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Kushinagar News: जलस्तर चेतावनी बिंदु से दो सेमी नीचे, तटबंध पर दबाव
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पड़रौना वन क्षेत्र में रोआरी गांव के समीप मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के किनारे लेटा घड़ियाल।संवाद
खड्डा। गंडक नदी का जलस्तर सोमवार को चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया। शाम चार बजे भैंसहा गेज पर नदी का जलस्तर 94.98 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी बिंदु से महज दो सेंटीमीटर नीचे है। सुबह आठ बजे जलस्तर 94.85 मीटर था, जो चेतावनी बिंदु से 15 सेंटीमीटर नीचे रहा। जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ छितौनी तटबंध के संवेदनशील ठोकरों पर नदी का दबाव भी बना हुआ है।
वाल्मीकि गंडक बैराज से सोमवार सुबह छह बजे नदी में 1.19 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। सुबह सात से 11 बजे तक डिस्चार्ज 1.21 लाख क्यूसेक रहा। दोपहर 12 बजे 1.19 लाख क्यूसेक और दोपहर एक बजे से शाम चार बजे तक 1.14 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। डिस्चार्ज में कमी के बावजूद छितौनी तटबंध के किलोमीटर 4.180 और 5.180 पर स्थित ठोकर संख्या दो और तीन तथा किलोमीटर 12.700 के बीरभार ठोकर पर नदी का दबाव बरकरार है।
नेपाल में हुई त्रासदी के बाद गंडक नदी में मलबा और गाद आने से पानी दूषित हो गया था। अब पानी काफी हद तक साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि नदी के तेवर और नेपाल में हुई तबाही को देख चुके गंडक किनारे के लोग अभी भी आशंकित हैं। ग्रामीणों की निगाह लगातार नदी के जलस्तर पर बनी हुई है।
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खड्डा विकास खंड के बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नारायनपुर, सालिकपुर और महदेवा समेत अन्य गांवों में इस बरसात में अब तक बाढ़ का पानी नहीं घुसा है। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। इस बरसात में गंडक नदी का सर्वाधिक डिस्चार्ज 2.25 लाख क्यूसेक तक पहुंच चुका है।
उस दौरान भैंसहा गेज पर जलस्तर चेतावनी बिंदु से 90 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर 95.90 मीटर दर्ज हुआ था। फिलहाल नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। तटबंध के संवेदनशील ठोकरों पर बने दबाव को देखते हुए नदी किनारे के लोगों की निगाह गंडक के जलस्तर पर टिकी है।
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वाल्मीकि गंडक बैराज से सोमवार सुबह छह बजे नदी में 1.19 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। सुबह सात से 11 बजे तक डिस्चार्ज 1.21 लाख क्यूसेक रहा। दोपहर 12 बजे 1.19 लाख क्यूसेक और दोपहर एक बजे से शाम चार बजे तक 1.14 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। डिस्चार्ज में कमी के बावजूद छितौनी तटबंध के किलोमीटर 4.180 और 5.180 पर स्थित ठोकर संख्या दो और तीन तथा किलोमीटर 12.700 के बीरभार ठोकर पर नदी का दबाव बरकरार है।
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नेपाल में हुई त्रासदी के बाद गंडक नदी में मलबा और गाद आने से पानी दूषित हो गया था। अब पानी काफी हद तक साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि नदी के तेवर और नेपाल में हुई तबाही को देख चुके गंडक किनारे के लोग अभी भी आशंकित हैं। ग्रामीणों की निगाह लगातार नदी के जलस्तर पर बनी हुई है।
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खड्डा विकास खंड के बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नारायनपुर, सालिकपुर और महदेवा समेत अन्य गांवों में इस बरसात में अब तक बाढ़ का पानी नहीं घुसा है। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। इस बरसात में गंडक नदी का सर्वाधिक डिस्चार्ज 2.25 लाख क्यूसेक तक पहुंच चुका है।
उस दौरान भैंसहा गेज पर जलस्तर चेतावनी बिंदु से 90 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर 95.90 मीटर दर्ज हुआ था। फिलहाल नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। तटबंध के संवेदनशील ठोकरों पर बने दबाव को देखते हुए नदी किनारे के लोगों की निगाह गंडक के जलस्तर पर टिकी है।

पड़रौना वन क्षेत्र में रोआरी गांव के समीप मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के किनारे लेटा घड़ियाल।संवाद