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Kushinagar News: 659 जमीनों पर वक्फ बोर्ड का दावा
Tue, 14 Jan 2025 12:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 14 Jan 2025 12:28 AM IST
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पडरौना। वक्फ बोर्ड जिले की 659 जमीनों पर दावा कर रहा है। इसमें से अधिकांश जमीनों पर मकान और दुकान के अलावा मदरसा, ईदगाह, कर्बला, कब्रिस्तान और मस्जिद बने हैं।
लेकिन वक्फ बोर्ड की जमीनों की जांच हुई तो 15 से 20 जमीनों को छोड़ शेष जमीनें राजस्व अभिलेख में वक्फ दर्ज होने से पूर्व सरकारी जमीन निकली। जांच में यही पता चला कि कई जमीनों के कागजात में छेड़छाड़ भी की गई। कहीं कब्रिस्तान तो कहीं मस्जिद और दरगाह की जमीनों पर कब्जा कर लिया गया। यही नहीं, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में इन संपत्तियों का पूरा ब्यौरा ही नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ दिन पूर्व वक्फ की जमीनों पर कब्जा करने वालों से जमीन वापस लेने संबंधित बयान दिया था। इसके बाद शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए शासन के निर्देश पर प्रशासन वक्फ की संपत्तियों का नए सिरे से सर्वे कराना शुरू कर दिया। सभी तहसीलों से आराजी नंबर और जमीनों के क्षेत्रफल समेत रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन ने 1985 में वक्फ की जमीनों का सर्वेक्षण कराया था। उस सर्वे में उपयोग के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड के में कब्रिस्तान, मस्जिद, मदरसा आदि दर्ज कर दिया गया।
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वक्फ बोर्ड की तरफ से जिन जमीनों पर दावा किया जा रहा है, उसमें से 15 से 20 जमीनों को छोड़कर शेष जमीनें राजस्व के अभिलेख में आज भी ईदगाह, कर्बला मदरसा, मस्जिद और कब्रिस्तान ही दर्ज है। पडरौना शहर में भी इस तरह की करीब दस जमीन है। वक्फ ने पडरौना तहसील की करीब दो सौ जमीनों पर अपना बता रही है। जब राजस्व रिकार्ड खंगाला गया तो उसमें आबादी व चक रोड की एक-एक जमीन मिली। इस तरह बंजर की पांच और नाली की पांच जमीन पर वक्फ का दावा मिला। प्रशासन की जांच में पाया कि वक्फ की संपत्ति जिले में 15 से 20 जगह ही है।
किसे कहते हैं वक्फ की जमीन : किसी वक्फ कर्ता (वाकिफ) की ओर से अपनी निजी संपत्ति की वक्फ (अल्लाह के नाम) कर सकता है। यानी वक्फ करने की पहली शर्त है कि वह शख्स जो वक्फ कर रहा है, वह संपत्ति उस व्यक्ति के नाम पर होनी चाहिए।ा
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लेकिन वक्फ बोर्ड की जमीनों की जांच हुई तो 15 से 20 जमीनों को छोड़ शेष जमीनें राजस्व अभिलेख में वक्फ दर्ज होने से पूर्व सरकारी जमीन निकली। जांच में यही पता चला कि कई जमीनों के कागजात में छेड़छाड़ भी की गई। कहीं कब्रिस्तान तो कहीं मस्जिद और दरगाह की जमीनों पर कब्जा कर लिया गया। यही नहीं, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में इन संपत्तियों का पूरा ब्यौरा ही नहीं है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ दिन पूर्व वक्फ की जमीनों पर कब्जा करने वालों से जमीन वापस लेने संबंधित बयान दिया था। इसके बाद शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए शासन के निर्देश पर प्रशासन वक्फ की संपत्तियों का नए सिरे से सर्वे कराना शुरू कर दिया। सभी तहसीलों से आराजी नंबर और जमीनों के क्षेत्रफल समेत रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन ने 1985 में वक्फ की जमीनों का सर्वेक्षण कराया था। उस सर्वे में उपयोग के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड के में कब्रिस्तान, मस्जिद, मदरसा आदि दर्ज कर दिया गया।
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वक्फ बोर्ड की तरफ से जिन जमीनों पर दावा किया जा रहा है, उसमें से 15 से 20 जमीनों को छोड़कर शेष जमीनें राजस्व के अभिलेख में आज भी ईदगाह, कर्बला मदरसा, मस्जिद और कब्रिस्तान ही दर्ज है। पडरौना शहर में भी इस तरह की करीब दस जमीन है। वक्फ ने पडरौना तहसील की करीब दो सौ जमीनों पर अपना बता रही है। जब राजस्व रिकार्ड खंगाला गया तो उसमें आबादी व चक रोड की एक-एक जमीन मिली। इस तरह बंजर की पांच और नाली की पांच जमीन पर वक्फ का दावा मिला। प्रशासन की जांच में पाया कि वक्फ की संपत्ति जिले में 15 से 20 जगह ही है।
किसे कहते हैं वक्फ की जमीन : किसी वक्फ कर्ता (वाकिफ) की ओर से अपनी निजी संपत्ति की वक्फ (अल्लाह के नाम) कर सकता है। यानी वक्फ करने की पहली शर्त है कि वह शख्स जो वक्फ कर रहा है, वह संपत्ति उस व्यक्ति के नाम पर होनी चाहिए।ा