कुशीनगर का हाल: जिस पटरी पर दौड़ाई जानी थी ट्रेन, उस पर दौड़ाने लगे टेंपो
रेलवे लाइन पर छितौनी और जटहां बाजार, मधुबनी, खैरा टोला, धनहा और पिपरही में रेलवे स्टेशन बनाने की योजना थी। इसमें छितौनी में रेलवे स्टेशन का भवन भी बना दिया गया। लोगों का कहना है कि पूरी रेल लाइन पर 10 बड़े पुल और 47 पुलों का निर्माण प्रस्तावित था।
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कुशीनगर जिले और बिहार के बीच बनने वाली तमकुहीरोड-छितौनी रेल परियोजना 15 साल बाद भी अधूरी है। इस योजना के तहत करीब चार किलोमीटर तक रेलवे लाइन बिछाकर छितौनी में स्टेशन का निर्माण करा दिया गया है। निर्माण पूरा नहीं हुआ। जिस पटरी का निर्माण हुआ है, वहां टेंपो खड़े किए जाते हैं। सांसद विजय दुबे ने कहा कि इस परियोजना को पूरा कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है। तीन सितंबर को वाराणसी में पूर्वोत्तर रेलवे के जीएम सहित अन्य अधिकारियों की बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी। कहा कि केंद्रीय रेल मंत्री से मिलकर इस बारे में आवश्यक कार्रवाई की मांग की जाएगी।
क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, 20 फरवरी 2007 को तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने गंडक प्रभावित इलाकों में आवागमन की सुविधा के लिए तमकुहीरोड-छितौनी रेल परियोजना की आधारशिला रखी थी। करीब 62.5 किलोमीटर लंबी लाइन एक तरफ से गोरखपुर-नरकटियागंज रेल मार्ग तो दूसरी ओर से कप्तानगंज-थावे रेल मार्ग से जाकर जुड़ती। इससे जिले के चार ब्लॉक दुदही, सेवरही, खड्डा और विशुनपुरा के साथ बिहार के गोपालगंज के मधुबनी भितहां, ठकरहां और पिपरासी के लोगों को फायदा मिलता। लोगों का आवागमन आसान हो जाता।
इस दौरान इस रेलवे लाइन पर छितौनी और जटहां बाजार, मधुबनी, खैरा टोला, धनहा और पिपरही में रेलवे स्टेशन बनाने की योजना थी। इसमें छितौनी में रेलवे स्टेशन का भवन भी बना दिया गया। लोगों का कहना है कि पूरी रेल लाइन पर 10 बड़े पुल और 47 पुलों का निर्माण प्रस्तावित था।
सांसद विजय दुबे ने कहा कि छितौनी-तमकुही रेल परियोजना को पूरा कराने के लिए केंद्रीय रेल मंत्री को पत्र दिया जाएगा। तीन सितंबर को वाराणसी में पूर्वोत्तर रेलवे के जीएम सहित अन्य अधिकारियों की बैठक है। उसमें इस मामले को उठाया जाएगा।
इस तरह से शुरू हुई परियोजना
- छितौनी-तमकुही रेल परियोजना का शिलान्यास 20 फरवरी वर्ष 2007 में हुआ।
- तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद ने छितौनी इंटर कॉलेज मैदान में इसका शिलान्यास किया।
- परियोजना के लिए कुुल लागत 269.78 करोड़ रुपये थी, जिनमें करीब 103.31 करोड़ खर्च हो चुके हैं।
- पनियहवा से छितौनी तक रेल लाइन का निर्माण होने पर छितौनी तक ट्रेन चलाकर ट्रायल किया गया।
- सांसद विजय दुबे इस रेल परियोजना को पूरी कराने की मांग संसद में उठा चुके हैं।
रेल परियोजना पूरी होने से मिलेगा यह लाभ
लोगों का कहना है कि इस परियोजना के पूरा होने से जहां लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी, वहीं, खड्डा तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के अलावा बिहार के मंझरिया, सेमरा लबदहिया सहित अन्य जगहों के लोगों को भी राहत मिलती। रेलवे लाइन बिछाने के लिए बनने वाले बांध से एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ की समस्या का समाधान हो सकेगा।