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Kushinagar News: पेंशन की राशि निजी बैंक में कर दी ट्रांसफर, पुराने खातों में वापस होने पर कट गए 25 करोड़
Mon, 17 Apr 2023 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 17 Apr 2023 12:16 AM IST
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डीआईओएस कार्यालय कुशीनगर।संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिले के माध्यमिक शिक्षा विभाग के करीब 700 शिक्षकों और 150 कर्मचारियों की पेंशन की रकम को बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के सरकारी और अर्ध सरकारी वित्तीय संस्थानों से निकालकर निजी बैंक में जमा करने का मामला सामने आया है। शिक्षकों के विरोध के बाद यह राशि फिर से पूर्व के खातों में ट्रांसफर की गई तो लेनदेन के नाम पर प्रति यूनिट 4.42 रुपये की कटौती कर ली गई। इससे 850 शिक्षकों और कर्मचारियों के खाते से 20 से 25 हजार रुपये की कटौती बिना वजह हो गई। सभी कर्मचारियों की यह रकम 25 करोड़ से भी अधिक बताई जा रही है।
राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत माध्यमिक शिक्षकों के खाते से पेंशन के नाम पर वेतन से दस प्रतिशत की कटौती होती है। इसमें प्रदेश सरकार 14 फीसदी अपना अंश देती है। इस रकम को एसबीआई, एलआईसी और यूटीआई (सरकार के म्युचुअल फंड) में जमा किया जाता है। वर्ष 2005 के बाद सरकारी सेवा में आए इन शिक्षकों व कर्मचारियों के उस खाते से काफी बड़ी रकम को देश के तीन बड़े सरकारी संस्थानों से निकालकर एक निजी क्षेत्र के बैंक में जमा करा दिया गया। इसे छह फरवरी 2023 से 10 फरवरी 2023 के बीच में प्रान खाते के फंड को स्विच कर एलआईसी की तीन योजनाओं में डाल दिया गया था, जो बिना शिक्षकों और कर्मचारियों की सहमति से हुआ।
जानकारी होने पर आठ अप्रैल को शिक्षकों और शिक्षक नेताओं ने इस पर एतराज जताया। नौ से 12 अप्रैल के बीच पूर्व की भांति एसबीआई, एलआईसी और यूटीआई में रकम वापस करा दी गई। शिक्षकों का कहना है कि इस ट्रांजेक्शन में प्रति यूनिट (शेयर) 4.42 रुपये की कटौती पेंशन की धनराशि में से की गई। इस तरह की अदला-बदली से शिक्षकों का 25 से 30 हजार रुपये ट्रांजेक्शन चार्ज कटा है।
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क्या कहता है नियम
शिक्षक नेताओं और जानकारों की मानें तो यदि इस फंड को एक से दूसरी जगह और फिर उसे दूसरे से पहली जगह ट्रांसफर किया जाता है तो 4.42 रुपये प्रति यूनिट का चार्ज उपभोक्ता के खाते से कटता है। ऐसा होने की दशा में प्रत्येक कर्मचारी को लाखों रुपये की चपत बैठे-बैठे लग जाती है।
यह है योजना
प्रदेश में वर्ष 2005 के बाद सरकारी सेवा में आने वाले कर्मचारियों को सरकार ने पुरानी पेंशन स्कीम से बाहर कर एनपीएस में शामिल किया था। उसके बाद उन शिक्षकों व कर्मचारियों के नाम एक प्रान खाता खोला गया। उसमें कर्मचारी के वेतन से हुई कटौती और उसके अनुसार सरकार की तरफ से मिलाए गए अंश को जमा किए जाने की व्यवस्था लागू की गई। सरकार ने व्यवस्था दी कि योजना में शामिल कर्मचारियों को स्वयं ऑनलाइन इस योजना की वेबसाइट पर जाकर उस खाते में जमा रकम को एसबीआई के पेंशन फंड स्कीम में 33 फीसदी, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया के रिटायरमेंट सल्यूशन पेंशन फंड में 32 और एलआईसी की पेंशन फंड स्कीम में 35 फीसदी रकम देश की प्रतिष्ठित कंपनियों में शेयर लगाने का नियम बनाया गया। इस प्रक्रिया में कर्मचारियों का सहमति पत्र प्राप्त करने के बाद फंड ट्रांसफर का कार्य जिला विद्यालय निरीक्षक को भी करने के लिए अधिकृत किया गया। इसके लिए डीआईओएस का डीटीओ के नाम से अतिरिक्त पद बनाया गया।
ऐसे हुई कटौती
जिले में इस योजना के तहत लगभग 850 शिक्षकों और कर्मचारियों के खुले प्रत्येक खाते में अब तक करीब 15 लाख रुपये यूनिट के रूप में जमा हो चुके हैं। कुल रकम को जोड़ें तो यह आंकड़ा एक अरब रुपये से अधिक का दिख रहा है। एनपीएस ट्रांजेक्शन प्रमाणपत्र में इसी वर्ष छह से दस फरवरी के बीच सभी कर्मचारियों के सरकारी उपक्रमों के शेयरों में लगे बड़े फंड को निजी क्षेत्र के बैंक के तीन अलग अलग शेयरों में लगाया जाना प्रदर्शित हो रहा है। शिक्षकों की आपत्ति के बाद इसी महीने की नौ से 12 अप्रैल के बीच में सभी फंड को आईसीआईसीआई से हटाकर वापस पुराने तीनों में बैंकों में डाल दिया गया है। इस ट्रांजेक्शन में इनके खाते से करीब 25 करोड़ रुपये कट जाने की बात शिक्षक नेता बता रहे हैं।
डीआईओएस के पास होता है आईडी-पासवर्ड
शिक्षक नेताओं ने बताया कि डीआईओएस के पास इसकी आईडी और पासवर्ड होता है। संबंधित शिक्षक और डीआईओएस ही इसका उपयोग कर सकते हैं। शिक्षकों का कहना है कि उन लोगों ने फंड ट्रांसफर नहीं किए हैं।
बोले शिक्षक नेता
शिक्षकों और कर्मचारियों की बिना अनुमति के इस तरह की हेरफेर धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
-अजय कुमार, जिलाध्यक्ष अटेवा
शिक्षकों की जागरूकता की वजह से इतना बड़ा भेद खुल पाया। अन्यथा विभाग ने तो चुपके-चुपके इतनी बड़ी रकम निजी बैंक में भेज दी थी।
-ओमप्रकाश शर्मा, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट)
एनपीएस में बिना शिक्षकों और कर्मचारियों को सूचना दिए या अनुमति लिए ऐसा कार्य करने का कोई प्रावधान नहीं है। यह कार्य गलत हुआ है।
-डॉ. घनश्याम तिवारी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट)
ये शिक्षक एनपीएस खाते की जांच की मांग कर रहे हैं। विभाग को इन आरोपों की जांच कराई जानी चाहिए।
-ओमप्रकाश सिंह, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट)
शिक्षक बोले
हमने दूसरे जिलों में पता किया है। ऐसा काम आस-पास के किसी जिले में नहीं हुआ है। इसकी जांच होनी चाहिए।
-प्रमोद कुशवाहा, शिक्षक
शिक्षकों के प्रान खाते की रकम सरकारी बैंकों में सुरक्षित है। पहले तो इन बैंकों से निकालकर निजी बैंक में भेजा गया और विरोध पर पुन: उन्हीं बैंकों में वापस भेज दिया गया। इस ट्रांजेक्शन की वजह से भी काफी नुकसान हुआ है।
-नंदलाल पाल, शिक्षक, जनता इंटर कॉलेज, रामकोला
बिना अनुमति खाते से एनपीएस के रुपये इधर से उधर होना प्रथम दृष्टया हेरफेर नजर आ रहा है। इसकी शासन स्तर से उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। यदि जांच और कार्रवाई नहीं होती है तो चुनाव आचार संहिता खत्म होते ही संबंधित अधिकारी के विरुद्ध संगठन की ओर से धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
-राजीव यादव, प्रदेश महामंत्री, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) एवं शिक्षक, यूएनआईसी पडरौना
कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं। शिक्षकों के प्रान खाते का फंड पुराने बैंकों में ही है। किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की गई है।
-रवींद्र सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
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कुशीनगर। जिले के माध्यमिक शिक्षा विभाग के करीब 700 शिक्षकों और 150 कर्मचारियों की पेंशन की रकम को बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के सरकारी और अर्ध सरकारी वित्तीय संस्थानों से निकालकर निजी बैंक में जमा करने का मामला सामने आया है। शिक्षकों के विरोध के बाद यह राशि फिर से पूर्व के खातों में ट्रांसफर की गई तो लेनदेन के नाम पर प्रति यूनिट 4.42 रुपये की कटौती कर ली गई। इससे 850 शिक्षकों और कर्मचारियों के खाते से 20 से 25 हजार रुपये की कटौती बिना वजह हो गई। सभी कर्मचारियों की यह रकम 25 करोड़ से भी अधिक बताई जा रही है।
राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत माध्यमिक शिक्षकों के खाते से पेंशन के नाम पर वेतन से दस प्रतिशत की कटौती होती है। इसमें प्रदेश सरकार 14 फीसदी अपना अंश देती है। इस रकम को एसबीआई, एलआईसी और यूटीआई (सरकार के म्युचुअल फंड) में जमा किया जाता है। वर्ष 2005 के बाद सरकारी सेवा में आए इन शिक्षकों व कर्मचारियों के उस खाते से काफी बड़ी रकम को देश के तीन बड़े सरकारी संस्थानों से निकालकर एक निजी क्षेत्र के बैंक में जमा करा दिया गया। इसे छह फरवरी 2023 से 10 फरवरी 2023 के बीच में प्रान खाते के फंड को स्विच कर एलआईसी की तीन योजनाओं में डाल दिया गया था, जो बिना शिक्षकों और कर्मचारियों की सहमति से हुआ।
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जानकारी होने पर आठ अप्रैल को शिक्षकों और शिक्षक नेताओं ने इस पर एतराज जताया। नौ से 12 अप्रैल के बीच पूर्व की भांति एसबीआई, एलआईसी और यूटीआई में रकम वापस करा दी गई। शिक्षकों का कहना है कि इस ट्रांजेक्शन में प्रति यूनिट (शेयर) 4.42 रुपये की कटौती पेंशन की धनराशि में से की गई। इस तरह की अदला-बदली से शिक्षकों का 25 से 30 हजार रुपये ट्रांजेक्शन चार्ज कटा है।
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शिक्षक नेताओं और जानकारों की मानें तो यदि इस फंड को एक से दूसरी जगह और फिर उसे दूसरे से पहली जगह ट्रांसफर किया जाता है तो 4.42 रुपये प्रति यूनिट का चार्ज उपभोक्ता के खाते से कटता है। ऐसा होने की दशा में प्रत्येक कर्मचारी को लाखों रुपये की चपत बैठे-बैठे लग जाती है।
यह है योजना
प्रदेश में वर्ष 2005 के बाद सरकारी सेवा में आने वाले कर्मचारियों को सरकार ने पुरानी पेंशन स्कीम से बाहर कर एनपीएस में शामिल किया था। उसके बाद उन शिक्षकों व कर्मचारियों के नाम एक प्रान खाता खोला गया। उसमें कर्मचारी के वेतन से हुई कटौती और उसके अनुसार सरकार की तरफ से मिलाए गए अंश को जमा किए जाने की व्यवस्था लागू की गई। सरकार ने व्यवस्था दी कि योजना में शामिल कर्मचारियों को स्वयं ऑनलाइन इस योजना की वेबसाइट पर जाकर उस खाते में जमा रकम को एसबीआई के पेंशन फंड स्कीम में 33 फीसदी, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया के रिटायरमेंट सल्यूशन पेंशन फंड में 32 और एलआईसी की पेंशन फंड स्कीम में 35 फीसदी रकम देश की प्रतिष्ठित कंपनियों में शेयर लगाने का नियम बनाया गया। इस प्रक्रिया में कर्मचारियों का सहमति पत्र प्राप्त करने के बाद फंड ट्रांसफर का कार्य जिला विद्यालय निरीक्षक को भी करने के लिए अधिकृत किया गया। इसके लिए डीआईओएस का डीटीओ के नाम से अतिरिक्त पद बनाया गया।
ऐसे हुई कटौती
जिले में इस योजना के तहत लगभग 850 शिक्षकों और कर्मचारियों के खुले प्रत्येक खाते में अब तक करीब 15 लाख रुपये यूनिट के रूप में जमा हो चुके हैं। कुल रकम को जोड़ें तो यह आंकड़ा एक अरब रुपये से अधिक का दिख रहा है। एनपीएस ट्रांजेक्शन प्रमाणपत्र में इसी वर्ष छह से दस फरवरी के बीच सभी कर्मचारियों के सरकारी उपक्रमों के शेयरों में लगे बड़े फंड को निजी क्षेत्र के बैंक के तीन अलग अलग शेयरों में लगाया जाना प्रदर्शित हो रहा है। शिक्षकों की आपत्ति के बाद इसी महीने की नौ से 12 अप्रैल के बीच में सभी फंड को आईसीआईसीआई से हटाकर वापस पुराने तीनों में बैंकों में डाल दिया गया है। इस ट्रांजेक्शन में इनके खाते से करीब 25 करोड़ रुपये कट जाने की बात शिक्षक नेता बता रहे हैं।
डीआईओएस के पास होता है आईडी-पासवर्ड
शिक्षक नेताओं ने बताया कि डीआईओएस के पास इसकी आईडी और पासवर्ड होता है। संबंधित शिक्षक और डीआईओएस ही इसका उपयोग कर सकते हैं। शिक्षकों का कहना है कि उन लोगों ने फंड ट्रांसफर नहीं किए हैं।
बोले शिक्षक नेता
शिक्षकों और कर्मचारियों की बिना अनुमति के इस तरह की हेरफेर धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
-अजय कुमार, जिलाध्यक्ष अटेवा
शिक्षकों की जागरूकता की वजह से इतना बड़ा भेद खुल पाया। अन्यथा विभाग ने तो चुपके-चुपके इतनी बड़ी रकम निजी बैंक में भेज दी थी।
-ओमप्रकाश शर्मा, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट)
एनपीएस में बिना शिक्षकों और कर्मचारियों को सूचना दिए या अनुमति लिए ऐसा कार्य करने का कोई प्रावधान नहीं है। यह कार्य गलत हुआ है।
-डॉ. घनश्याम तिवारी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट)
ये शिक्षक एनपीएस खाते की जांच की मांग कर रहे हैं। विभाग को इन आरोपों की जांच कराई जानी चाहिए।
-ओमप्रकाश सिंह, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट)
शिक्षक बोले
हमने दूसरे जिलों में पता किया है। ऐसा काम आस-पास के किसी जिले में नहीं हुआ है। इसकी जांच होनी चाहिए।
-प्रमोद कुशवाहा, शिक्षक
शिक्षकों के प्रान खाते की रकम सरकारी बैंकों में सुरक्षित है। पहले तो इन बैंकों से निकालकर निजी बैंक में भेजा गया और विरोध पर पुन: उन्हीं बैंकों में वापस भेज दिया गया। इस ट्रांजेक्शन की वजह से भी काफी नुकसान हुआ है।
-नंदलाल पाल, शिक्षक, जनता इंटर कॉलेज, रामकोला
बिना अनुमति खाते से एनपीएस के रुपये इधर से उधर होना प्रथम दृष्टया हेरफेर नजर आ रहा है। इसकी शासन स्तर से उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। यदि जांच और कार्रवाई नहीं होती है तो चुनाव आचार संहिता खत्म होते ही संबंधित अधिकारी के विरुद्ध संगठन की ओर से धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
-राजीव यादव, प्रदेश महामंत्री, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) एवं शिक्षक, यूएनआईसी पडरौना
कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं। शिक्षकों के प्रान खाते का फंड पुराने बैंकों में ही है। किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की गई है।
-रवींद्र सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक