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चहेतों को बांट दिए 10 करोड़ के काम
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 19 Aug 2015 06:23 PM IST
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राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम में होने वाले 39 विकास कार्यों वाले 10 करोड़ के टेंडर ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) के अधिकारियों ने एक महीने बाद अपने चहेते ठेकेदारों में बांट दिए। इससे गुस्साए अन्य आवेदक ठेकेदारों ने आरईडी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर विरोध जताया। साथ ही डीएम से शिकायत करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विकास भवन स्थित ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के दफ्तर में बुधवार को तमाम ठेकेदार एकत्र थे। विभागीय सूत्रों के अनुसार राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम योजना के 39 कार्यों की निविदा खोली जा रही थी। करीब 10 करोड़ के काम होने हैं, जिसके लिए ठेकेदारों के पक्ष में निविदाएं की गईं। इसी बीच ठेकेदार प्रशांत जायसवाल, शिवकुमार वर्मा, गुड्डू, मनोज पांडेय, योगेश और विवेक आदि ने मनमानी का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया। शोर सुनकर अन्य दफ्तरों से लोग बाहर निकल आए। ठेकेदारों का कहना था कि 15 जुलाई को निविदा पड़नी थी और 16 जुलाई को खुलनी थीं, लेकिन बिना किसी को सूचना दिए एक माह विलंब करके 19 अगस्त को इन्हें खोला गया। उनका यह भी आरोप है कि डाली गई निविदा के कागजों में मनमाने ढंग से ठेकेदारों को अपात्र घोषित कर दिया गया, जबकि राजस्व की हानि करते हुए अपने चहेते ठेकेदारों को काम बांट दिया गया। ठेकेदारों ने उक्त शिकायतों का एक ज्ञापन कलक्ट्रेट जाकर डीएम किंजल सिंह को सौंपा और उनसे कार्रवाई की मांग की। डीएम ने उन्हें जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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वर्षों से जमे हैं कई अवर अभियंता
ठेकेदारों ने डीएम को बताया कि ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में वर्षों से कई अवर अभियंता जमे हैं, जो सेटिंग कराते रहते हैं। उन्होंने डीएम से ऐसे अवर अभियंताओं की जांच कराने की भी मांग उठाई।
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कोट...
39 कार्यों को नियमानुसार पाए गए पात्र ठेकेदारों को सौंपा गया है। अनियमितता का आरोप निराधार हैं।
-जेएस परमार, अधिशाषी अभियंता, आरईडी
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विकास भवन स्थित ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के दफ्तर में बुधवार को तमाम ठेकेदार एकत्र थे। विभागीय सूत्रों के अनुसार राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम योजना के 39 कार्यों की निविदा खोली जा रही थी। करीब 10 करोड़ के काम होने हैं, जिसके लिए ठेकेदारों के पक्ष में निविदाएं की गईं। इसी बीच ठेकेदार प्रशांत जायसवाल, शिवकुमार वर्मा, गुड्डू, मनोज पांडेय, योगेश और विवेक आदि ने मनमानी का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया। शोर सुनकर अन्य दफ्तरों से लोग बाहर निकल आए। ठेकेदारों का कहना था कि 15 जुलाई को निविदा पड़नी थी और 16 जुलाई को खुलनी थीं, लेकिन बिना किसी को सूचना दिए एक माह विलंब करके 19 अगस्त को इन्हें खोला गया। उनका यह भी आरोप है कि डाली गई निविदा के कागजों में मनमाने ढंग से ठेकेदारों को अपात्र घोषित कर दिया गया, जबकि राजस्व की हानि करते हुए अपने चहेते ठेकेदारों को काम बांट दिया गया। ठेकेदारों ने उक्त शिकायतों का एक ज्ञापन कलक्ट्रेट जाकर डीएम किंजल सिंह को सौंपा और उनसे कार्रवाई की मांग की। डीएम ने उन्हें जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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वर्षों से जमे हैं कई अवर अभियंता
ठेकेदारों ने डीएम को बताया कि ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में वर्षों से कई अवर अभियंता जमे हैं, जो सेटिंग कराते रहते हैं। उन्होंने डीएम से ऐसे अवर अभियंताओं की जांच कराने की भी मांग उठाई।
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कोट...
39 कार्यों को नियमानुसार पाए गए पात्र ठेकेदारों को सौंपा गया है। अनियमितता का आरोप निराधार हैं।
-जेएस परमार, अधिशाषी अभियंता, आरईडी