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सिपाही को बना दिया ‘अधिकारी’, भत्ता बढ़ाया ही नहीं

Thu, 16 Jun 2022 11:46 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jun 2022 11:46 PM IST
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The soldier was made an 'officer', the allowance was not increased
सिपाही को बना दिया ‘अधिकारी’, भत्ता बढ़ाया ही नहीं
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कुशीनगर। जिले के थानों में सिपाहियों को बीट पुलिस अधिकारी बनाकर उनकी जिम्मेदारियां बढ़ा दी गईं, पर उनके लिए भत्ता बढ़ाया ही नहीं गया।
अब भी उन्हें प्रति माह साइकिल भत्ते के तौर पर महज दो सौ रुपये दिए जा रहे हैं। दिन भर भागदौड़ करने वाले इन बीट पुलिस अधिकारियों के लिए यह भत्ता नाकाफी साबित हो रहा है। उन्हें पेट्रोल भरवाने के लिए अपनी जेब से रकम खर्च करनी पड़ती है।
गांव और मोहल्लों में पुलिस की पैठ बढ़ाने के लिए थानों के सिपाहियों को बीट पुलिस अधिकारी का दर्जा दे दिया गया है। इस लिए उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है। बीट पुलिस अधिकारी बने सिपाहियों को दिनभर दौड़भाग करनी पड़ती है। इस वजह से बाइक के पेट्रोल खर्च का भार भी उनको उठाना पड़ता है। बीट पर निकलने वाले सिपाही की बाइक का एक दिन का खर्च कम से कम एक लीटर पेट्रोल का होता है। इसका भुगतान शासन की तरफ से नहीं होता। समय बदलने के बाद भी बीट पुलिस अधिकारी को दो रुपये प्रतिमाह साइकिल भत्ता का भुगतान किया जा रहा है। बीट पर तैनात हेड कांस्टेबल और सिपाही के लिए दो सौ रुपये प्रतिमाह साइकिल भत्ता निर्धारित है।
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बीट की सूचना से लेकर वारंट, सम्मन तामिला कराने, बदमाशों की निगरानी, उनकी रिपोर्ट तैयार करने में बीट पुलिस अधिकारी का कम से कम एक लीटर पेट्रोल दिनभर में खत्म हो जाता है। अंग्रेजों के जमाने की व्यवस्था के अनुसार हो रहे भुगतान से बीट पुलिस अधिकारी कभी-कभी निराश हो जाते हैं। कभी-कभी तो अपने खर्चे के लिए उन्हें फरियादियों पर भी दबाव बनाना पड़ता है।
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शासन की तरफ से मिलती हैं ये सुविधाएं
बीट पुलिस अधिकारियों को हर महीने दो सौ रुपये का साइकिल भत्ता दिया जाता है। थानेदार की जीप चलाने के लिए महीने भर में महज दो सौ लीटर डीजल ही दिया जाता है। थानेदारों पर घटनास्थल पर जाने से लेकर मीटिंग और वीआईपी ड्यूटी की जिम्मेदारी भी होती है। किसी अपराध के आरोप में थानों पर पकड़कर लाए जाने वाले आरोपियों को खाना खिलाने के लिए थानेदार को प्रति व्यक्ति सिर्फ 25 रुपये ही मिलते हैं। बीट पुलिस अधिकारी पर थानों के नोटिस, वारंट, पासपोर्ट और लाइसेंस की जांच, चरित्र सत्यापन सहित अन्य तरह की जिम्मेदारी होती है। इसके अलावा आरोपियों का चालान करके उन्हें कोर्ट में ले जाने, क्षेत्र की गतिविधियों की बीट सूचना दर्ज करने, लेखपाल सहित अन्य राजस्व कर्मचारियों से तालमेल करके फरियादियों की समस्याओं का निस्तारण कराने, क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों से व्हाट्सएप के जरिए सूचनाओं के आदान-प्रदान की जिम्मेदारी, बदमाशों के बारे में थानेदार को जानकारी देने सहित और भी कई जिम्मेदारियां दी गई हैं।

इनको इतने रुपये का मिलता है मासिक भत्ता
- दीवान और सिपाही का साइकिल भत्ता -200 रुपये
- थानों पर तैनात दरोगाओं को भत्ता - 700 रुपये
- थाने की जीप को हर माह डीजल - दो सौ लीटर
- किसी मामले में थाने में बंद आरोपी का भोजन खर्च - 25 रुपये प्रतिदिन
यह शासन से संबंधित प्रकरण है। इस समस्या के समाधान के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से पत्राचार किया जाएगा। प्रयास किया जाएगा कि सिपाहियों का मासिक भत्ता वर्तमान परिस्थितियों के मुताबिक तय हो।
- धवल कुमार जायसवाल, एसपी
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