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Kushinagar News: लोक-स्मृतियों को पुनर्स्थापित करने का जनांदोलन है लोकरंग महोत्सव
Fri, 27 Mar 2026 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 27 Mar 2026 12:11 AM IST
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फाजिलनगर। इस साल लोकरंग का 19वां महोत्सव 11 व 12 अप्रैल को जोगिया जनूबी पट्टी में होगा। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुभाषचंद्र कुशवाहा ने बताया कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज की जीवंत परंपराओं, श्रम-संस्कृति और लोक-स्मृतियों को पुनर्स्थापित करने का जनांदोलन है।
उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल की रात में जब लोकधुनें गूंजेंगी, तो वह ग्रामीण जीवन की आत्मा का प्रकटीकरण होगा। गांव की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत रोपनी-सोहनी गीत खेत-खलिहान की संवेदनाओं को स्वर देंगे। बनारस के दुर्गेश उपाध्याय भोजपुरी लोकगायन के माध्यम से पूर्वांचल की मिट्टी की गंध बिखेरेंगे। बुंदेलखंड और छत्तीसगढ़ की धरती से आए कलाकार सैरा, राई, सुआ, करमा, ददरिया और पंथी जैसे नृत्यों के जरिए श्रम और उत्सव के गहरे रिश्ते को जीवंत करेंगे।
सुभाषचंद्र कुशवाहा ने बताया कि त्रिपुरा की खुम्पुई कल्चरल अकादमी की ओर से प्रस्तुत ‘होजागिरि’ नृत्य भारत की सांस्कृतिक विविधता को एक सूत्र में पिरोएगा। पहली रात ‘उल्लू पंचायत’ नाटक का मंचन होगा। दूसरे दिन सुबह लोकसंस्कृति के नायक बनाम वंचितों की संघर्ष गाथा विषय पर विचार गोष्ठी होगी।उसमें देश के प्रख्यात चिंतक जैसे सुभाष चंद्र सैनी और दिनेश कुशवाह अपने विचार साझा करेंगे।
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दूसरे रात कार्यक्रम की शुरुआत वाराणसी का प्रेरणा कला मंच जनगीतों से करेगा। इसमें त्रिपुरा के कलाकार ‘लेबांग बोमानी’ और ‘ममिता’ नृत्य प्रस्तुत करेंगे। साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘मंदिर-मस्जिद’ पर आधारित नाटक ‘अमानत’ के मंचन से समापन होगा। पूरे कार्यक्रम में गाजीपुर के संभावना कला मंच की ओर से तैयार कविता पोस्टर और भित्ति चित्र पूरे परिसर को जीवंत सांस्कृतिक संवाद में बदलने का कार्य करेंगे।
इस दौरान हदीश अंसारी, विष्णुदेव राय, नितांत कुमार सिंह, इजरायल अंसारी, सिकंदर गोंड, अनुभव राय, मंजूर अली, हबीब अंसारी आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल की रात में जब लोकधुनें गूंजेंगी, तो वह ग्रामीण जीवन की आत्मा का प्रकटीकरण होगा। गांव की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत रोपनी-सोहनी गीत खेत-खलिहान की संवेदनाओं को स्वर देंगे। बनारस के दुर्गेश उपाध्याय भोजपुरी लोकगायन के माध्यम से पूर्वांचल की मिट्टी की गंध बिखेरेंगे। बुंदेलखंड और छत्तीसगढ़ की धरती से आए कलाकार सैरा, राई, सुआ, करमा, ददरिया और पंथी जैसे नृत्यों के जरिए श्रम और उत्सव के गहरे रिश्ते को जीवंत करेंगे।
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सुभाषचंद्र कुशवाहा ने बताया कि त्रिपुरा की खुम्पुई कल्चरल अकादमी की ओर से प्रस्तुत ‘होजागिरि’ नृत्य भारत की सांस्कृतिक विविधता को एक सूत्र में पिरोएगा। पहली रात ‘उल्लू पंचायत’ नाटक का मंचन होगा। दूसरे दिन सुबह लोकसंस्कृति के नायक बनाम वंचितों की संघर्ष गाथा विषय पर विचार गोष्ठी होगी।उसमें देश के प्रख्यात चिंतक जैसे सुभाष चंद्र सैनी और दिनेश कुशवाह अपने विचार साझा करेंगे।
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दूसरे रात कार्यक्रम की शुरुआत वाराणसी का प्रेरणा कला मंच जनगीतों से करेगा। इसमें त्रिपुरा के कलाकार ‘लेबांग बोमानी’ और ‘ममिता’ नृत्य प्रस्तुत करेंगे। साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘मंदिर-मस्जिद’ पर आधारित नाटक ‘अमानत’ के मंचन से समापन होगा। पूरे कार्यक्रम में गाजीपुर के संभावना कला मंच की ओर से तैयार कविता पोस्टर और भित्ति चित्र पूरे परिसर को जीवंत सांस्कृतिक संवाद में बदलने का कार्य करेंगे।
इस दौरान हदीश अंसारी, विष्णुदेव राय, नितांत कुमार सिंह, इजरायल अंसारी, सिकंदर गोंड, अनुभव राय, मंजूर अली, हबीब अंसारी आदि मौजूद रहे।