Wed, 11 Oct 2017 10:43 PM IST
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लखीमपुर खीरी।
समाज की सबसे बड़ी बीमारी जातिवाद और अशिक्षा है। देश और प्रदेश में बेरोजगारी के कारण अपराध बढ़े और समाज में अनेक प्रकार की विसंगतियां हैं। यदि देश के नेता जातिवाद को छोड़ दें तो अनेक प्रकार की समस्याओं का खुद ब खुद खात्मा हो जाएगा। यह कहना है कि शहर से सटे गांव सलेमपुर कोन निवासी वकील प्रमोद कुमार पटेल की बेटी एकता पटेल का।
एकता ने यह बात लखनऊ से अमर उजाला को सेलफोन पर एक साक्षात्कार के दौरान बताई। एकता पटेल ने छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में अपने जिले का नाम रोशन कर दिखाया। उसने विश्वविद्यालय में न सिर्फ स्वर्ण पदक हासिल किया, बल्कि सर्वश्रेष्ठ छात्रा का खिताब भी उसे ही मिला है। 17 अक्तूबर को विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत समारोह में उसे पांच पदक प्रदान किए जाएंगे।
एकता ने कानपुर स्थित दयानंद एग्लोवैदिक गर्ल्स महाविद्यालय से कला विषय से एमए फाइनल किया है। वह बताती है कि लड़की होने के कारण उसे अपने जिले से बाहर निकलकर पढ़ाई करने में काफी दिक्कत आई, लेकिन उसके भाई वैभव पटेल ने उसे सपोर्ट किया तो परिवार के लोग मान गए और उसने सफलता हासिल की। एक सवाल के जवाब में कहती है कि देश और प्रदेश में लोकतंत्र की स्थापना के लिए विभिन्न पंचायतों के चुनाव होते हैं, लेकिन इनमें जातिवाद का असर दिखाई देता है, जो सबसे खराब लगता है। यदि जातिवाद न हो तो समाज की एक बड़ी बुराई खत्म हो सकती है। वह अपना प्रेरणास्रोत सबसे पहले अपने भाई को मानती है, फिर माता, पिता और गुरुजनों को। बताती है कि पिता प्रमोद कुमार पटेल पेशे से वकील हैं और सिविल कोर्ट लखीमपुर में प्रैक्टिस करते हैं। उसने अपनी सफलता की खबर मां तारा पटेल और पिता को यह खबर सुनाई तो वह खुशी से उछल पड़े। उसकी छोटी बहन प्रिया पटेल और भाई वैभव पटेल भी मेधावी है। प्रिया आर्यकन्या इंटर कॉलेज में कक्षा 11 की छात्रा है तो भाई वैभव लखनऊ यूनिवर्सिटी से कला में स्नातक कर रहा है।
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समाज की सबसे बड़ी बीमारी जातिवाद और अशिक्षा है। देश और प्रदेश में बेरोजगारी के कारण अपराध बढ़े और समाज में अनेक प्रकार की विसंगतियां हैं। यदि देश के नेता जातिवाद को छोड़ दें तो अनेक प्रकार की समस्याओं का खुद ब खुद खात्मा हो जाएगा। यह कहना है कि शहर से सटे गांव सलेमपुर कोन निवासी वकील प्रमोद कुमार पटेल की बेटी एकता पटेल का।
एकता ने यह बात लखनऊ से अमर उजाला को सेलफोन पर एक साक्षात्कार के दौरान बताई। एकता पटेल ने छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में अपने जिले का नाम रोशन कर दिखाया। उसने विश्वविद्यालय में न सिर्फ स्वर्ण पदक हासिल किया, बल्कि सर्वश्रेष्ठ छात्रा का खिताब भी उसे ही मिला है। 17 अक्तूबर को विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत समारोह में उसे पांच पदक प्रदान किए जाएंगे।
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एकता ने कानपुर स्थित दयानंद एग्लोवैदिक गर्ल्स महाविद्यालय से कला विषय से एमए फाइनल किया है। वह बताती है कि लड़की होने के कारण उसे अपने जिले से बाहर निकलकर पढ़ाई करने में काफी दिक्कत आई, लेकिन उसके भाई वैभव पटेल ने उसे सपोर्ट किया तो परिवार के लोग मान गए और उसने सफलता हासिल की। एक सवाल के जवाब में कहती है कि देश और प्रदेश में लोकतंत्र की स्थापना के लिए विभिन्न पंचायतों के चुनाव होते हैं, लेकिन इनमें जातिवाद का असर दिखाई देता है, जो सबसे खराब लगता है। यदि जातिवाद न हो तो समाज की एक बड़ी बुराई खत्म हो सकती है। वह अपना प्रेरणास्रोत सबसे पहले अपने भाई को मानती है, फिर माता, पिता और गुरुजनों को। बताती है कि पिता प्रमोद कुमार पटेल पेशे से वकील हैं और सिविल कोर्ट लखीमपुर में प्रैक्टिस करते हैं। उसने अपनी सफलता की खबर मां तारा पटेल और पिता को यह खबर सुनाई तो वह खुशी से उछल पड़े। उसकी छोटी बहन प्रिया पटेल और भाई वैभव पटेल भी मेधावी है। प्रिया आर्यकन्या इंटर कॉलेज में कक्षा 11 की छात्रा है तो भाई वैभव लखनऊ यूनिवर्सिटी से कला में स्नातक कर रहा है।
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