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जिले में फिर सूखी 16 हजार हेक्टेयर गन्ना की फसल

Mon, 11 Oct 2021 10:12 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 11 Oct 2021 10:12 PM IST
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Then dry 16 thousand hectares of sugarcane crop
फिर सूखी 16 हजार हेक्टेयर गन्ना की फसल
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गन्ना किसानों के लिए इस साल भी हुई आफत की बारिश
इस साल गन्ने के क्षेत्रफल में हुई चार हजार हेक्टेयर की कमी
जिस प्रजाति को सुझाया गया, उसमें भी लगा रोग
राकेश कुमार गौंड़
कुशीनगर। पिछले दो साल से हो रही आफत की बारिश ने गन्ना किसानों को कहीं का नहीं छोड़ा है। इस साल भी अब तक 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोयी गई गन्ने की फसल सूख चुकी है, जबकि लगभग पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल का गन्ना अभी सूखने के कगार पर है। अत्यधिक बारिश के चलते पिछले वर्ष के मुकाबले गन्ने के क्षेत्रफल में चार हजार की कमी आई है।
करीब चार वर्ष पहले को. 0238 प्रजाति की गन्ने की बुआई से उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव हुआ। चीनी का परता अधिक होने से चीनी मिलें इसे प्रोत्साहित करती थीं। लेकिन दो वर्षों से हो रही अत्यधिक बारिश से यह प्रजाति रोगग्रस्त हो गई। गन्ना विभाग की मानी जाए तो पिछले पेराई सत्र में 91117 हेक्टेयर में गन्ना का उत्पादन हुआ था, जिसमें 9330 हेक्टेयर गन्ना सूख गया था। वहीं मौजूदा पेराई सत्र में गन्ना का क्षेत्रफल घटकर 87519 हेक्टेयर पर आ गया है। इसमें से अब तक 16 हजार हेक्टेयर में गन्ना की फसल सूख गई है। जबकि लगभग पांच हजार हेक्टेयर फसल में जलभराव है। उसके भी सूखने की आशंका है। संवाद
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इस साल जनपद में हुई गन्ना की खेती-
किसानों की संख्या- 221973
गन्ना की खेती वाले गांवों की संख्या-1570
गन्ना की खेती- 47231 हेक्टेयर
पेड़ी गन्ना की खेती- 40288 हेक्टेयर
कुल गन्ना की खेती का क्षेत्रफल- 87519
11 वर्षों में हुई बारिश
वर्ष- बारिश (मिलीमीटर में)
2010- 1064.20
2011- 533.88
2012- 494.50
2013- 199.50
2014- 104.56
2015- 115.00
2016- 373.25
2017- 283.25
2018- 228.75
2019- 547.31
2020- 493.43
2021- 2000.00 से अधिक
किसान बोले
सदर तहसील क्षेत्र के पड़रही गांव के किसान राजकिशोर ने बताया कि उन्होंने इस साल एक एकड़ खेत में गन्ना लगाया था, लेकिन बारिश के कारण पूरी फसल रोगग्रस्त हो गई। इस वजह से पूरी फसल नष्ट हो गई। खेती ही जीविकोपार्जन का आधार है।
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तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के पिपराघाट एहतमाली गांव के किसान अनिल यादव ने बताया कि इस साल दो एकड़ गन्ने की खेती की थी, लेकिन अत्यधिक बारिश के कारण खेत में पानी भर गया, जिससे पूरी फसल सूख गई। पूरी पूंजी डूब गई है।
जिसे प्रोत्साहन दिया गया, वह भी निकला रोगग्रस्त
डीसीओ के मुताबिक गन्ना की सर्वाधिक उपज देने वाली कोयंबटूर 0238 में रेडरॉट रोग लग जाने के कारण उसे अस्वीकृत कर दिया गया। उसकी जगह चीनी मिलों और गन्ना विशेषज्ञों की तरफ से को. 118, को.शा. 8272, को.लख.14235 और 15023 प्रजातियों की बुवाई के लिए किसानों को प्रेरित किया गया। हाटा, सेवरही और रामकोला चीनी मिल इन्हें हरियाणा के शोध संस्थानों से मंगाई थीं, लेकिन इनमें भी को. 118 अत्यधिक जलभराव के चलते रोगग्रस्त पाई गई है।

गन्ने की फसल पर सर्वाधिक नुकसान अत्यधिक बारिश और उसकी वजह से खेतों में जलभराव से हुआ है। इस महीने की शुरुआत में दो दिन में ही 250 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस साल 2000 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई है। इस साल अब तक 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना सूख चुका है, जबकि खेतों में पानी भरा होने के कारण पांच हजार हेक्टेयर गन्ना अभी भी सूखने के कगार पर है।
- वेदप्रकाश सिंह, डीसीओ
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