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अभी तक आलू क्रय केंद्र पर नहीं हुई बोहनी

Tue, 13 Mar 2018 12:13 AM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
कुश्ाीनगर (ब्यूरो) Updated Tue, 13 Mar 2018 12:13 AM IST
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So far potato did not come at the purchasing center
क्रय केंद्र - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
पडरौना।आलू उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए सरकार की तरफ से शुरू की गई बाजार हस्तक्षेप योजना में किसानों ने अब तक कोई रुचि नहीं दिखाई है। एक मार्च से शुरू हुए आलू खरीद केंद्र पर अब तक एक किलो आलू भी किसानों ने नहीं बेंचा है। सोमवार को खरीद एजेंसी के विपणन विकास अधिकारी ने इस केंद्र का निरीक्षण किया। उनका मानना था कि सरकार के रेट व बाजार रेट में करीब दो गुना अंतर होने की वजह से किसान सरकारी एजेंसी को आलू बेंचने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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कुशीनगर जिले में गन्ना के बाद दूसरी नकदी फसल के तौर पर लोग आलू की खेती करते हैं। उद्यान विभाग के अनुसार इस वर्ष जिले में 29 हजार मीट्रिक टन आलू उत्पादन की उम्मीद है। परंतु भंडारण की क्षमता महज 2200 मीट्रिक टन की है। उत्पाद व भंडारण के इस अंतर के चलते किसानों को कम रेट पर ही आलू बेंचना पड़ता है। प्रदेश सरकार ने इस बार आलू किसानों को राहत देने के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करते हुए आलू खरीद के लिए कई एजेंसियों को जिम्मा दिया है। कुशीनगर समेत गोरखपुर मंडल में आलू खरीद का जिम्मा उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक सहकारी विपणन संघ (हाफेड)को मिला है। क्रय एजेंसी की तरफ से लारी कोल्ड स्टोर कसया में एक मार्च से ही आलू क्रय केंद्र प्रारंभ किया गया है। इस क्रय केंद्र पर किसानों से फेयर एवरेज क्वालिटी का आलू 549 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाना है। परंतु अब तक यहां कोई किसान अपना आलू बेंचने नहीं आया है। 31 मार्च तक यह योजना लागू रहेगी। सोमवार को हाफेड के विपणन विकास अधिकारी लखनऊ बिंदु सागर ने क्रय केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने खरीद शून्य होने पर चिंता जताते हुए आलू उत्पादक किसानों को योजना के विषय में जानकारी देकर जागरूक करने की बात कही। आलू बेंचने में किसानों की अरुचि के सवाल पर विपणन विकास अधिकारी ने बताया कि इस वक्त बाजार में करीब एक हजार रुपये क्विंटल के भाव से आलू बिक रहा है जबकि सरकार प्रति क्विंटल 549 रुपये का ही रेट दे रही है। बाजार भाव व सरकारी खरीद में लगभग दो गुना अंतर होने की वजह से किसान क्रय केंद्र पर नहीं आ रहे हैं।
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 आलू उत्पादन के मामले में कुशीनगर समेत गोरखपुर मंडल के अन्य जिलों की हालत भी बेहतर है लेकिन भंडारण की क्षमता एक तिहाई से भी कम है। इस मामले में सबसे खराब स्थिति देवरिया जिले की है जहां इस वक्त भंडारण की कोई व्यवस्था ही नहीं है। हालांकि इस मामले में गोरखपुर व महराजगंज जिलों की स्थिति कुछ बेहतर है।
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सोमवार को कसया के लारी कोल्ड स्टोर में बने क्रय केंद्र पर आए हाफेड के विपणन विकास अधिकारी (लखनऊ) बिंदु सागर ने बताया कि प्रदेश में आलू खरीद के लिए पांच एजेंसियों को जिम्मा सौंपा गया है। इनमें पीसीएफ, यूपी एग्रो, उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक सहकारी विपणन संघ (हाफेड), उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड और कानपुर की एनसीसीएफ शामिल हैं। सभी एजेंसियों को अलग-अलग क्षेत्रों में खरीद का जिम्मा मिला है। हाफेड को गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, देवीपाटन, झांसी और चित्रकुट मंडल से कुल 40 हजार मीट्रिक टन आलू खरीदने का लक्ष्य मिला है। विपण अधिकारी ने बताया कि केवल गोरखपुर मंडल में ही दो लाख मिट्रिक टन से अधिक आलू उत्पादन होता है। जबकि भंडारण की क्षमता सिर्फ 82 हजार मीट्रिक टन की है। कुशीनगर जिले के एक कोल्ड स्टोरेज में 2200 मीट्रिक टन आलू रखने की जगह है। देवरिया जिले में कोई कोल्ड स्टोरेज चालू नहीं है। महराजगंज व गोरखपुर जिले में आठ-आठ कोल्ड स्टोरेज हैं।
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