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Kushinagar News: तैयारियां अधूरी, तटवर्ती गांववालों को सताने लगा बाढ़ का डर
Thu, 22 Jun 2023 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 22 Jun 2023 12:00 AM IST
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बरवापट्टी ठोकर पर चल रहे परियोजनाओं की निर्माण कार्य।संवाद
एपी, छितौनी पिपरासी और अमवा खास तटबंध पर चल रहा कार्य अधूरा
- बारिश के बाद तटवर्ती गांववालों को सताने लगा बाढ़ का खतरा
- बीस करोड़ की स्वीकृत परियोजनाओं पर अभी चल रहा कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। बाढ़ आई तो जिले में तबाही मचनी तय है। अभी तक गंडक नदी के तटबंधों पर चल रहे कार्यों को पूरा तक नहीं किया गया है। इसकी वजह से तटवर्ती गांववालों को बाढ़ का भय सता रहा है। बरसात शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी एपी, छितौनी पिपरासी (सीपी) और अमवा खास तटबंध पर करीब बीस करोड़ की लागत से बोल्डर, सोलिंग और रेनकट भरने का कार्य चल रहा है।
नेपाल सेे कुशीनगर को जोड़ने वाली गंडक नदी जनपद के तटवर्ती गांवों में हर साल तबाही मचाती है। इसके नरवाजोत तटबंध के ठोकर (स्पर) 1.000 पर 3.30 करोड़, घघवा जगदीश के सामने एपी तटबंध के 2.400 पर 4.05 करोड़, जवही दयाल में एपी तटबंध के 3.300 पर 4.90 करोड़ और बाकखास में एपी तटबंध के किलोमीटर 9.600 पर ठोकर की पुनर्स्थापना व परक्यूपाइन लगाने के लिए 2.45 करोड़ की लागत से बोल्डर, सोलिंग और रेनकटों को भरने का कार्य चल रहा है।
खड्डा क्षेत्र के 14.400 किलोमीटर पर छितौनी तटबंध में बने चूहे की मांद और रेन कट को अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है। तटबंध के दाहिने तरफ बनाए गए प्लेटफार्म की जमीन पर गांववाले खेती कर रहे हैं। इसकी वजह से तटबंध कमजोर हो गया है। तटबंध के 6.800 से 8.00 किमी तक ठोकर की मिट्टी रेनकट की वजह से बह गई है। बीरभार ठोकर समेत पांच स्थानों पर तटबंध कमजोर हैं। यहां पानी का अधिक दबाव रहता है। बोत्डर और पैचिंग कार्य के लिए करीब तीन करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। अभी तक छितौनी तटबंध पर बने रेनकट को ठीक नहीं किया गया है।
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अमवा खास तटबंध पर पांच करोड़ की लागत से पिच होना है, लेकिन अभी बाढ़ खंड विभाग इसका सर्वे करा रहा है। तीनों तटबंधों पर करीब बीस करोड़ की लागत से आठ परियोजनाएं स्वीकृत हैं। उनका कार्य काफी विलंब से शुरू हुआ है, जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
काम नहीं पकड़ पा रही गति
तीनों तटबंधों पर मार्च माह में बाढ़ से बचाव के लिए कार्य शुरू हुआ, लेकिन अभी तक कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। 15 जून तक कार्य पूरा करना था। इसकी वजह विभागीय लापरवाही बताई जा रही है। गंडक नदी का जलस्तर अभी बढ़ नहीं रहा है। छितौनी तटबंध पर तो बिना रेनकट भरे सरकारी धन का भुगतान कर लिया गया है।
गांववालों ने लगाया लापरवाही का आरोप
एपी तटबंध काफी संवेदनशील माना जाता है। इसे लेकर जिले के आला अफसर भी गंभीर रहते हैं। बावजूद अभी तक बाढ़ से बचाव और कटान रोकने के लिए चल रहे कार्यों को पूरा नहीं किया जा सका है। इस तटबंध पर जेई चंद्रप्रकाश, रमेशधर दुबे और सुनील कुमार यादव की ड्यूटी लगाई गई है। इसके बावजूद काम में तेजी नहीं आ रही है। इसकी शिकायत कई बार गांव वाले बाढ़ खंड विभाग के कार्यालय में कर चुके हैं।एपी, छितौनी और अमवा खास तटबंध के किनारे करीब 400 से अधिक गांव बसे हैं। तटवर्ती गांव के पुजारी सिंह, प्रभुनाथ यादव, प्रदीप सिंह, ध्रुव निषाद, ओमप्रकाश निषाद, बृजकिशोर साहनी, संजय सिंह, दीनानाथ सिंह का कहना है कि नेपाल की पहाड़ियों पर बारिश होने पर गंडक नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाता है। इससे बाढ़ आने की ज्यादा आशंका रहती है। इसलिए तय समय पर परियोजना को पूरा कर लेना चाहिए। तटबंध के संवेदनशील स्थानों पर कटान रोकने का पुख्ता इंतजाम की मांग की है।
छितौनी तटबंध पर नहीं भरे गए रेनकट
छितौनी तटबंध के किनारे बसे हरिशंकर सिंह, प्रेमलाल यादव, दिलीप मोदनवाल, रामसूरत, आनंद सिंह, भूपेंद्र तिवारी का आरोप है कि तटबंध पर बने गड्ढे, रेनकट और चूहों के बिलाें को अभी तक नहीं भरा गया है। इसकी शिकायत कई बार एसडीओ मनोरंजन चौधरी से किया जा चुका है, लेकिन विभागीय जिम्मेदार बजट की कमी का रोना रो रहे हैं।
वर्जन
गंडक नदी पर चल रहे मरम्मत कार्य अंतिम चरण में हैं। बाढ़ से बचाव का पुख्ता इंतजाम कर लिया गया है। अभी पानी गंडक नदी में कम है। 14 बाढ़ समितियों का गठन किया गया है। इनके माध्यम से तटबंधों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी ली जाती है। बचे हुए कटान स्थलों पर भी ठोकर बनवाया जा रहा है। छितौनी तटबंध पर अगर रेनकट है तो उसकी जांच करा ली जाएगी।
-महेश कुमार सिंह, एक्सईएन, बाढ़ खंड
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- बारिश के बाद तटवर्ती गांववालों को सताने लगा बाढ़ का खतरा
- बीस करोड़ की स्वीकृत परियोजनाओं पर अभी चल रहा कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। बाढ़ आई तो जिले में तबाही मचनी तय है। अभी तक गंडक नदी के तटबंधों पर चल रहे कार्यों को पूरा तक नहीं किया गया है। इसकी वजह से तटवर्ती गांववालों को बाढ़ का भय सता रहा है। बरसात शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी एपी, छितौनी पिपरासी (सीपी) और अमवा खास तटबंध पर करीब बीस करोड़ की लागत से बोल्डर, सोलिंग और रेनकट भरने का कार्य चल रहा है।
नेपाल सेे कुशीनगर को जोड़ने वाली गंडक नदी जनपद के तटवर्ती गांवों में हर साल तबाही मचाती है। इसके नरवाजोत तटबंध के ठोकर (स्पर) 1.000 पर 3.30 करोड़, घघवा जगदीश के सामने एपी तटबंध के 2.400 पर 4.05 करोड़, जवही दयाल में एपी तटबंध के 3.300 पर 4.90 करोड़ और बाकखास में एपी तटबंध के किलोमीटर 9.600 पर ठोकर की पुनर्स्थापना व परक्यूपाइन लगाने के लिए 2.45 करोड़ की लागत से बोल्डर, सोलिंग और रेनकटों को भरने का कार्य चल रहा है।
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खड्डा क्षेत्र के 14.400 किलोमीटर पर छितौनी तटबंध में बने चूहे की मांद और रेन कट को अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है। तटबंध के दाहिने तरफ बनाए गए प्लेटफार्म की जमीन पर गांववाले खेती कर रहे हैं। इसकी वजह से तटबंध कमजोर हो गया है। तटबंध के 6.800 से 8.00 किमी तक ठोकर की मिट्टी रेनकट की वजह से बह गई है। बीरभार ठोकर समेत पांच स्थानों पर तटबंध कमजोर हैं। यहां पानी का अधिक दबाव रहता है। बोत्डर और पैचिंग कार्य के लिए करीब तीन करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। अभी तक छितौनी तटबंध पर बने रेनकट को ठीक नहीं किया गया है।
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अमवा खास तटबंध पर पांच करोड़ की लागत से पिच होना है, लेकिन अभी बाढ़ खंड विभाग इसका सर्वे करा रहा है। तीनों तटबंधों पर करीब बीस करोड़ की लागत से आठ परियोजनाएं स्वीकृत हैं। उनका कार्य काफी विलंब से शुरू हुआ है, जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
काम नहीं पकड़ पा रही गति
तीनों तटबंधों पर मार्च माह में बाढ़ से बचाव के लिए कार्य शुरू हुआ, लेकिन अभी तक कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। 15 जून तक कार्य पूरा करना था। इसकी वजह विभागीय लापरवाही बताई जा रही है। गंडक नदी का जलस्तर अभी बढ़ नहीं रहा है। छितौनी तटबंध पर तो बिना रेनकट भरे सरकारी धन का भुगतान कर लिया गया है।
गांववालों ने लगाया लापरवाही का आरोप
एपी तटबंध काफी संवेदनशील माना जाता है। इसे लेकर जिले के आला अफसर भी गंभीर रहते हैं। बावजूद अभी तक बाढ़ से बचाव और कटान रोकने के लिए चल रहे कार्यों को पूरा नहीं किया जा सका है। इस तटबंध पर जेई चंद्रप्रकाश, रमेशधर दुबे और सुनील कुमार यादव की ड्यूटी लगाई गई है। इसके बावजूद काम में तेजी नहीं आ रही है। इसकी शिकायत कई बार गांव वाले बाढ़ खंड विभाग के कार्यालय में कर चुके हैं।एपी, छितौनी और अमवा खास तटबंध के किनारे करीब 400 से अधिक गांव बसे हैं। तटवर्ती गांव के पुजारी सिंह, प्रभुनाथ यादव, प्रदीप सिंह, ध्रुव निषाद, ओमप्रकाश निषाद, बृजकिशोर साहनी, संजय सिंह, दीनानाथ सिंह का कहना है कि नेपाल की पहाड़ियों पर बारिश होने पर गंडक नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाता है। इससे बाढ़ आने की ज्यादा आशंका रहती है। इसलिए तय समय पर परियोजना को पूरा कर लेना चाहिए। तटबंध के संवेदनशील स्थानों पर कटान रोकने का पुख्ता इंतजाम की मांग की है।
छितौनी तटबंध पर नहीं भरे गए रेनकट
छितौनी तटबंध के किनारे बसे हरिशंकर सिंह, प्रेमलाल यादव, दिलीप मोदनवाल, रामसूरत, आनंद सिंह, भूपेंद्र तिवारी का आरोप है कि तटबंध पर बने गड्ढे, रेनकट और चूहों के बिलाें को अभी तक नहीं भरा गया है। इसकी शिकायत कई बार एसडीओ मनोरंजन चौधरी से किया जा चुका है, लेकिन विभागीय जिम्मेदार बजट की कमी का रोना रो रहे हैं।
वर्जन
गंडक नदी पर चल रहे मरम्मत कार्य अंतिम चरण में हैं। बाढ़ से बचाव का पुख्ता इंतजाम कर लिया गया है। अभी पानी गंडक नदी में कम है। 14 बाढ़ समितियों का गठन किया गया है। इनके माध्यम से तटबंधों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी ली जाती है। बचे हुए कटान स्थलों पर भी ठोकर बनवाया जा रहा है। छितौनी तटबंध पर अगर रेनकट है तो उसकी जांच करा ली जाएगी।
-महेश कुमार सिंह, एक्सईएन, बाढ़ खंड