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Kushinagar News: नेपाल के जलप्रलय में आई सिल्ट से मुड़ी गंडक की धारा, टूटा तटबंध
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नेपाल में हुए जलप्रलय के दौरान आई सिल्ट के कारण बदल गई गंडक की धारा, दोबारा दबाव पर कमजोर पड़ गया एपी बांध
कुशीनगर में आई बाढ़ के बाद सिंचाई विभाग की टीम ने शुरू किया सर्वे, सामने आई बांध टूटने की तस्वीर
राजन राय
गोरखपुर। नेपाल में जलप्रलय के दौरान कुशीनगर की गंडक नदी में पानी के साथ बड़ी मात्रा में बालू और कंक्रीट (सिल्ट) आने से गाद बढ़ गई। गाद बढ़ने से नदी की धारा कई जगहों पर मुड़ गई और दोबारा जलस्तर बढ़ने पर एपी तटबंध पर दबाव ज्यादा बढ़ गया। नेपाल में भारी बारिश के बाद गंडक बैराज से जब साढ़े छह लाख क्यूसेक तक पानी का डिस्चार्ज हुआ तो एपी तटबंध नदी के तेज प्रवाह को झेल नहीं पाया और चैनपट्टी गांव के सामने टूट गया।
नदी का जलस्तर कम होने के बाद सिंचाई विभाग ने सर्वे शुरू कराया है जिसमें यह वजह सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद सिंचाई विभाग के इंजीनियरों की टीम एपी तटबंध की मरम्मत और नदी की धारा को मोड़कर पुराना अस्तित्व देने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रही है। दरअसल, कुशीनगर में गंडक नदी काफी चौड़ाई में बहती है। यही वजह है कि करीब पांच लाख क्यूसेक तक पानी के डिस्चार्ज के बाद ही खतरे की स्थिति नहीं आती रही है।
सर्वे में पता चला है कि नेपाल में जलप्रलय के दौरान आए मलबे की वजह से गंडक में गाद काफी बढ़ गई। गाद बढ़ जाने से गहराई कम हो गई और नदी की धारा दाहिनी तरफ मुड़ गई है। इसके चलते वेग में आई नदी ने कटान करके बांध के किनारे की सतह को गहरा कर दिया और बंधे पर जगह-जगह दबाव बढ़ गया। सबसे ज्यादा बांध में रिसाव जीरो से सात किलोमीटर के बीच हुआ है। खासकर, अहिरौलीदान गांव के खैरखूटा, नोनिया पट्टी और चैनपट्टी गांव के सामने नदी की धारा जब मुड़ी तो पहले सिल्ट होने के चलते बांध पर कटान तेज हो गई।
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15 दिन में पूरा होगा सर्वे फिर आएगी टीएसी टीम
करीब 17.5 किमी लंबाई वाले एपी तटबंध और नदी के बहाव का सर्वे 15 दिन में सिंचाई विभाग के इंजीनियर पूरा कर लेंगे। इसके बाद सिंचाई विभाग की तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) की टीम आएगी। इसमें दिल्ली, यूपी और बिहार के इंजीनियर शामिल होंगे। यह टीम सर्वे रिपोर्ट का बिंदुवार परीक्षण करेगी और बंधे की मरम्मत और बचाव के उपायों का अध्ययन करके विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी। इस रिपोर्ट को 27-28 अक्तूबर को शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री भी मौजूद रह सकते हैं।
ऐसे बनाएंगे बंधे को मजबूत
- गाद की सफाई होगी
- ठोकर और लॉन्चिंग एप्रन से नदी के घुमाव को सीधा करेंगे
- रिसाव वाली जगहों को चिह्नित करके धारा को कम करेंगे
- एक एंड से दूसरे एंड तक पानी का फ्लो बना रहे इसके लिए प्रयास होंगे
- बंधे पर डबल लेयर में बोल्डर लगाएंगे
- जियो-टेक्सटाइल शीट, क्ले ब्लैंकेट (मिट्टी की परत) या ग्राउटिंग के जरिये रिसाव बंधे के ढलान पर पत्थरों की दोहरी परत
- नदी के प्रवाह को निरंतर बनाए रखने के प्रयास होंगे ताकि एक छोर से दूसरे छोर तक बहाव बना रहे।
कोट
एपी तटबंध के टूटने की वजह और उसे मजबूत बनाने के लिए सर्वे शुरू करा दिया गया है। नेपाल से बड़ी मात्रा में सिल्ट आने से नदी की गहराई कम हो गई और धारा का प्रवाह तेजी से विपरीत दिशा में हो गया। इसके चलते बंधे पर दबाव बढ़ा और टूट गया। कोशिश की जा रही है कि 10 दिन में सर्वे का काम पूरा हो जाए और इसके बाद टीएसी की टीम बुलाई जाएगी। विस्तृत कार्ययोजना तैयार करके 27-28 अक्तूबर को शासन के समक्ष इसे प्रस्तुत किया जाएगा।
- विकास कुमार सिंह, मुख्य अभियंता, सिंचाई विभाग
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कुशीनगर में आई बाढ़ के बाद सिंचाई विभाग की टीम ने शुरू किया सर्वे, सामने आई बांध टूटने की तस्वीर
राजन राय
गोरखपुर। नेपाल में जलप्रलय के दौरान कुशीनगर की गंडक नदी में पानी के साथ बड़ी मात्रा में बालू और कंक्रीट (सिल्ट) आने से गाद बढ़ गई। गाद बढ़ने से नदी की धारा कई जगहों पर मुड़ गई और दोबारा जलस्तर बढ़ने पर एपी तटबंध पर दबाव ज्यादा बढ़ गया। नेपाल में भारी बारिश के बाद गंडक बैराज से जब साढ़े छह लाख क्यूसेक तक पानी का डिस्चार्ज हुआ तो एपी तटबंध नदी के तेज प्रवाह को झेल नहीं पाया और चैनपट्टी गांव के सामने टूट गया।
नदी का जलस्तर कम होने के बाद सिंचाई विभाग ने सर्वे शुरू कराया है जिसमें यह वजह सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद सिंचाई विभाग के इंजीनियरों की टीम एपी तटबंध की मरम्मत और नदी की धारा को मोड़कर पुराना अस्तित्व देने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रही है। दरअसल, कुशीनगर में गंडक नदी काफी चौड़ाई में बहती है। यही वजह है कि करीब पांच लाख क्यूसेक तक पानी के डिस्चार्ज के बाद ही खतरे की स्थिति नहीं आती रही है।
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सर्वे में पता चला है कि नेपाल में जलप्रलय के दौरान आए मलबे की वजह से गंडक में गाद काफी बढ़ गई। गाद बढ़ जाने से गहराई कम हो गई और नदी की धारा दाहिनी तरफ मुड़ गई है। इसके चलते वेग में आई नदी ने कटान करके बांध के किनारे की सतह को गहरा कर दिया और बंधे पर जगह-जगह दबाव बढ़ गया। सबसे ज्यादा बांध में रिसाव जीरो से सात किलोमीटर के बीच हुआ है। खासकर, अहिरौलीदान गांव के खैरखूटा, नोनिया पट्टी और चैनपट्टी गांव के सामने नदी की धारा जब मुड़ी तो पहले सिल्ट होने के चलते बांध पर कटान तेज हो गई।
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15 दिन में पूरा होगा सर्वे फिर आएगी टीएसी टीम
करीब 17.5 किमी लंबाई वाले एपी तटबंध और नदी के बहाव का सर्वे 15 दिन में सिंचाई विभाग के इंजीनियर पूरा कर लेंगे। इसके बाद सिंचाई विभाग की तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) की टीम आएगी। इसमें दिल्ली, यूपी और बिहार के इंजीनियर शामिल होंगे। यह टीम सर्वे रिपोर्ट का बिंदुवार परीक्षण करेगी और बंधे की मरम्मत और बचाव के उपायों का अध्ययन करके विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी। इस रिपोर्ट को 27-28 अक्तूबर को शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री भी मौजूद रह सकते हैं।
ऐसे बनाएंगे बंधे को मजबूत
- गाद की सफाई होगी
- ठोकर और लॉन्चिंग एप्रन से नदी के घुमाव को सीधा करेंगे
- रिसाव वाली जगहों को चिह्नित करके धारा को कम करेंगे
- एक एंड से दूसरे एंड तक पानी का फ्लो बना रहे इसके लिए प्रयास होंगे
- बंधे पर डबल लेयर में बोल्डर लगाएंगे
- जियो-टेक्सटाइल शीट, क्ले ब्लैंकेट (मिट्टी की परत) या ग्राउटिंग के जरिये रिसाव बंधे के ढलान पर पत्थरों की दोहरी परत
- नदी के प्रवाह को निरंतर बनाए रखने के प्रयास होंगे ताकि एक छोर से दूसरे छोर तक बहाव बना रहे।
कोट
एपी तटबंध के टूटने की वजह और उसे मजबूत बनाने के लिए सर्वे शुरू करा दिया गया है। नेपाल से बड़ी मात्रा में सिल्ट आने से नदी की गहराई कम हो गई और धारा का प्रवाह तेजी से विपरीत दिशा में हो गया। इसके चलते बंधे पर दबाव बढ़ा और टूट गया। कोशिश की जा रही है कि 10 दिन में सर्वे का काम पूरा हो जाए और इसके बाद टीएसी की टीम बुलाई जाएगी। विस्तृत कार्ययोजना तैयार करके 27-28 अक्तूबर को शासन के समक्ष इसे प्रस्तुत किया जाएगा।
- विकास कुमार सिंह, मुख्य अभियंता, सिंचाई विभाग