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Kushinagar News: अधर्म का अंत और निष्काम भक्ति का संदेश दे गई श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाएं
Sun, 28 Jun 2026 01:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 28 Jun 2026 01:34 AM IST
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पिपरा लालमन में कथा सुनाते आचार्य अभियेंद्र गर्गाचार्य।संवाद
- फोटो : Samvad
सुकरौली। पिपरा लालमन गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन अभियेंद्र गर्गाचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण की कंस वध लीला एवं महारास लीला का आध्यात्मिक रहस्य श्रद्धालुओं को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि कंस केवल एक अत्याचारी राजा नहीं, बल्कि अहंकार, भय और अधर्म का प्रतीक था। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस वध यह संदेश देता है कि चाहे अधर्म कितना भी बलशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है। जब मन में प्रभु की भक्ति जागृत होती है, तब क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे विकार स्वतः समाप्त होने लगते हैं।
कथावाचक ने महारास लीला का वर्णन करते हुए कहा कि यह कोई साधारण नृत्य नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। गोपियों का निष्काम और निस्वार्थ प्रेम सच्ची भक्ति एवं पूर्ण समर्पण का आदर्श प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा प्रत्येक भक्त के हृदय में समान रूप से विराजमान हैं और सच्ची भक्ति में अहंकार, स्वार्थ तथा भेदभाव का कोई स्थान नहीं होता।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष करते रहे। अंत में कथावाचक ने सभी से धर्म, सत्य और निष्काम भक्ति के मार्ग पर चलकर जीवन को सफल बनाने का आह्वान किया। इस दौरान विनोद मिश्र, अशोक कुमार, उपेंद्र, पवन शैलेश मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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कथावाचक ने महारास लीला का वर्णन करते हुए कहा कि यह कोई साधारण नृत्य नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। गोपियों का निष्काम और निस्वार्थ प्रेम सच्ची भक्ति एवं पूर्ण समर्पण का आदर्श प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा प्रत्येक भक्त के हृदय में समान रूप से विराजमान हैं और सच्ची भक्ति में अहंकार, स्वार्थ तथा भेदभाव का कोई स्थान नहीं होता।
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कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष करते रहे। अंत में कथावाचक ने सभी से धर्म, सत्य और निष्काम भक्ति के मार्ग पर चलकर जीवन को सफल बनाने का आह्वान किया। इस दौरान विनोद मिश्र, अशोक कुमार, उपेंद्र, पवन शैलेश मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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