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Kushinagar News: कंफर्म टिकट के लिए मारामारी...दलालों की चांदी
Thu, 27 Feb 2025 11:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 27 Feb 2025 11:51 PM IST
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पडरौना। होली को लेकर दिल्ली, मुंबई और अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों का घर आना मुश्किल हो गया है। इन जगहों से कप्तानगंज आने वाली सभी नियमित ट्रेनों में सीटें एक माह पहले से ही फुल हो चुकी हैं। पड़ोसी गोरखपुर रेलवे स्टेशन तक भी अधिकांश ट्रेन होली के एक सप्ताह पूर्व तक फुल हैं। सफर करने के लिए ट्रेनों में मारामारी है।
इस मुश्किल में भी दलालों की कालाबाजारी का खेल जारी है। रेलवे की आधिकारिक एप आईआरसीटीसी पर सामान्य व्यक्ति के लिए दिल्ली, मुंबई, गुजरात, कानपुर आदि शहरों से गोरखपुर के रास्ते घर आने के लिए टिकट के लाले पड़े है, जबकि दलालों की मदद से लोगों को आसानी से कन्फर्म टिकट मिल जा रहा है।
दलाल पूरी सक्रियता से सॉफ्टवेयर की मदद से कन्फर्म टिकट बना दे रहे हैं। इसके एवज में वह टिकट के दाम से स्लीपर के लिए 500-800 और वातानुकूलित के लिए 800-1000 रुपये अधिक वसूल रहे हैं।
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मजबूरी में मिलने वाले कंफर्म टिकट देने के लिए लोग दलालों को अधिक पैसा भी देने के लिए तैयार हैं। पडरौना के अलावा कप्तानगंज, सेवरही, तमकुही, तुर्कपट्टी, दुदही में साइबर कैफे की आड़ में कालाबाजारी का यह धंधा जोर पकड़ चुका है। होली के महज पंद्रह दिन बचे हैं। ऐसे में लोगों ने मांग की कि अभियान चलाकर इन लोगों पर लगाम लगाई जाए।
रेल प्रशासन के लाख प्रयास के बावजूद तत्काल कोटे के टिकट में दलालों की सेंधमारी नहीं रुक पा रही है। त्योहारी सीजन में जब लाेगों को ट्रेनों में सीट नहीं मिलती तो वह दलालों को तलाशते हैं। यह दलाल उन्हें तत्काल में सीट भी उपलब्ध करा देते हैं। इसके बदले यात्री को टिकट की दर से अधिक पैसा देना पड़ता है।
इस तरह के अभियान से रोकथाम संभव : सेवरही का एक चर्चित टिकट धंधेबाज टिकट की कालाबाजारी में दो बार कस्बे से आरपीएफ की ओर से पकड़ा जा चुका है। मजबूत कानून न होने के चलते वह कुछ समय में छूट आते हैं और फिर से टिकट की कालाबाजारी शुरू कर देते हैं। इनसे सिर्फ सेवरही और आसपास के कस्बे नहीं बल्कि बिहार के लोग भी टिकट कराते हैं।
सूत्रों ने बताया है कि इसी कस्बे में रेलवे स्टेशन के ढाला के पास एक साइबर कैफे में दलाल टिकट की कालाबाजारी शुरू की है। इसके अलावा कप्तानगंज और तमकुहीराज में भी दलाल सक्रिय हैं। दरअसल, मोटी कमाई और कमजोर कानून के वजह से दलालों में कोई खास डर नहीं देखा जाता और वह कंफर्म टिकट का कारोबार करते हैं।
सूत्र यह भी बता हैं कि उक्त दलालों के पास एडवांस बुकिंग के लिए आधार कार्ड और नाम व्हाट्सएप पर आने लगे हैं। इसके एवज में यह एडवांस में पैसे भी ले रहे हैं। विभागीय जानकारों की मानें तो दलालों को दबोचने के लिए आरपीएफ और आईआरसीटीसी आईपी अड्रेस ट्रेस कर के कार्रवाई कर सकती है।
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इस मुश्किल में भी दलालों की कालाबाजारी का खेल जारी है। रेलवे की आधिकारिक एप आईआरसीटीसी पर सामान्य व्यक्ति के लिए दिल्ली, मुंबई, गुजरात, कानपुर आदि शहरों से गोरखपुर के रास्ते घर आने के लिए टिकट के लाले पड़े है, जबकि दलालों की मदद से लोगों को आसानी से कन्फर्म टिकट मिल जा रहा है।
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दलाल पूरी सक्रियता से सॉफ्टवेयर की मदद से कन्फर्म टिकट बना दे रहे हैं। इसके एवज में वह टिकट के दाम से स्लीपर के लिए 500-800 और वातानुकूलित के लिए 800-1000 रुपये अधिक वसूल रहे हैं।
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मजबूरी में मिलने वाले कंफर्म टिकट देने के लिए लोग दलालों को अधिक पैसा भी देने के लिए तैयार हैं। पडरौना के अलावा कप्तानगंज, सेवरही, तमकुही, तुर्कपट्टी, दुदही में साइबर कैफे की आड़ में कालाबाजारी का यह धंधा जोर पकड़ चुका है। होली के महज पंद्रह दिन बचे हैं। ऐसे में लोगों ने मांग की कि अभियान चलाकर इन लोगों पर लगाम लगाई जाए।
रेल प्रशासन के लाख प्रयास के बावजूद तत्काल कोटे के टिकट में दलालों की सेंधमारी नहीं रुक पा रही है। त्योहारी सीजन में जब लाेगों को ट्रेनों में सीट नहीं मिलती तो वह दलालों को तलाशते हैं। यह दलाल उन्हें तत्काल में सीट भी उपलब्ध करा देते हैं। इसके बदले यात्री को टिकट की दर से अधिक पैसा देना पड़ता है।
इस तरह के अभियान से रोकथाम संभव : सेवरही का एक चर्चित टिकट धंधेबाज टिकट की कालाबाजारी में दो बार कस्बे से आरपीएफ की ओर से पकड़ा जा चुका है। मजबूत कानून न होने के चलते वह कुछ समय में छूट आते हैं और फिर से टिकट की कालाबाजारी शुरू कर देते हैं। इनसे सिर्फ सेवरही और आसपास के कस्बे नहीं बल्कि बिहार के लोग भी टिकट कराते हैं।
सूत्रों ने बताया है कि इसी कस्बे में रेलवे स्टेशन के ढाला के पास एक साइबर कैफे में दलाल टिकट की कालाबाजारी शुरू की है। इसके अलावा कप्तानगंज और तमकुहीराज में भी दलाल सक्रिय हैं। दरअसल, मोटी कमाई और कमजोर कानून के वजह से दलालों में कोई खास डर नहीं देखा जाता और वह कंफर्म टिकट का कारोबार करते हैं।
सूत्र यह भी बता हैं कि उक्त दलालों के पास एडवांस बुकिंग के लिए आधार कार्ड और नाम व्हाट्सएप पर आने लगे हैं। इसके एवज में यह एडवांस में पैसे भी ले रहे हैं। विभागीय जानकारों की मानें तो दलालों को दबोचने के लिए आरपीएफ और आईआरसीटीसी आईपी अड्रेस ट्रेस कर के कार्रवाई कर सकती है।