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Kushinagar News: कागज में हो गई वृदि्ध, मौके पर मिला कम क्षमता का ट्रांसफाॅर्मर
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पटहेरवा। बिजली निगम फाजिलनगर का एक अजीब कारनामा सामने आया है। एक गांव में कागज में चल रहे सौ केवीए ट्रांसफाॅर्मर जलने से एक सप्ताह अंधेरे में रहने के बाद आया 100 केवीए का ट्रांसफाॅर्मर बैरंग वापस हो गया।
पता चला कि मौके पर 63 केवीए का ट्रांसफाॅर्मर लगा है, जबकि जितने केवीए का ट्रांसफाॅर्मर रिपेयर सेंटर से आता है उतने ही केवीए का ट्रांसफार्म वापस ले जाना पड़ता है। अब विभाग के कारनामे का खामियाजा गांव के उपभोक्ता झेल रहे हैं।
विद्युत उपकेंद्र फाजिलनगर के पटहेरवा फीडर क्षेत्र के मतलुकछापर गांव में बीते एक सप्ताह से ट्रांसफाॅर्मर जला है। इसको बदलवाने को लेकर ग्रामीण लगे हुए है।ग्रामीणों के काफी प्रयास के बाद पडरौना रिपेयर सेंटर से 100 केवीए का ट्रांसफाॅर्मर बृहस्पतिवार की दोपहर आया, लेकिन जब उन्होंने देखा कि पहले से यहां 63 केवीए का ट्रांसफाॅर्मर लगा है तो आवक रह गए।
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गांव के उपभोक्ताओं ने जब इस ट्रांसफाॅर्मर को लगाने की बात कही तो ट्रांसफाॅर्मर लेकर आए लोगों ने बताया कि इस गांव के लिए 100 केवीए ट्रांसफाॅर्मर पहले से चल रहा है उसी के अनुसार रिपोर्ट के आधार पर 100 केवीए ट्रांसफाॅर्मर लगाने के लिए लाया गया है लेकिन यहां मौके पर जो ट्रांसफाॅर्मर जला है 63 केवीए है। यह सुन गांव के लोग आवाक रह गए। किसी तरह एक सप्ताह अंधेरे में रहने के बाद उम्मीद लगी कि अब बिजली मिलेगी लेकिन उम्मीद धरा का धरा रह गया।अब स्थिति यह है कि लोगों के मोबाइल चार्ज कराने भी चौराहे पर जाना पड़ रहा है जबकि रात अंधेरे में बीत रहा है।
इस संबंध में जेई अभिजीत कुमार ने बताया कि मतलुकछापर गांव में ट्रांसफाॅर्मर जलने की सूचना मिली थी। रिपोर्ट के आधार पर 100 केवीए का ट्रांसफाॅर्मर लगाने के लिए आया था लेकिन जला हुआ ट्रांसफाॅर्मर 63 केवीए का है। जितनी क्षमता का ट्रांसफाॅर्मर लगाने के लिए आता है उतने क्षमता का वापस भी करना पड़ता है।
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पता चला कि मौके पर 63 केवीए का ट्रांसफाॅर्मर लगा है, जबकि जितने केवीए का ट्रांसफाॅर्मर रिपेयर सेंटर से आता है उतने ही केवीए का ट्रांसफार्म वापस ले जाना पड़ता है। अब विभाग के कारनामे का खामियाजा गांव के उपभोक्ता झेल रहे हैं।
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विद्युत उपकेंद्र फाजिलनगर के पटहेरवा फीडर क्षेत्र के मतलुकछापर गांव में बीते एक सप्ताह से ट्रांसफाॅर्मर जला है। इसको बदलवाने को लेकर ग्रामीण लगे हुए है।ग्रामीणों के काफी प्रयास के बाद पडरौना रिपेयर सेंटर से 100 केवीए का ट्रांसफाॅर्मर बृहस्पतिवार की दोपहर आया, लेकिन जब उन्होंने देखा कि पहले से यहां 63 केवीए का ट्रांसफाॅर्मर लगा है तो आवक रह गए।
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गांव के उपभोक्ताओं ने जब इस ट्रांसफाॅर्मर को लगाने की बात कही तो ट्रांसफाॅर्मर लेकर आए लोगों ने बताया कि इस गांव के लिए 100 केवीए ट्रांसफाॅर्मर पहले से चल रहा है उसी के अनुसार रिपोर्ट के आधार पर 100 केवीए ट्रांसफाॅर्मर लगाने के लिए लाया गया है लेकिन यहां मौके पर जो ट्रांसफाॅर्मर जला है 63 केवीए है। यह सुन गांव के लोग आवाक रह गए। किसी तरह एक सप्ताह अंधेरे में रहने के बाद उम्मीद लगी कि अब बिजली मिलेगी लेकिन उम्मीद धरा का धरा रह गया।अब स्थिति यह है कि लोगों के मोबाइल चार्ज कराने भी चौराहे पर जाना पड़ रहा है जबकि रात अंधेरे में बीत रहा है।
इस संबंध में जेई अभिजीत कुमार ने बताया कि मतलुकछापर गांव में ट्रांसफाॅर्मर जलने की सूचना मिली थी। रिपोर्ट के आधार पर 100 केवीए का ट्रांसफाॅर्मर लगाने के लिए आया था लेकिन जला हुआ ट्रांसफाॅर्मर 63 केवीए का है। जितनी क्षमता का ट्रांसफाॅर्मर लगाने के लिए आता है उतने क्षमता का वापस भी करना पड़ता है।