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Kushinagar News: जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा वातावरण
Thu, 19 Feb 2026 02:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 19 Feb 2026 02:00 AM IST
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दुदही। गौरीश्रीराम में नवनिर्मित विशाल मंदिर में हनुमान और सरस्वती प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा शुरू हुई। बुधवार को कार्यक्रम की शुरुआत कलश यात्रा से हुई, जिसमें जय श्रीराम के जयकारों से वातावरण गूंज उठ गया।
पूर्वनिर्धारित कार्यक्रमानुसार दोपहर में 500 पीला वस्त्रधारी कन्याओं ने सिर पर कलश लेकर यात्रा में भाग लिया। उनके साथ रामभक्त जयकारे लगाते हुए पैदल यात्रा में शामिल हुए। कलश यात्रा नव निर्मित मंदिर से शुरू होकर रामनगर, माधोपुर, श्रीरामपट्टी, गगलगवा, गौरिजगदीश, मंगलपुर आदि गांवों से होते हुए पांडेयपट्टी स्थित बांसी नदी के तट से पवित्र जल लेकर उसी मार्ग से पुनः मंदिर के रामकथा मंडप और पूजन स्थल पर पहुंची। इस दौरान मुख्य न्यासी एवं अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय सचिव, विख्यात इतिहासकार डॉ. बालमुकुंद पांडेय, वृंदावन धाम से आए कथा वाचक पंडित अरविंद ओझा, मदनमोहन पांडेय, अवधेश पांडेय, आचार्य उमेश पांडेय, अंबरीष पांडेय, उद्देश पांडेय, गंगेश्वर पांडेय सहित नीतीश, आकाश, प्रियेश आदि उपस्थित रहे। कलश यात्रा और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के माध्यम से मंदिर परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का माहौल पूरी तरह जीवंत रहा।
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पूर्वनिर्धारित कार्यक्रमानुसार दोपहर में 500 पीला वस्त्रधारी कन्याओं ने सिर पर कलश लेकर यात्रा में भाग लिया। उनके साथ रामभक्त जयकारे लगाते हुए पैदल यात्रा में शामिल हुए। कलश यात्रा नव निर्मित मंदिर से शुरू होकर रामनगर, माधोपुर, श्रीरामपट्टी, गगलगवा, गौरिजगदीश, मंगलपुर आदि गांवों से होते हुए पांडेयपट्टी स्थित बांसी नदी के तट से पवित्र जल लेकर उसी मार्ग से पुनः मंदिर के रामकथा मंडप और पूजन स्थल पर पहुंची। इस दौरान मुख्य न्यासी एवं अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय सचिव, विख्यात इतिहासकार डॉ. बालमुकुंद पांडेय, वृंदावन धाम से आए कथा वाचक पंडित अरविंद ओझा, मदनमोहन पांडेय, अवधेश पांडेय, आचार्य उमेश पांडेय, अंबरीष पांडेय, उद्देश पांडेय, गंगेश्वर पांडेय सहित नीतीश, आकाश, प्रियेश आदि उपस्थित रहे। कलश यात्रा और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के माध्यम से मंदिर परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का माहौल पूरी तरह जीवंत रहा।
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